हिमाचल प्रदेश: कुल्लू और मनाली में ईंधन का गहरा संकट, 4000 से अधिक होटलों पर सर्दियों की मार हिमाचल प्रदेश 6 घंटे पहले 2
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में जलाने वाली लकड़ी और रसोई गैस की कमी से होटल व्यवसायी परेशान हैं, जिससे उन्हें कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ी है।

सर्दियों से पहले संकट की आहट

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में इस बार सर्दियों की दस्तक के साथ ही एक बड़ी चिंता ने डेरा डाल लिया है। मनाली, तीर्थन और पार्वती घाटियों में जलाने वाली लकड़ी की भारी कमी देखी जा रही है, जिसने स्थानीय निवासियों के साथ-साथ होटल कारोबारियों के सामने भी बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। ठंड का मौसम शुरू होने वाला है और ईंधन जुटाने की मशक्कत ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।

एलपीजी की किल्लत और बढ़ी मुसीबत

होटल मालिकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि लकड़ी के साथ-साथ वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत ने आग में घी डालने का काम किया है। बाजार में गैस की उपलब्धता कम होने के कारण होटल संचालक अब खाना पकाने के लिए लकड़ी, कोयले और डीजल बर्नर का उपयोग करने के लिए मजबूर हैं। हालांकि, सरकारी जलावन डिपो से भी लकड़ी की आपूर्ति को सीमित कर दिया गया है, जिससे स्थिति और भी जटिल हो गई है।

बुखारी संस्कृति पर संकट

कुल्लू की संस्कृति में 'बुखारी' का खास महत्व है। यह धातु की अंगीठी लकड़ी जलाकर कमरों को गर्म रखने और खाना बनाने के काम आती है। सर्दियों में यह हर घर और होटल की जरूरत होती है। मनाली के एक होटल व्यवसायी संजय दत्ता के अनुसार, मनाली में 4,000 से अधिक पंजीकृत होटल हैं और जीभी-तीर्थन क्षेत्र में 1,000 से अधिक होटल मौजूद हैं। ईंधन की कमी के कारण इन सभी पर वैकल्पिक संसाधनों को अपनाने का दबाव बढ़ता जा रहा है।

बढ़ते खर्च और महंगाई की मार

होटल मालिकों ने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि ईंधन पर होने वाला उनका मासिक खर्च तीन लाख रुपये के आंकड़े को पार कर गया है। इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ के कारण वे अब अपने मेनू और भोजन की कीमतों में 20 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि करने पर मजबूर हो गए हैं। इसका सीधा असर पर्यटकों की जेब पर पड़ेगा।

प्रशासन का रुख

जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने भी इस स्थिति को स्वीकार किया है कि वाणिज्यिक एलपीजी की मांग को पूरा करने में उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उधर, शमशी और आसपास के इलाकों में स्थित हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम के लकड़ी एवं जलावन बिक्री डिपो ने आपूर्ति को सीमित कर दिया है। यदि समय रहते ईंधन की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो आगामी सर्दियों में पर्यटकों और स्थानीय लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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