धर्म
3 घंटे पहले
3
विचारों
मंगलवार, 6 अक्टूबर का विशेष पंचांग
आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आगमन हो चुका है और इस बार यह पावन तिथि मंगलवार, 6 अक्टूबर को पड़ रही है। एकादशी तिथि का प्रभाव मंगलवार की मध्यरात्रि 12 बजकर 35 मिनट तक बना रहेगा। इसी दिन इंदिरा एकादशी का व्रत विधि-विधान के साथ संपन्न किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो लोग इस दिन व्रत रखते हैं, वे पितृपक्ष की एकादशी तिथि का श्राद्ध भी इसी दिन करते हैं। नक्षत्रों और योगों की बात करें तो मंगलवार को साध्य योग का प्रभाव पूरे दिन और पूरी रात रहने वाला है, जो बुधवार की सुबह 5 बजे तक प्रभावी रहेगा। इसके अतिरिक्त, अश्लेषा नक्षत्र मंगलवार की रात 10 बजकर 18 मिनट तक बना रहेगा। आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार, पंचांग का यह विशेष संयोग पूजा-पाठ और श्राद्ध कर्म के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
6 अक्टूबर 2026 की महत्वपूर्ण तिथियाँ
- आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि: 6 अक्टूबर की रात 12 बजकर 35 मिनट तक।
- साध्य योग: पूरे दिन और पूरी रात चलते हुए बुधवार की सुबह 5 बजे तक।
- अश्लेषा नक्षत्र: मंगलवार की रात 10 बजकर 18 मिनट तक।
- विशेष आयोजन: इंदिरा एकादशी व्रत और एकादशी तिथि का श्राद्ध।
एकादशी श्राद्ध के शुभ मुहूर्त
पितृपक्ष के दौरान एकादशी श्राद्ध का विशेष महत्व है, जिसके लिए निम्नलिखित समय निर्धारित किए गए हैं:
- कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:48 से दोपहर 12:36 तक।
- रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:36 से दोपहर 01:24 तक।
- अपराह्न काल: दोपहर 01:24 से दोपहर 03:48 तक।
शहरों के अनुसार राहुकाल
किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले राहुकाल का ध्यान रखना अनिवार्य है। विभिन्न शहरों में राहुकाल का समय इस प्रकार है:
- दिल्ली: दोपहर 03:05 से शाम 04:33 तक।
- मुंबई: दोपहर 03:25 से शाम 04:54 तक।
- चंडीगढ़: दोपहर 03:07 से शाम 04:34 तक।
- लखनऊ: दोपहर 02:51 से शाम 04:19 तक।
- भोपाल: दोपहर 03:05 से शाम 04:34 तक।
- कोलकाता: दोपहर 02:22 से दोपहर 03:51 तक।
- अहमदाबाद: दोपहर 03:25 से शाम 04:53 तक।
- चेन्नई: दोपहर 02:56 से शाम 04:26 तक।
सूर्योदय और सूर्यास्त
मंगलवार, 6 अक्टूबर को सूर्योदय सुबह 06:16 बजे होगा, जबकि सूर्यास्त का समय शाम 06:01 बजे निर्धारित है।
इंदिरा एकादशी व्रत का आध्यात्मिक महत्व
आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर इंदिरा एकादशी का व्रत रखना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। चूंकि यह तिथि पितृपक्ष के दौरान आती है, इसलिए इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। शास्त्रों के अनुसार, यदि आपके पूर्वजों ने अनजाने में कोई भूल की हो और वे यमराज के दंड का सामना कर रहे हों, तो इंदिरा एकादशी का व्रत रखकर उसका पुण्य उनके नाम पर दान करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है और पितरों को शांति मिलती है।
Comments
0 comment