संयुक्त राष्ट्र में भारत की दहाड़: पाकिस्तान को दो टूक, कहा- पीओके खाली करो और अल्पसंख्यकों का दमन बंद करो राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 6
जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के दौरान भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने पाकिस्तान के झूठ का पर्दाफाश करते हुए उसे कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने पाकिस्तान को अपने कब्जे वाले कश्मीर को खाली करने और मानवाधिकारों पर उपदेश देने के बजाय अपने गिरेबान में झांकने की नसीहत दी है।

संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पाकिस्तान की घेराबंदी

जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में एक बार फिर पाकिस्तान का झूठ दुनिया के सामने बेनकाब हो गया। भारतीय स्थायी मिशन के काउंसलर क्षितिज त्यागी ने भारत के खिलाफ पाकिस्तान द्वारा फैलाई जा रही नफरत और प्रोपेगेंडा का कड़ा जवाब दिया। राइट ऑफ रिप्लाई का उपयोग करते हुए, त्यागी ने पड़ोसी मुल्क को आईना दिखाते हुए स्पष्ट कर दिया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अटूट और अभिन्न अंग हैं। उन्होंने पाकिस्तान से मांग की कि वह अवैध रूप से कब्जा की गई भारतीय जमीन को तुरंत खाली करे। त्यागी के इस आक्रामक और स्पष्ट रुख की चर्चा हर तरफ हो रही है।

कश्मीरी पंडितों के दर्द का असली जिम्मेदार पाकिस्तान

अपने संबोधन में क्षितिज त्यागी ने 1990 के दशक के उस दौर को याद दिलाया जो भारतीय इतिहास का एक काला अध्याय रहा है। उन्होंने बताया कि किस प्रकार पाकिस्तान ने सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देकर कश्मीरी पंडितों को उनके ही घरों से पलायन करने के लिए मजबूर किया था। भारतीय राजनयिक ने स्पष्ट किया कि इन आतंकियों को प्रशिक्षण देने और हथियार मुहैया कराने का काम सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना और उसकी खुफिया एजेंसियों ने किया था।

इतना ही नहीं, त्यागी ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान पोषित इन आतंकियों ने केवल कश्मीरी पंडितों को ही नहीं, बल्कि उन आम नागरिकों और मुस्लिमों को भी निशाना बनाया जो शांति और विकास के रास्ते पर चल रहे थे। दशकों से निर्दोषों का खून बहाने वाली पाकिस्तानी नीति अब खुद को मानवाधिकारों का संरक्षक बताने का ढोंग कर रही है, जो पूरी तरह बेबुनियाद है।

अल्पसंख्यकों के दमन पर पाकिस्तान को नसीहत

भारत ने इस मंच से पाकिस्तान को नसीहत देते हुए कहा कि जो देश खुद अपने यहां अल्पसंख्यकों के अस्तित्व को मिटाने में लगा है, उसे दूसरों को ज्ञान देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। त्यागी ने बताया कि पाकिस्तान में हिंदू, सिख और ईसाई समुदाय की महिलाओं का जबरन धर्म परिवर्तन एक आम बात हो गई है। वहां की प्रशासनिक व्यवस्था में अल्पसंख्यकों के अधिकारों का लगातार दमन किया जा रहा है। भारत ने यह भी याद दिलाया कि पाकिस्तान दुनिया भर के उन आतंकियों को पनाह देता है जो यूनाइटेड नेशंस द्वारा ब्लैकलिस्ट किए जा चुके हैं। ऐसे देश का हर बयान खोखला है और इसकी पहचान एक आतंकवादी एक्सपोर्टर के रूप में बन चुकी है।

कौन हैं राजनयिक क्षितिज त्यागी

पाकिस्तान को कड़ा जवाब देने वाले भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी भारतीय विदेश सेवा यानी आईएफएस के 2012 बैच के अधिकारी हैं। वर्तमान में वह जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मिशन में काउंसलर के महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं। अपनी वाकपटुता और तार्किक शक्ति से उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत का पक्ष मजबूती से रखा है।

इंजीनियरिंग से विदेश सेवा तक का सफर

क्षितिज त्यागी केवल एक कुशल राजनयिक ही नहीं, बल्कि एक मेधावी इंजीनियर भी रह चुके हैं। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की और उसके बाद उसी संस्थान से थर्मल एनर्जी एवं एनवायरमेंट इंजीनियरिंग में एमटेक की पढ़ाई पूरी की। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि अत्यंत प्रभावशाली रही है।

कॉरपोरेट की मोटी सैलरी को छोड़ा

शिक्षा पूरी करने के बाद क्षितिज त्यागी ने अपने करियर की शुरुआत एक रियल एस्टेट कंसल्टिंग फर्म, जोन्स लैंग लासेल (जेएलएल) के साथ की। वहां उन्होंने 2007 से 2010 तक बिजनेस एनालिस्ट के रूप में काम किया और एक शानदार करियर तथा उच्च वेतन अर्जित किया। हालांकि, उनके मन में समाज के प्रति कुछ बड़ा करने की इच्छा थी। उन्होंने महसूस किया कि वह केवल कॉर्पोरेट के आंकड़ों तक सीमित नहीं रह सकते और उनका उद्देश्य आम आदमी के जीवन में सकारात्मक प्रभाव डालना था। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की और साल 2011 में अपने दूसरे ही प्रयास में ऑल इंडिया 148वीं रैंक हासिल की।

राजनयिक करियर के महत्वपूर्ण पड़ाव

क्षितिज त्यागी ने सिविल सेवा परीक्षा में सोशियोलॉजी और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन को अपने मुख्य विषय के तौर पर चुना था। उनका अंतरराष्ट्रीय राजनयिक सफर 2014 में पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन से शुरू हुआ, जहां उन्होंने भारतीय दूतावास में थर्ड सेक्रेटरी के तौर पर द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दी। इसके बाद उन्होंने ब्राजील के ब्रासीलिया में 2015 से सेकेंड सेक्रेटरी और 2018 में मिस्त्र के काहिरा में फर्स्ट सेक्रेटरी के रूप में अपनी सेवाएं दीं। जनवरी 2024 में उनकी नियुक्ति जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र में फर्स्ट सेक्रेटरी के रूप में हुई। उनकी मेहनत और प्रतिभा को देखते हुए, जनवरी 2025 में उन्हें प्रमोट कर काउंसलर बना दिया गया, जहां वे आज भी पूरी निष्ठा के साथ भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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