युवा पीढ़ी पर मोहन भागवत का बड़ा बयान, बोले- अब आदेश नहीं, संवाद और तर्क की है जरूरत भारत 3 महीने पहले 55
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि आज की नई पीढ़ी पहले के मुकाबले अधिक सवाल पूछती है और उन्हें केवल आदेश देकर नहीं चलाया जा सकता। पेपर लीक के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों के बीच उन्होंने युवाओं के साथ बेहतर संवाद और सही मार्गदर्शन की वकालत की है।

युवाओं को लेकर आरएसएस प्रमुख की नसीहत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने देश के विभिन्न हिस्सों में पेपर लीक के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों और युवाओं के बढ़ते आक्रोश के बीच नई पीढ़ी को लेकर एक महत्वपूर्ण बात कही है। विश्व मांगल्य सभा द्वारा आयोजित युगानुकूल मातृत्व विषयक प्रबोधन बैठक के समापन समारोह में बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक पीढ़ी का मिजाज पुरानी पीढ़ी से बिल्कुल भिन्न है। भागवत के अनुसार, आज का युवा हर विषय पर सवाल खड़े करता है, इसलिए उन्हें केवल आदेश थमा देने मात्र से काम नहीं चलेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के युवाओं को समझाने के लिए तर्कों का सहारा लेना होगा और उनके साथ लगातार संवाद बनाए रखना होगा।

डिक्टेशन नहीं, अब डिस्कशन का जमाना है

यह बयान ऐसे संवेदनशील समय में आया है जब पूरे देश में, विशेषकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। युवाओं के व्यवहार में आए बदलाव पर प्रकाश डालते हुए मोहन भागवत ने बताया कि पहले के समय में अभिभावकों या बड़ों की बात को बिना किसी सवाल के स्वीकार कर लिया जाता था। उन्होंने कहा कि 'जब हम छोटे थे, तो माता-पिता का निर्णय ही अंतिम होता था। तब कोई बहस नहीं होती थी, मन में अटूट श्रद्धा थी और प्रतिक्रिया देने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता था। लेकिन अब समय पूरी तरह बदल चुका है। नई पीढ़ी हर बात पर सवाल पूछती है और उन्हें संतुष्ट करने के लिए हर कदम पर ठोस तर्क देना पड़ता है।' भागवत का मानना है कि आज का दौर भौतिक संसाधनों और प्रचार के शोर से भरा है, जहां युवाओं को भ्रम और गलत सूचनाओं के जाल से बाहर निकालने की सख्त आवश्यकता है।

युवाओं के साथ समय बिताने पर जोर

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि आज के दौर में डिक्टेशन नहीं, बल्कि डिस्कशन की जरूरत है। उन्होंने परिवारों के भीतर कम होती बातचीत को एक बड़ी समस्या बताया। भागवत के शब्दों में, 'नई पीढ़ी को बहुत अपनापन देने, उन्हें पर्याप्त समय देने और सबसे अधिक उनसे संवाद करने की जरूरत है। हमें उन्हें आदेश नहीं, बल्कि जागरूकता देनी होगी।' उन्होंने सलाह दी कि केवल हुक्म चलाने से बात नहीं बनेगी। समाज और परिवार के सदस्यों को युवाओं के साथ अधिक समय बिताना होगा और उनकी बातों को धैर्यपूर्वक सुनना होगा, ताकि उन्हें सही दिशा में प्रेरित किया जा सके।

नई पीढ़ी भटकी नहीं, बस सही उदाहरण की तलाश में है

एक सवाल के जवाब में उन्होंने युवाओं के बारे में बनी नकारात्मक धारणाओं को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह कहना पूरी तरह गलत है कि नई पीढ़ी भटक गई है। भागवत ने आगे कहा, 'यदि समाज में लोग अपने स्वयं के जीवन से प्रमाणिक और अच्छे उदाहरण प्रस्तुत करेंगे, तो उसका असर नई पीढ़ी पर निश्चित रूप से पड़ेगा। आज युवाओं को सही आदर्श नहीं मिल रहे हैं। जहां भी उन्हें सच्चे और अच्छे उदाहरण देखने को मिलते हैं, वहां वे समाज के हित के लिए अपना जीवन समर्पित करने से भी पीछे नहीं हटते।' उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज को युवाओं के समक्ष सकारात्मक जीवन जीने का उदाहरण रखना चाहिए, जिससे उनमें सार्थक बदलाव आए। गौरतलब है कि जंतर मंतर पर जारी प्रदर्शनों को देखते हुए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं और दिल्ली पुलिस ने स्थिति पर नजर रखने के लिए 18 डीसीपी तैनात किए हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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