कर्नाटक में शादी के लिए परेशान किसान पहुंचे मुख्यमंत्री के पास, बोले- दुल्हन ढूंढने में मदद करें सरकार भारत 8 घंटे पहले 6
कर्नाटक के एक किसान ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से गुहार लगाई है कि राज्य में अविवाहित किसानों के लिए सरकार कोई विशेष योजना लाए, क्योंकि जीवनसाथी न मिलने से युवा किसान हताशा में आत्महत्या कर रहे हैं।

कर्नाटक में अविवाहित किसानों का दर्द

कर्नाटक से एक बेहद हैरान कर देने वाला और गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक किसान ने राज्य के उप मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के सामने अपनी व्यथा रखी। शनिवार को पिरियापटना में आयोजित 'प्रजा सेवा' कार्यक्रम के दौरान एक किसान ने सरकार से मांग की है कि वह राज्य के उन अविवाहित पुरुषों के लिए कोई ठोस योजना बनाए, जो किसान हैं और शादी न हो पाने के कारण घोर निराशा के दौर से गुजर रहे हैं। किसान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समाज में स्थिति यह बन गई है कि युवक के पास घर और खेती की जमीन होने के बावजूद उसे कोई दुल्हन नहीं मिल रही है।

जब यह मुद्दा मुख्यमंत्री के सामने रखा गया, तो उन्होंने शुरुआत में मुस्कुराते हुए किसान से सवाल किया कि आखिर मामला क्या है। इसके बाद किसान ने पूरी स्थिति को विस्तार से समझाया और बताया कि कैसे यह समस्या राज्य के हजारों परिवारों को तबाह कर रही है।

जीवन बचाने के लिए हस्तक्षेप की मांग

किसान ने भावुक होते हुए कहा, 35 से 40 साल की आयु के कई पुरुष आज भी कुंवारे हैं। वे पूरी तरह टूट चुके हैं और निराशा के चलते आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठा रहे हैं। इन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए और अपना घर बसाने के लिए जीवनसाथी की जरूरत है। उन्होंने मुख्यमंत्री से हाथ जोड़कर विनती की कि महोदय, इन लोगों की जान बचाने के लिए सरकार को हस्तक्षेप करना ही होगा।

लाखों युवाओं के लिए बड़ी उम्मीद

किसान ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे कर्नाटक के किसानों की एक साझा और गंभीर समस्या बन गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन युवाओं ने कड़ी मेहनत की है, खूब पैसा कमाया है, शानदार घर बनाए हैं और खेती के लिए जमीन भी खरीदी है, लेकिन बावजूद इसके, माता-पिता अपनी बेटियों का हाथ किसान परिवारों को देने में कतरा रहे हैं। किसान का मानना है कि यदि सरकार इस दिशा में कोई आधिकारिक योजना या पहल शुरू करे, तो राज्य के लाखों युवाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकता है।

खेती करने वालों को कोई नहीं देना चाहता बेटी

अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए किसान ने एक बड़ा सवाल भी उठाया। उन्होंने पूछा कि जो लोग दिन-रात मेहनत करके अनाज उगा रहे हैं और पूरे समाज का पेट भर रहे हैं, अगर उनके साथ ही बेटियां ब्याहने से लोग मना करेंगे, तो वे क्या करें? उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यह मसला केवल उनकी निजी परेशानी नहीं, बल्कि राज्य के हर उस किसान की व्यथा है जो समाज की बेरुखी का सामना कर रहा है। मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी बात रखते हुए उन्होंने बार-बार सरकार से मदद का आग्रह किया ताकि इन युवाओं का भविष्य सुरक्षित किया जा सके।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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