जेल हो या NSA का डर, आंदोलन जारी रहेगा: दिल्ली कूच से पहले अभिजीत दिपके की हुंकार महाराष्ट्र 2 घंटे पहले 7
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आगामी 10 अक्टूबर को दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन के मद्देनजर सरकार और पुलिस को चुनौती दी है। उन्होंने साफ कहा कि अगर उन्हें गिरफ्तार भी किया गया, तो कार्यकर्ता पीछे नहीं हटेंगे और जहां रोकेंगे, वहीं जंतर-मंतर बना देंगे।

आंदोलन की रणनीति और गांधीवादी संदेश

चुनाव आयोग में बड़े सुधारों और सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन के पहले सियासत गरमा गई है। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान अपनी गिरफ्तारी की आशंका व्यक्त की है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी प्रकार की पुलिसिया कार्रवाई या गिरफ्तारी से उनके आंदोलन की रफ्तार कम नहीं होगी।

अभिजीत दिपके ने देश भर के युवाओं से एक खास अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि दिल्ली पुलिस प्रदर्शनकारियों को दिल्ली में प्रवेश करने से रोकती है या हिरासत में लेती है, तो युवा महात्मा गांधी के बताए मार्ग पर चलें। उन्होंने युवाओं से कहा कि पुलिस जहां भी उन्हें रोकने का प्रयास करे, वे वहीं बैठकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन शुरू कर दें और उस जगह को ही जंतर-मंतर बना दें। उन्होंने आंदोलनकारियों को रघुपति राघव राजा राम का स्मरण करते हुए पूरी तरह से अहिंसक रहने का मंत्र दिया है।

गिरफ्तारी और एनएसए के डर पर जवाब

दिपके ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 10 अक्टूबर को प्रस्तावित इस प्रदर्शन से प्रशासन घबराया हुआ है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें जेल भेजने या उन पर एनएसए जैसे कड़े कानून लगाने से आंदोलन को चुप नहीं कराया जा सकता है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि सरकार चाहे तो उन्हें गिरफ्तार कर ले या एनएसए लगा दे, लेकिन वे और उनके समर्थक अपने लक्ष्यों की प्राप्ति तक लड़ते रहेंगे।

सीजेपी की प्रमुख मांगें

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिजीत दिपके ने अपने आंदोलन की तीन मुख्य मांगें दोहराईं। उनकी पहली और सबसे प्रमुख मांग सीईसी ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की है और यह भी कि उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने चाहिए। दूसरी मांग एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत प्रभाव से फ्रीज करने की है। इसके अतिरिक्त, तीसरी महत्वपूर्ण मांग चुनाव आयोग में होने वाली नियुक्तियों की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता लाने और आयोग को पूरी तरह से निष्पक्ष और तटस्थ बनाने की है।

नोटिस और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध

अभिजीत दिपके ने दावा किया कि सरकार इस मार्च को दबाने के लिए प्रशासन का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में अब तक दो लोगों को आधिकारिक नोटिस मिल चुके हैं। इतना ही नहीं, राजस्थान में भी उनके एक वॉलंटियर मुकेश को पुलिस की ओर से नोटिस प्राप्त हुआ है। उन्होंने आशंका जताई है कि आने वाले दिनों में देश के अन्य हिस्सों में भी कार्यकर्ताओं को डराने के लिए इसी तरह के नोटिस भेजे जा सकते हैं।

दिपके ने सोशल मीडिया पर भी पाबंदी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इंस्टाग्राम सहित कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सीजेपी से जुड़े कंटेंट पर रोक लगा दी गई है। उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनसे पूछताछ की जा रही है कि लोग दिल्ली कैसे जा रहे हैं और यात्रा का खर्च कौन उठा रहा है। उन्होंने हैरानी जताते हुए पूछा कि क्या 1,000 से 1,500 रुपये के ट्रेन टिकट के खर्च का हिसाब देना भी अब अपराध है? उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस के पास क्या और कोई काम नहीं बचा है जो वे इस तरह की छोटी बातों पर सवाल कर रहे हैं। दिपके ने अंत में महाराष्ट्र पुलिस की प्रशंसा करते हुए कहा कि मुंबई में उनके पिछले प्रदर्शनों के दौरान पुलिस का रवैया काफी सहयोगपूर्ण रहा था।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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