तमिलनाडु में RSS का शक्ति प्रदर्शन: 128 जगहों पर पथ संचलन को मद्रास हाईकोर्ट की मंजूरी राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 4
मद्रास हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को तमिलनाडु में 128 स्थानों पर रूट मार्च निकालने की सशर्त अनुमति दे दी है, जिसके बाद चेन्नई सहित राज्य के कई इलाकों में संघ के स्वयंसेवक कदमताल करते नजर आएंगे।

चेन्नई की सड़कों पर गूंजेंगे कदम

तमिलनाडु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के लिए एक बड़ी कानूनी जीत के बाद अब राज्य की सड़कों पर संगठन का शक्ति प्रदर्शन देखने को मिलेगा। मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए संघ को राज्यभर में 128 स्थानों पर रूट मार्च निकालने की हरी झंडी दे दी है। इस महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय के बाद, 25 अक्टूबर और 2 नवंबर को पूरे तमिलनाडु में संघ के स्वयंसेवक पूरी तैयारी के साथ मार्च और जनसभाओं में हिस्सा लेंगे।

चेन्नई में मार्च की विस्तृत रूपरेखा

राजधानी चेन्नई और इसके आसपास के इलाकों में रविवार के लिए सात स्थानों को मार्च के लिए विशेष रूप से चिन्हित किया गया है। इन स्थानों में तिरुवोट्टियूर, कोलाथुर, एग्मोर, कोराट्टूर, अय्यप्पनथांगल, मेदावक्कम और क्रोमपेट जैसे प्रमुख इलाके शामिल हैं। प्रत्येक स्थान के लिए अलग समय और मार्ग निर्धारित किए गए हैं ताकि अनुशासन बना रहे:

  • एग्मोर में मार्च शाम 4 बजे रामदा होटल के समीप से आरंभ होगा और राजरत्नम स्टेडियम के पास इसका समापन होगा, जिसके बाद वहां एक जनसभा भी आयोजित की जाएगी।
  • कोलाथुर में मार्च दोपहर 3 बजे पेरावल्लूर स्थित कामराज प्रतिमा के पास से शुरू होगा।

संगठन के अनुसार, ये सभी कार्यक्रम उनके विजयादशमी उत्सव की एक कड़ी हैं, जिसमें वर्दी पहने स्वयंसेवक अपने पारंपरिक अनुशासन के साथ मार्च करते हैं।

कानूनी लड़ाई और हाईकोर्ट का हस्तक्षेप

इस आयोजन को लेकर आरएसएस के प्रदेश सचिव जगदीशन ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। राज्य सरकार द्वारा कार्यक्रमों को अनुमति देने से इनकार किए जाने के बाद, मामला कानूनी मोड़ पर पहुंच गया था। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि संगठन निर्धारित तिथियों पर इन कार्यक्रमों का आयोजन कर सकता है। यह न्यायिक अनुमति संघ के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे अपने शताब्दी वर्ष का उत्सव मना रहे हैं। आरएसएस की स्थापना विजयादशमी 1925 में हुई थी और 2025 में संगठन ने अपनी स्थापना के 100 साल पूरे कर लिए हैं। अपनी दूसरी शताब्दी में प्रवेश के उपलक्ष्य में पूरे देश में विभिन्न आयोजन किए जा रहे हैं।

विवादों का पुराना इतिहास

तमिलनाडु में आरएसएस के रूट मार्च का इतिहास लगभग सात दशकों पुराना है, लेकिन कई मौकों पर इन्हें अनुमति मिलने में राज्य सरकार के साथ खींचतान देखने को मिली है। इससे पहले भी जब राज्य में डीएमके की सरकार थी, तब भी प्रशासन ने मार्च की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। उस दौरान भी संघ को अदालत का रुख करना पड़ा था और सुप्रीम कोर्ट तक की कार्यवाही के बाद ही उन्हें मार्च निकालने की न्यायिक अनुमति मिल पाई थी। मौजूदा परिदृश्य में भी हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही इन कार्यक्रमों का रास्ता साफ हो सका है।

कार्यक्रम का शेष चरण

हाईकोर्ट के ताजा फैसले के तहत 25 अक्टूबर को होने वाले कार्यक्रमों के बाद, शेष जुलूस 2 नवंबर को आयोजित किए जाएंगे। इस प्रकार, राज्य के कुल 128 स्थानों पर प्रस्तावित पथ संचलन का कार्यक्रम पूरा किया जाएगा। संघ के पारंपरिक कार्यक्रमों में मार्च के अलावा सभाएं भी शामिल होती हैं, जहाँ वक्ता संघ की विचारधारा और लक्ष्यों पर समर्थकों को संबोधित करते हैं। प्रशासन अब अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए इन कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की तैयारी कर रहा है, ताकि शांतिपूर्ण तरीके से यह प्रक्रिया संपन्न हो सके।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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