राजस्थान
5 घंटे पहले
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राजस्थान निकाय चुनावों में बीजेपी की बड़ी बढ़त
राजस्थान में वर्ष 2026 के लिए आयोजित निकाय चुनावों के नतीजे अब स्पष्ट होने लगे हैं। इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने विपक्षी दल कांग्रेस पर भारी बढ़त बनाते हुए अपनी सफलता का परचम लहरा दिया है। प्रदेश के कुल 10 नगर निगमों में से 6 निगमों, जिनमें भरतपुर, भीलवाड़ा, अजमेर, उदयपुर, अलवर और पाली शामिल हैं, पर अब बीजेपी का कब्जा हो चुका है। शेष तीन प्रमुख नगर निगमों, यानी जयपुर, जोधपुर और कोटा में महापौर पद का चुनाव 25 सितंबर को संपन्न होगा। कुल मिलाकर देखा जाए तो इस चुनावी रण में बीजेपी ने कांग्रेस को काफी पीछे छोड़ दिया है।
दोपहर ढाई बजे तक की स्थिति
राज्य के 200 निकायों के घोषित परिणामों में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 136 निकायों में जीत दर्ज की है। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी केवल 59 निकायों में ही सिमट कर रह गई है। शेष निकायों की बात करें तो 3 निकायों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है, 1 निकाय में माकपा और 1 अन्य निकाय में आम आदमी पार्टी ने जीत दर्ज की है।
नगर निगमों का पूरा गणित
राजस्थान में कुल 309 निकाय हैं, जिनमें से 10 नगर निगम हैं। इन निगमों में जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर, भरतपुर, पाली, अलवर और भीलवाड़ा शामिल हैं। इनमें से भरतपुर और भीलवाड़ा नगर निगमों में बीजेपी के महापौर प्रत्याशी पहले ही निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जा चुके हैं। आज जिन पांच निगमों के परिणाम घोषित हुए, उनमें से उदयपुर, अजमेर, पाली और अलवर में बीजेपी ने जीत दर्ज की है। बीकानेर नगर निगम एकमात्र ऐसा क्षेत्र रहा जहां कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ और वहां उनका बोर्ड बनने में सफलता मिली।
25 सितंबर को होगा तीन निगमों में चुनाव
जिन तीन निगमों जयपुर, जोधपुर और कोटा में चुनाव बाकी हैं, वहां मतदान की प्रक्रिया 25 सितंबर को पूरी होगी। इन तीनों निगमों के अंतर्गत आने वाले 8 वार्डों के कुछ बूथों पर ईवीएम में तकनीकी खराबी देखी गई थी, जिसके कारण वहां पुनर्मतदान कराना पड़ा। इसी कारण इन नगर निगमों के प्रमुखों के चुनाव को चार दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया था। इसके अलावा कोटा जिले की सुकेत नगरपालिका के एक वार्ड में भी पुनर्मतदान हुआ है, जिसके पालिकाध्यक्ष का चुनाव भी 25 सितंबर को ही होगा। भरतपुर और भीलवाड़ा के अतिरिक्त अन्य 30 निकायों में भी निकाय प्रमुख पहले ही निर्विरोध रूप से निर्वाचित हो चुके हैं।
निर्दलीयों के भरोसे कांग्रेस की हार
दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी ने आज जिन चार नगर निगमों में अपना बोर्ड बनाया, उनमें से केवल उदयपुर में ही पार्टी के पास पूर्ण बहुमत था। बीकानेर में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत था, लेकिन पाली, अलवर और अजमेर में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था। इन तीनों निगमों में निर्दलीय पार्षद 'किंग मेकर' की भूमिका में थे। बीजेपी ने बड़ी चतुराई के साथ निर्दलीय पार्षदों को अपने पाले में किया और कांग्रेस को सत्ता से दूर कर दिया। नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस पार्षदों की संख्या के मामले में आगे होने के बावजूद महापौर बनाने में नाकाम रही।
अजमेर और पाली में कांग्रेस की विफलता
बीजेपी ने अपनी सोची-समझी रणनीति के दम पर उन निगमों में भी जीत दर्ज की जहां कांग्रेस बढ़त बनाए हुए थी। कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा झटका अजमेर और पाली से आया है। अजमेर में बोर्ड बनाने के लिए कांग्रेस ने अपने पार्षदों की बाड़ाबंदी कर उन्हें राजस्थान से बाहर कर्नाटक भेज दिया था, लेकिन यह दांव उल्टा पड़ गया। वे निर्दलीय पार्षदों को साथ लाने में पूरी तरह विफल रहे। वहीं पाली में कांग्रेस को अपने ही पार्षदों से धोखा मिला। वहां कांग्रेस के पास 29 पार्षद होने के बावजूद उनके महापौर उम्मीदवार को मात्र 3 वोट ही प्राप्त हुए। इसका अर्थ यह है कि कांग्रेस के 26 पार्षदों ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ जाकर मतदान किया, जिससे उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
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