आरबीआई का बड़ा फैसला: यूट्यूबर्स और रील बनाने वालों के लिए बदले नियम, विदेशी कमाई पर देनी होगी पूरी जानकारी व्यापार 7 घंटे पहले 4
भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी क्लाइंट्स से कमाई करने वाले कंटेंट क्रिएटर्स, यूट्यूबर्स और फ्रीलांसर्स के लिए फॉरेन एक्सचेंज से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब इन सभी को अपनी विदेशी आय का विवरण ईडीएफ के माध्यम से अनिवार्य रूप से देना होगा।

डिजिटल दुनिया में कमाई करने वालों के लिए आरबीआई की नई गाइडलाइंस

भारतीय रिजर्व बैंक ने देश के डिजिटल प्रोफेशनल्स के लिए वित्तीय नियमों में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर्स, फ्रीलांसर्स और अन्य कंटेंट क्रिएटर्स के लिए विदेशी मुद्रा से जुड़े नियम और अधिक सख्त हो गए हैं। आरबीआई ने विदेशी क्लाइंट्स से सर्विस के बदले पैसा कमाने वाले लोगों के लिए 1 अक्टूबर 2026 से नए नियम लागू कर दिए हैं। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा के लेनदेन और रिपोर्टिंग को अधिक पारदर्शी बनाना है। अब जो भी क्रिएटर्स भारत से बाहर अपनी सेवाएं देते हैं और विदेशी मुद्रा प्राप्त करते हैं, उन्हें इसकी विस्तृत जानकारी एक्सपोर्ट डेक्लेरेशन फॉर्म यानी ईडीएफ के जरिए देनी होगी।

कौन से लोग आएंगे नए नियमों के दायरे में

आरबीआई के इन संशोधित फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट रेगुलेशंस का प्रभाव उन सभी लोगों पर पड़ेगा जो अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों या संस्थाओं के लिए काम कर रहे हैं। इसके दायरे में आने वाले मुख्य प्रोफेशनल्स में शामिल हैं:

  • यूट्यूबर्स जो गूगल एडसेंस के जरिए विदेशी रेवेन्यू प्राप्त करते हैं।
  • सोशल मीडिया पर रील और कंटेंट बनाने वाले इंफ्लूएंसर्स।
  • इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म जैसे Upwork और Fiverr पर सेवाएं देने वाले फ्रीलांसर्स।
  • विदेशी ग्राहकों के लिए काम करने वाली कंसल्टेंट एजेंसियां और अन्य सर्विस प्रोवाइडर्स।

यह स्पष्ट है कि यह नियम केवल उन लोगों पर लागू होता है जिनकी आय सेवा निर्यात यानी सर्विस एक्सपोर्ट के जरिए होती है। अगर आप मेटा, गूगल या किसी अन्य विदेशी कंपनी से अपने काम के बदले भुगतान प्राप्त करते हैं, तो अब आपको आरबीआई की नई प्रक्रिया का पालन करना ही होगा।

क्या है ईडीएफ (EDF) और इसे जमा करने की प्रक्रिया

सेवा निर्यातकों के लिए अब ईडीएफ जमा करना अनिवार्य है। इस फॉर्म में निर्यात की गई सेवाओं का कुल मूल्य बताना होता है। इस नियम के तहत, घरेलू टैरिफ से जुड़े ऑथराइज्ड डीलर को ही अथॉरिटी माना जाएगा। प्रक्रिया की कुछ मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

  • यदि किसी महीने में एक से अधिक क्लाइंट्स को सेवाएं दी गई हैं, तो एक्सपोर्टर उन सभी के लिए केवल एक ही ईडीएफ फॉर्म जमा कर सकता है।
  • फॉर्म जमा करने की समय-सीमा इनवॉइस जारी होने के महीने के बाद से 30 दिनों के भीतर निर्धारित की गई है।
  • उदाहरण के तौर पर, यदि अक्टूबर 2026 में कोई सर्विस इनवॉइस जारी किया गया है, तो उसे जमा करने की अंतिम तारीख 30 नवंबर 2026 होगी।

बैंक में रिपोर्टिंग और डेटा प्रोसेसिंग

सॉफ्टवेयर के अतिरिक्त अन्य सेवाओं के निर्यात के मामले में, एक्सपोर्टर को अपना ईडीएफ उसी बैंक में जमा करना होगा जो संबंधित विदेशी मुद्रा लेनदेन को हैंडल करता है। यह आपका वह ऑथराइज्ड डीलर बैंक होता है जहां आपकी विदेशी कमाई आती है। एक बार जब आप बैंक में डिक्लेरेशन जमा कर देते हैं, तो बैंक की जिम्मेदारी है कि वह अगले 5 वर्किंग डेज के अंदर इस जानकारी को एक्सपोर्ट डेटा प्रोसेसिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टम यानी ईडीपीएमएस में अपडेट करे।

देरी होने पर क्या होगा विकल्प

आरबीआई के नियमों के अनुसार समय पर अनुपालन बेहद आवश्यक है। यदि किसी कारणवश आप ईडीएफ जमा करने में देरी करते हैं, तो आपको संबंधित ऑथराइज्ड डीलर बैंक से संपर्क करना होगा। आप बैंक को देरी का उचित कारण बताकर समय-सीमा को आगे बढ़ाने के लिए अनुरोध कर सकते हैं। यह सुनिश्चित करना कि आपकी विदेशी आय का हिसाब पारदर्शी रहे, अब डिजिटल युग में काम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी बन गई है। इन नियमों की अनदेखी भविष्य में वित्तीय परेशानियों का कारण बन सकती है, इसलिए समय रहते ही इन नई प्रक्रियाओं को समझना और उनका पालन करना हर कंटेंट क्रिएटर के हित में है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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