केरल: 120 दिनों में ढह गया कांग्रेस का तिलिस्म, निकाय उपचुनावों में अहंकार को मिली करारी शिकस्त राष्ट्रीय राजनीति 3 घंटे पहले 3
मई 2026 में विधानसभा चुनावों में प्रचंड जीत दर्ज करने वाली केरल की वीडी सतीशन सरकार महज 4 महीने के भीतर ही बैकफुट पर आ गई है। स्थानीय निकाय उपचुनावों के नतीजों ने सत्ताधारी यूडीएफ के उस अहंकार को चकनाचूर कर दिया है जो खुद को राज्य का अजेय सिकंदर मान बैठा था।

सत्ता के नशे में चूर कांग्रेस को लगा बड़ा झटका

केरल में कांग्रेस गठबंधन, जिसे यूडीएफ के नाम से जाना जाता है, हालिया निकाय उपचुनावों के नतीजों के बाद गहरे संकट में दिखाई दे रहा है। मात्र 4 महीने पहले विधानसभा चुनावों में राज्य की 140 सीटों में से 102 सीटों पर कब्जा जमाकर इतिहास रचने वाली कांग्रेस ने खुद को अजेय समझ लिया था। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की सरकार और पार्टी के भीतर फैला यह अति-आत्मविश्वास अब भारी पड़ता दिख रहा है। 29 सितंबर 2026 को घोषित हुए 38 स्थानीय निकाय वार्डों के परिणाम इस बात का प्रमाण हैं कि जनता ने महज 120 दिनों के भीतर ही सत्ता के अहंकार को जमीन पर ला दिया है।

चुनाव नतीजों का गणित और कांग्रेस की गिरती साख

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इन 38 वार्डों के उपचुनाव में कांग्रेस गठबंधन के प्रदर्शन में भारी गिरावट आई है। गौरतलब है कि जिन सीटों पर कांग्रेस पहले काबिज थी, वहां भी उसे अब संघर्ष करना पड़ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक:

  • यूडीएफ यानी कांग्रेस गठबंधन को मात्र 19 सीटों पर जीत हासिल हुई है।
  • वामपंथी गठबंधन एलडीएफ ने आक्रामक रुख अपनाते हुए 18 सीटों पर कब्जा जमाया है।
  • एक सीट अन्य उम्मीदवारों के खाते में गई है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पहले इन 38 वार्डों में कांग्रेस की स्थिति काफी मजबूत थी, लेकिन अब उनका संख्या बल 22 से घटकर 19 रह गया है। यह गिरावट कांग्रेस आलाकमान के लिए किसी बड़े खतरे की घंटी से कम नहीं है।

पर्ची सिस्टम और चुनावी हार की असल कहानी

इस चुनाव में एक दिलचस्प और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब किस्मत का फैसला करने वाले पर्ची सिस्टम ने कांग्रेस को धोखा दे दिया। परंपरा के उलट इस बार किस्मत ने कांग्रेस का साथ नहीं दिया, जिसके कारण पार्टी को अपनी सुरक्षित और पारंपरिक सीटों से भी हाथ धोना पड़ा। यह हार केवल संख्या में गिरावट नहीं है, बल्कि उस मनोवैज्ञानिक प्रभाव का भी अंत है जो मई 2026 की जीत के बाद से कांग्रेस के नेताओं में देखने को मिल रहा था।

क्यों नहीं बच पाए विधायकों के इस्तीफे वाले वार्ड?

सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि जिन वार्डों में विधायकों के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीटों पर उपचुनाव हुए, वहां भी सत्ताधारी पार्टी अपनी साख बचाने में नाकाम रही। आमतौर पर, सत्ता में रहने वाली पार्टी के लिए ये सीटें जीतना प्रतिष्ठा का विषय होता है, लेकिन यहां एलडीएफ ने बेहद सटीक रणनीति और आक्रामक प्रचार के जरिए कांग्रेस को बैकफुट पर धकेल दिया। विश्लेषकों का तर्क है कि जनता का मूड बदल रहा है और लोग अब दिखावटी वादों के बजाय जमीन पर दिख रहे काम का आकलन कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के दावों की हवा निकली

उपचुनावों से पहले मुख्यमंत्री वीडी सतीशन और पार्टी के बड़े नेताओं ने इन वार्डों में अपनी जीत को लेकर बड़े-बड़े दावे किए थे। उन्होंने इन उपचुनावों को अपनी सरकार की कार्यशैली पर जनता की मुहर बताया था। हालांकि, परिणाम आने के बाद इन सभी दावों की हवा निकल गई है। जनता के बीच सरकार की कार्यशैली को लेकर जो नाराजगी दबी हुई थी, वह अब इन नतीजों के जरिए खुलकर सामने आई है। यह चुनाव इस बात का स्पष्ट संकेत है कि विधानसभा चुनाव की सुनामी जीत के बावजूद, कांग्रेस का जमीनी आधार धीरे-धीरे खिसक रहा है। आगामी दिनों में पार्टी नेतृत्व के लिए यह एक बड़ी चुनौती होगी कि वे अपनी इस गिरती हुई साख को कैसे संभालते हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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