आईआईटी बॉम्बे छात्र खुदकुशी मामला: न्याय के लिए आजाद मैदान में डटे पिता, प्रोफेसर पर गंभीर आरोप महाराष्ट्र एक घंटा पहले 4
आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में उनके पिता रवींद्र वाकोडे ने दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। परिवार का दावा है कि संस्थान में जातिगत भेदभाव के कारण उनके बेटे ने यह कदम उठाया, वहीं पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

न्याय की मांग में सड़कों पर उतरा परिवार

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के 10 दिन बीत जाने के बाद, अब यह मामला एक बड़े आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। अपने 22 वर्षीय होनहार बेटे को खोने के बाद पिता रवींद्र वाकोडे ने सोमवार को दक्षिण मुंबई स्थित आजाद मैदान में अपना अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। परिवार का आरोप है कि संस्थान के भीतर साहिल के साथ जातिगत भेदभाव किया गया, जिसने उसे मौत के दरवाजे पर लाकर खड़ा कर दिया।

रवींद्र वाकोडे का आर-पार का रुख

प्रदर्शन स्थल पर मौजूद रवींद्र वाकोडे ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनके बेटे को न्याय नहीं मिल जाता और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं होती, वे अपना संघर्ष जारी रखेंगे। रवींद्र वाकोडे ने रविवार को एक बयान में अपनी दृढ़ता दिखाते हुए कहा, मुझे अब किसी बात की परवाह नहीं है, भले ही इसके लिए मुझे गिरफ्तार क्यों न कर लिया जाए। मेरे बेटे को संवैधानिक न्याय मिलना ही चाहिए। यह छत्रपति शिवाजी, फुले, शाहू और आंबेडकर का राज्य है और मैं यहां न्याय की लड़ाई लड़ने आया हूं।

क्या है पूरा मामला

आईआईटी बॉम्बे के द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे का शव 18 सितंबर की शाम को उनके छात्रावास के कमरे में फंदे से लटका हुआ मिला था। घटना से कुछ घंटे पहले ही साहिल पर मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान ChatGPT का उपयोग करने के लिए मोबाइल फोन इस्तेमाल करने का आरोप लगा था। फिलहाल मुंबई पुलिस की अपराध शाखा इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है, जिसमें आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है। परिवार ने पूर्व में बृहस्पतिवार को आजाद मैदान में भूख हड़ताल भी की थी और उसके बाद सोमवार से इस बड़े प्रदर्शन की घोषणा की थी।

जांच समिति पर उठे सवाल

संस्थान प्रशासन ने साहिल की मौत की परिस्थितियों की समीक्षा के लिए 10 सदस्यीय समिति का गठन किया है। पुलिस की प्राथमिकी में जातिगत भेदभाव और आत्महत्या के लिए उकसाने के गंभीर आरोप शामिल किए गए हैं। इस मामले में नामजद शिक्षक प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से छुट्टी पर भेज दिया गया है।

छात्रों का लगातार विरोध प्रदर्शन

इस पूरे मामले को लेकर छात्रों में भारी आक्रोश है। शुक्रवार की रात को आईआईटी बॉम्बे के छात्रों ने मोमबत्ती मार्च निकालकर अपना विरोध जताया और जांच समिति के पुनर्गठन की पुरजोर मांग की। छात्रों का आरोप है कि मौजूदा समिति में शामिल कुछ सदस्य प्रोफेसर डूला का खुलकर समर्थन कर रहे हैं, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है। रविवार को भी परिसर में छात्रों का शांतिपूर्ण धरना जारी रहा। परिसर में स्थित जस्टिस कॉर्नर पर शनिवार से ही इस मामले को लेकर लगातार चर्चाएं और विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। देश के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्र संगठन भी वाकोडे परिवार के समर्थन में आगे आए हैं और वे भी एक पारदर्शी जांच तथा दोषियों को सजा देने की मांग कर रहे हैं।

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देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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