कुल्लू की पहाड़ियों में बड़ा एक्शन, 'मनाला क्रीम' के लिए हो रही अवैध भांग की खेती को NCB और ITBP ने किया तबाह हिमाचल प्रदेश 2 घंटे पहले 4
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में सुरक्षा एजेंसियों ने नशीले पदार्थों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाते हुए अवैध भांग की खेती को नष्ट कर दिया है। इस संयुक्त कार्रवाई में पहली बार आईटीबीपी को शामिल किया गया है ताकि नशों के इस पूरे नेटवर्क की जड़ को खत्म किया जा सके।

हिमाचल प्रदेश में नशीले पदार्थों के खिलाफ संयुक्त अभियान

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में स्थित दुर्गम पहाड़ी इलाकों में ड्रग्स के कारोबार के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों ने एक निर्णायक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), हिमाचल प्रदेश पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने कुल्लू की चोटियों पर लहलहा रही भांग की अवैध फसलों को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। यह वह क्षेत्र है जहां ड्रग माफिया अपनी जड़ों को मजबूत करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सुरक्षा बलों की सतर्कता ने उनकी सारी योजनाओं पर पानी फेर दिया है।

'मनाला क्रीम' के कच्चे माल पर सीधी चोट

कुल्लू के जिन ऊंचे और दुर्गम इलाकों में यह भांग उगाई जा रही थी, वहां से तैयार होने वाली चरस अंतरराष्ट्रीय बाजार में 'मनाला क्रीम' के नाम से कुख्यात है। मादक पदार्थों का धंधा करने वाले माफियाओं ने बड़े ही शातिर तरीके से भांग की खेती की थी। उन्होंने अपने खेतों के चारों ओर कटीले तारों की फेंसिंग (घेराबंदी) की थी, ताकि कोई भी अनजान व्यक्ति या अधिकारी वहां तक आसानी से न पहुंच सके। तस्करों की यह कोशिश थी कि उनकी यह फसल किसी की भी नजर में न आए और सुरक्षित रहे, ताकि बाद में इसका इस्तेमाल नशे के बड़े कारोबार के लिए किया जा सके।

आईटीबीपी की विशेष भूमिका

इस अभियान की सबसे अहम बात यह है कि पहली बार नशीले पदार्थों के खिलाफ चल रहे इस प्रकार के संयुक्त ऑपरेशन में आईटीबीपी (ITBP) के जवानों को शामिल किया गया है। चूंकि यह इलाका अत्यधिक ऊंचाई पर है और यहां पहुंचना बहुत कठिन है, इसलिए आईटीबीपी की विशेषज्ञता और उनके अनुभव का लाभ उठाने का निर्णय लिया गया। इससे पहले एनसीबी, हिमाचल पुलिस और वन विभाग की टीमें इस तरह के अभियानों में काम करती रही हैं, लेकिन अब आईटीबीपी के आने से सुरक्षा बलों की पहुंच और शक्ति दोनों में इजाफा हुआ है।

दुर्गम रास्तों और चुनौतियों का सामना

अभियान से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, कुल्लू के इन क्षेत्रों में ऑपरेशन चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है। इन स्थानों तक पहुंचने के लिए कोई भी पक्का रास्ता मौजूद नहीं है। चारों तरफ ऊंची पहाड़ियां हैं और प्राकृतिक भौगोलिक परिस्थितियां भी काफी कठिन हैं। इसके बावजूद सुरक्षा बल पूरी योजना के साथ आगे बढ़े। माफियाओं द्वारा लगाई गई कटीले तारों की बाधाओं को पार करते हुए टीम ने उन खेतों तक पहुंच बनाई जहां से 'मनाला क्रीम' का कच्चा माल तैयार किया जा रहा था।

रणनीति में बड़ा बदलाव

आमतौर पर कानून प्रवर्तन एजेंसियां तस्करों, सप्लायरों या तैयार हो चुके ड्रग्स को पकड़ने के बाद उन पर कार्रवाई करती हैं, लेकिन कुल्लू में अपनाई गई यह रणनीति काफी अलग है। इस बार सुरक्षा एजेंसियां सीधे उस स्रोत (सोर्स) को खत्म करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, जहां से यह पूरा खेल शुरू होता है। यानी, खेत में फसल के स्तर पर ही उसे नष्ट किया जा रहा है ताकि आगे चलकर चरस बनने की प्रक्रिया ही पूरी न हो सके।

तकनीक का सहारा और जियो-टैगिंग

इस पूरी कार्रवाई को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए एजेंसियां आधुनिक तकनीक का भरपूर इस्तेमाल कर रही हैं। जिस भी स्थान पर भांग की खेती पाई जा रही है, वहां की जियो-टैगिंग की जा रही है। साथ ही, पूरी कार्रवाई को फोटो और वीडियोग्राफी के माध्यम से रिकॉर्ड किया जा रहा है, ताकि एक ठोस सबूत मौजूद रहे। अभियान के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद वन विभाग द्वारा फसल नष्ट किए जाने का आधिकारिक प्रमाण पत्र भी जारी किया जाएगा, जिससे कि भविष्य के लिए पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रहे।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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