अमित कश्यप हत्याकांड: मौत की सजा मिलने के बाद रविता और अमरदीप की जेल में कैसी गुजरी पहली रात? उत्तर प्रदेश 2 घंटे पहले 3
मेरठ की अदालत से फांसी की सजा पाने के बाद रविता और अमरदीप की बेचैनी बढ़ गई है। जेल प्रशासन ने उनकी मानसिक स्थिति को देखते हुए काउंसलिंग कराई है और उनकी बैरक भी बदल दी गई है।

फांसी की सजा के बाद जेल में बदला माहौल

उत्तर प्रदेश के मेरठ में अमित कश्यप हत्याकांड के दोषियों, रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद जेल के भीतर का पूरा वातावरण बदल गया है। मौत का फरमान मिलने के बाद से ही दोनों दोषियों की पहली रात काफी तनाव और बेचैनी के बीच बीती है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा के अनुसार, अदालत के फैसले के बाद से ही दोनों आरोपी गहरे मानसिक दबाव में हैं। उनकी स्थिति को देखते हुए जेल प्रशासन ने सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी विशेष इंतजाम तुरंत लागू कर दिए हैं।

स्वास्थ्य और काउंसलिंग पर विशेष ध्यान

अदालत का फैसला आने के बाद महिला दोषी रविता काफी घबराहट और बेचैनी में देखी गई, जिसके बाद जेल के डॉक्टरों की टीम ने तुरंत उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया। मेडिकल जांच के बाद उसे जरूरी दवाएं दी गईं। जेल अधिकारियों के मुताबिक, अब रविता की तबीयत स्थिर बनी हुई है। इसी जेल में बंद 'नीला ड्रम कांड' यानी सौरभ राजपूत हत्याकांड के दोषी मुस्कान और साहिल की सेहत भी फिलहाल ठीक है। जेल प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए रविता, अमरदीप, मुस्कान और साहिल, इन चारों मौत की सजा पाए कैदियों की विशेष काउंसलिंग कराई है, ताकि उनकी मानसिक स्थिति को स्थिर रखा जा सके और वे किसी तरह का गलत कदम न उठाएं।

नई बैरक और कैदी नंबर की प्रक्रिया

जेल के रिकॉर्ड और सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए प्रशासन ने रविता और अमरदीप को नए कैदी नंबर आवंटित किए हैं। अब रविता की पहचान कैदी संख्या 399/2026 और अमरदीप की पहचान कैदी संख्या 400/2026 के रूप में होगी। सजा के ऐलान के बाद से अब तक इन दोनों से मिलने के लिए जेल में कोई भी परिजन नहीं पहुंचा है। जेल अधिकारियों ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम करते हुए दोनों की बैरकों में भी बदलाव किया है। रविता को महिला बैरक संख्या 12ए में स्थानांतरित किया गया है। वहीं, अमरदीप को बैरक संख्या 1ए में शिफ्ट किया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि अमरदीप को उसी बैरक में रखा गया है जहां 'नीला ड्रम' हत्याकांड का दोषी साहिल शुक्ला पहले से बंद है।

सजायाफ्ता वर्दी और सख्त निगरानी

जेल नियमावली का पालन करते हुए दोनों दोषियों को सजायाफ्ता कैदियों वाली विशेष वर्दी पहनाई गई है और उन्हें नई बैरकों तक शिफ्ट कर दिया गया है। जेल प्रशासन उनकी हर गतिविधि पर लगातार नजर बनाए हुए है। बैरकों के बाहर अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों और पहरेदारों को तैनात किया गया है ताकि उन पर कड़ी निगरानी रखी जा सके। जेल प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि रविता पहले से ही जेल के भीतर बैग बनाने का काम कर रही थी। आगे भी उसे यही काम सौंपे जाने की संभावना है ताकि वह व्यस्त रहे और नकारात्मक विचारों से दूर रह सके। जेल प्रशासन इस बात को लेकर पूरी तरह सतर्क है कि दोषी जेल के भीतर किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न फैलाएं और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह से पालन हो।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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