उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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राज्यसभा चुनाव: सियासी सेमीफाइनल की तैयारी
उत्तर प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा की 10 सीटों के चुनाव ने हलचल पैदा कर दी है। इन सीटों पर होने वाला मतदान केवल संसद के उच्च सदन के लिए नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी दोनों ने अपनी-अपनी चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है।
किसका कार्यकाल हो रहा है समाप्त
सदन में जिन 10 सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें भाजपा के हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, बृजलाल, नीरज शेखर, सीमा द्विवेदी, गीता शाक्य, बनवारी लाल वर्मा और दिनेश शर्मा शामिल हैं। इसके अलावा, समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव और रामजी गौतम का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है।
संख्याबल का गणित
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सदस्यों में से मौजूदा स्थिति कुछ इस प्रकार है:
- एनडीए (भाजपा और सहयोगी): 290 से 294 विधायक।
- सपा और गठबंधन: 103 से 105 विधायक (सपा 101-102 और कांग्रेस 2)।
- एक सीट जीतने के लिए लगभग 37 वोटों की आवश्यकता है।
गणित के अनुसार, भाजपा 7 से 8 सीटें जीतने की स्थिति में है, जबकि समाजवादी पार्टी 2 सीटें सुरक्षित मानकर चल रही है। यदि विपक्ष एकजुट रहता है, तो सपा तीसरी सीट के लिए भी दावेदारी कर सकती है।
दोनों दलों की रणनीति
भाजपा अपने मौजूदा सांसदों में से कई चेहरों को बदलकर नए लोगों को मौका देने की योजना बना रही है। इसमें सामाजिक समीकरणों और 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति को प्राथमिकता दी जा रही है। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव अपने 'पीडीए' फॉर्मूले के तहत पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं को तरजीह देने की तैयारी में हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि निष्क्रिय और स्थानीय स्तर पर विरोध झेल रहे नेताओं के टिकट कटने की पूरी संभावना है।
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