महाराष्ट्र
एक घंटा पहले
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शिवाजी पार्क में पुलिस का बड़ा एक्शन
मुंबई का शिवाजी पार्क अचानक से बड़े सियासी हंगामे का केंद्र बन गया। 11 अक्टूबर को यहाँ एक बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं को उजागर करना और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को उठाना था। इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पहुंची प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया को पुलिस ने मौके से ही हिरासत में ले लिया। उनके साथ दर्जनों अन्य प्रदर्शनकारियों को भी पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
हिरासत के दौरान क्या हुआ
इस पूरी घटना के बारे में जानकारी देते हुए पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अंजलि दमानिया को शिवाजी पार्क के निकट रोका गया और तत्पश्चात उन्हें एक वाहन में बैठाकर ले जाया गया। इस दौरान स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी रही। हिरासत में लिए जाने के बाद अंजलि दमानिया ने मीडिया को दिए अपने बयान में कहा, सीजेपी के समर्थन में जैसे ही मैं शिवाजी पार्क पहुंची, सादे कपड़ों में आए पुलिसकर्मियों ने मुझे घेर लिया और हिरासत में ले लिया। मुझे बिल्कुल भी जानकारी नहीं है कि मुझे कहां ले जाया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिवाजी पार्क के पास से पकड़े गए अधिकतर लोगों को शिवाजी पार्क थाने में रखा गया है, जबकि कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों को पास के अलग-अलग थानों में स्थानांतरित किया गया है।
कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस पूरे मामले पर स्पष्ट किया कि शिवाजी पार्क में बिना किसी पूर्व अनुमति के प्रदर्शन करना पूरी तरह से नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने चेतावनी दी कि जो भी लोग अनुमति के बिना भीड़ जुटाएंगे या प्रदर्शन करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इलाके की सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है और मुख्य सड़कों पर बैरिकेड लगाए गए हैं ताकि किसी भी अनधिकृत गतिविधि को रोका जा सके।
विपक्ष का हमला और आदित्य ठाकरे की प्रतिक्रिया
शिवसेना (उबाठा) नेता आदित्य ठाकरे ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार डरी हुई है और मुंबई में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने वाले छात्रों और कार्यकर्ताओं को डराने के लिए पुलिस का सहारा ले रही है। वर्ली के विधायक ठाकरे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि मुंबई पुलिस को शीर्ष स्तर पर बैठे लोगों के दबाव में काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने हिरासत में लिए गए लोगों के प्रति एकजुटता दिखाते हुए कहा कि हम कानूनी मदद के लिए आपके साथ खड़े हैं और हमें यह बताया जाए कि प्रदर्शनकारियों को कहां ले जाया गया है।
मनसे के संदीप देशपांडे ने लगाए गंभीर आरोप
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता संदीप देशपांडे ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस थाना के अधिकारी और भाजपा के कुछ कार्यकर्ता मिलकर नवरात्रि मंडलों के पदाधिकारियों को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ उकसाने का काम कर रहे हैं। देशपांडे ने दावा किया कि इन पदाधिकारियों को कानूनी संरक्षण का लालच दिया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि यह कैसा लोकतंत्र है जहाँ शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति नहीं है और जो लोग अपनी बात रखने आते हैं, उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पुलिस का मुख्य कार्य दंगों को नियंत्रित करना होता है, न कि उन्हें भड़काना। वहीं, मनसे अध्यक्ष अमित ठाकरे ने भी इस पूरी कार्रवाई पर अपनी नाराजगी जताई है।
पिछले प्रदर्शनों का सिलसिला
यह प्रदर्शन केवल 11 अक्टूबर तक सीमित नहीं था। इससे एक दिन पहले यानी 10 अक्टूबर को भी मुंबई के विभिन्न इलाकों जैसे अगस्त क्रांति मैदान और हुतात्मा चौक पर भी सीजेपी के समर्थन में प्रदर्शन किए गए थे। उस दौरान बिना अनुमति के एकत्रित होने के आरोप में लगभग 600 लोगों को हिरासत में लिया गया था। सीजेपी लगातार मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रही है और मतदाता सूचियों में हुई कथित गड़बड़ियों को लेकर अपना विरोध दर्ज करवा रही है।
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