मात्र 21 साल की उम्र में कमाल: भारतीय युवक ने जर्मनी में बनाई 360 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली ट्रेन व्यापार एक घंटा पहले 4
आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले के रहने वाले 21 वर्षीय हेमेंद्र कुमार ने जर्मनी में अपनी कंपनी के जरिए हाई-स्पीड ट्रेनों का निर्माण कर पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है।

वैश्विक स्तर पर भारत का गौरव

सामान्य तौर पर जब युवा 21 वर्ष की अवस्था में अपने करियर की दिशा तय करने के लिए संघर्ष कर रहे होते हैं, तब भारत के एक होनहार युवा ने जर्मनी की धरती पर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है। आंध्र प्रदेश के YSR कडप्पा जिले के रहने वाले हेमेंद्र कुमार ने न केवल जर्मनी में अपनी खुद की कंपनी की नींव रखी, बल्कि आज वह एक बड़ी कंपनी के प्रमुख के रूप में भी अपनी भूमिका निभा रहे हैं। उनकी सफलता की कहानी न केवल भारत के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी मिसाल बन चुकी है। हेमेंद्र कुमार द्वारा बनाई गई 360 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली ट्रेन ने वैश्विक स्तर पर रेलवे तकनीक के विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

फ्रैंकफर्ट से संचालित हो रहा तकनीकी साम्राज्य

यह प्रतिभाशाली युवक जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में स्थित ज़ेब्रॉल्ड IHL नाम की एक प्रसिद्ध कंपनी का संचालन कर रहे हैं। यह कंपनी मुख्य रूप से रेलवे वाहनों और अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी के विकास के क्षेत्र में काम करती है। कंपनी के काम के दायरे में ट्रेनों के निर्माण के साथ-साथ रेलवे कोच, स्पेयर पार्ट्स, सिग्नलिंग सिस्टम और बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है। अपनी मेहनत और अटूट लगन के दम पर उन्होंने उन ऊंचाइयों को हासिल किया है, जिसे देख कर आज दुनिया भर की बड़ी-बड़ी कंपनियां भी अचंभित हैं।

अल्ट्रा-मॉडर्न हाई-स्पीड और ड्राइवरलेस ट्रेनें

हेमेंद्र कुमार ने बताया कि उनकी कंपनी का मुख्य लक्ष्य भविष्य की परिवहन जरूरतों को पूरा करना है। वर्तमान में कंपनी 360 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाली अल्ट्रा-मॉडर्न हाई-स्पीड ट्रेनों के निर्माण पर जोर दे रही है। इतना ही नहीं, वे भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ड्राइवरलेस ट्रेनों (बिना चालक वाली ट्रेनें) को विकसित करने की दिशा में भी तेजी से काम कर रहे हैं। उन्होंने जर्मनी को अपने मैन्युफैक्चरिंग सेंटर के रूप में इसलिए चुना, क्योंकि वहां उन्हें बेहतर गुणवत्ता वाले ऑटोमोटिव स्पेयर पार्ट्स बेहद किफायती दरों पर मिल जाते हैं, जो उनकी तकनीकी क्रांति में मददगार साबित हो रहे हैं।

ग्लोबल मार्केट में कंपनी का दबदबा

ज़ेब्रॉल्ड IHL की कार्यप्रणाली के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि कंपनी जर्मनी में कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग के माध्यम से ट्रेनों का निर्माण करती है और फिर बड़े कार्गो कंटेनरों का उपयोग करके इन्हें दुनिया भर के विभिन्न देशों में निर्यात किया जाता है। कंपनी की पहुंच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस समय दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन शहर के लिए एक बड़े रेलवे प्रोजेक्ट पर युद्धस्तर पर काम चल रहा है। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया में भी रेलवे सेवाओं के विस्तार और सुधार के लिए कंपनी विशेष ध्यान दे रही है।

महज दो साल का अनुभव और बड़ी उपलब्धि

हेमेंद्र कुमार की इस उपलब्धि को और अधिक आश्चर्यजनक इसलिए माना जा रहा है, क्योंकि रेलवे डिजाइन के क्षेत्र में उन्हें केवल दो साल का अनुभव है। करीब 11 महीने पहले उन्होंने जर्मनी में अपनी कंपनी की शुरुआत की थी और चार महीने पहले ही उन्होंने आधिकारिक तौर पर इसका कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू किया है। हालांकि कंपनी का मुख्य निर्माण केंद्र जर्मनी में स्थित है, लेकिन उनके डिजाइन सेंटर दुनिया के कुल पांच अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय हैं। इनमें भारत के प्रमुख आईटी हब हैदराबाद और बेंगलुरु भी शामिल हैं। यह कदम साबित करता है कि वे अपने देश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने के प्रति कितने गंभीर हैं।

भारत के लिए भविष्य की योजनाएं

अपनी मातृभूमि के प्रति अपना योगदान देने के विषय पर बात करते हुए हेमेंद्र कुमार ने कहा कि उनका एकमात्र सपना अपने गृह राज्य और देश में आधुनिक जर्मन तकनीक को लाना है। वे भारत में भी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी को सुलभ बनाना चाहते हैं ताकि आम नागरिकों को परिवहन की बेहतर सुविधाएं मिल सकें। कडप्पा के एक छोटे से जिले से निकलकर जर्मनी तक का उनका सफर यह सिद्ध करता है कि उम्र केवल एक संख्या है और दृढ़ इच्छाशक्ति से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। आने वाले समय में वे हल्की और ड्राइवरलेस ट्रेनों पर और अधिक शोध करने की योजना बना रहे हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप