मध्य प्रदेश में शिक्षकों के लिए अनिवार्य हुई टीईटी परीक्षा, 1998 से 2010 के बीच भर्ती हुए शिक्षकों पर लागू होंगे नए नियम करियर एक घंटा पहले 3
मध्य प्रदेश लोक शिक्षण संचालनालय ने राज्य के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 1998 से 2010 के बीच नियुक्त और पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण न करने वाले शिक्षकों को अब अनिवार्य रूप से यह परीक्षा देनी होगी।

शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर DPI के नए निर्देश

मध्य प्रदेश में कार्यरत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी MP TET के संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय ने महत्वपूर्ण आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पदस्थ उन शिक्षकों के लिए यह परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है, जिन्होंने अब तक निर्धारित पात्रता परीक्षा पास नहीं की है। नए आदेश के दायरे में मुख्य रूप से वे शिक्षक आते हैं जिनकी नियुक्ति वर्ष 1998 से 2010 के बीच हुई थी।

परीक्षा की पारदर्शिता और व्यवस्था को लेकर चर्चा

इस बार की परीक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए इसका आयोजन राज्य कर्मचारी चयन मंडल के स्थान पर माध्यमिक शिक्षा मंडल को सौंपा गया है। यह परीक्षा ऑफलाइन माध्यम से आयोजित की जाएगी। एक विशेष बिंदु यह है कि परीक्षा केंद्रों पर पर्यवेक्षक के रूप में भी शिक्षकों की ही तैनाती की जाएगी। हालांकि, इस निर्णय के कारण परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर विभिन्न हलकों से सवाल उठाए जा रहे हैं क्योंकि पर्यवेक्षकों की जिम्मेदारी और परीक्षा की गोपनीयता को लेकर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।

किन शिक्षकों को परीक्षा में शामिल होना होगा

शिक्षा का अधिकार अधिनियम यानी RTE के तहत निर्धारित मापदंडों के अनुसार, जिन शिक्षकों ने अभी तक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है, उन्हें अनिवार्य रूप से परीक्षा देनी होगी। इसमें प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के शिक्षक शामिल हैं:

  • प्राथमिक स्तर: इस श्रेणी में सहायक शिक्षक, प्राथमिक शिक्षक, संविदा शाला शिक्षक श्रेणी-तीन और प्रयोगशाला शिक्षक आएंगे।
  • माध्यमिक स्तर: इसमें उच्च श्रेणी शिक्षक, माध्यमिक शिक्षक, अध्यापक और संविदा शाला शिक्षक श्रेणी-दो को शामिल किया गया है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन शिक्षकों ने केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी CTET पहले ही उत्तीर्ण कर ली है, उन्हें इस राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा में दोबारा सम्मिलित होने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्हें इससे राहत दी गई है। इसके अलावा, सरकारी स्कूलों के साथ ही राज्य के निजी यानी अशासकीय स्कूलों में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर पढ़ाने वाले शिक्षक भी अपनी योग्यता सिद्ध करने के लिए इस परीक्षा के लिए आवेदन कर सकेंगे।

आवेदन प्रक्रिया और परीक्षा केंद्र से जुड़ी जानकारी

पात्र और इच्छुक शिक्षक माध्यमिक शिक्षा मंडल के अधिकृत पोर्टल के माध्यम से अपनी ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। विभाग ने आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 5 अक्टूबर निर्धारित की है। परीक्षा केंद्रों के आवंटन को लेकर भी स्पष्टता दी गई है। सामान्य तौर पर शिक्षकों को उनके गृह जिले यानी जिस जिले में वे वर्तमान में पदस्थ हैं, वहीं परीक्षा केंद्र आवंटित करने को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए शिक्षकों को जिले के मुख्यालय पर परीक्षा केंद्र मिलेगा। हालांकि, यदि किसी विशेष जिले में परीक्षार्थियों की संख्या बहुत कम रहती है, तो ऐसी स्थिति में उन्हें निकटतम जिले में परीक्षा केंद्र आवंटित किया जा सकता है।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षकों के पास अब पात्रता परीक्षा देने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है। राज्य सरकार का यह कदम शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और शिक्षकों की पात्रता मानकों को एक समान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। सभी संबंधित शिक्षकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना आवेदन पूरा करने का परामर्श दिया गया है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप