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3 घंटे पहले
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वीरता की दास्तान जो दुनिया भर में मशहूर हुई
कैप्टन स्मित के अदम्य साहस और बहादुरी के किस्से इस समय पूरी दुनिया में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। फ्लाईदुबई के इस भारतीय कैप्टन ने जिस तरह से अपनी जान जोखिम में डालकर 174 इजरायली यात्रियों को सुरक्षित बचाया, वह वाकई मिसाल है। उनकी इस जांबाजी की प्रशंसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर डोनाल्ड ट्रंप, बेंजामिन नेतन्याहू और दुबई के क्राउन प्रिंस तक ने की है। इजरायली विदेश मंत्रालय ने तो यहां तक कह दिया है कि भारत, इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई का यह गठजोड़ न केवल इस पूरे क्षेत्र के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के भविष्य के लिए एक नई दिशा है।
आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हुआ भारत, इजरायल और यूएई
इजरायली विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक आधिकारिक पोस्ट साझा करते हुए इस घटना पर विस्तार से चर्चा की। विभाग ने स्पष्ट कहा कि एक जिहादी आतंकवादी का मकसद दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट को क्रैश करके उसमें सवार हर एक यात्री को मौत के घाट उतारना था। हालांकि, उस आतंकवादी का सामना उन निडर इजरायली नागरिकों से हुआ जिन्होंने उसे रोकने के लिए हर संभव प्रयास किया। इस दौरान भारतीय पायलट की सूझबूझ और यूएई के क्रू सदस्यों का सहयोग काबिले तारीफ रहा। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय, इजरायली और अमीराती लोग साथ मिलकर आतंकवाद का डटकर मुकाबला कर रहे हैं और यही एकता आज के समय में दुनिया का भविष्य है।
30 सितंबर को आसमान में क्या हुआ था खौफनाक मंजर
घटना की तारीख 30 सितंबर थी, जब फ्लाईदुबई की वह फ्लाइट जमीन से लगभग 34,000 फीट की ऊंचाई पर अपनी उड़ान भर रही थी। कॉकपिट के अंदर का हाल किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं था। कैप्टन स्मित ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को कॉकपिट के भीतर हुई उन भयानक पलों की पूरी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि को-पायलट हमाम अल-हमामी ने नमाज पढ़ने का बहाना बनाकर उन्हें झांसा दिया। हमामी ने कहा कि उसे प्रार्थना करनी है और उसका समय हो चुका है। कैप्टन स्मित ने भरोसा जताते हुए उसे अनुमति दे दी, लेकिन जैसे ही कैप्टन सामने देख रहे थे, हमामी ने उन पर पीछे से घातक हमला कर दिया। को-पायलट ने कुल्हाड़ी से कैप्टन स्मित पर केवल कुछ ही पलों के भीतर 4 से 5 बार बेरहमी से वार किए।
जख्मी होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने दिखाई हिम्मत
इस खौफनाक हमले में कैप्टन स्मित गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उनकी दृष्टि लगभग समाप्त हो चुकी थी। उन्होंने अपनी बची-खुची ताकत के साथ एक बार कॉकपिट का दरवाजा खोला भी था, लेकिन इससे पहले कि कोई अंदर आ पाता, को-पायलट हमामी ने दरवाजा फिर से बंद कर लिया। कॉकपिट के फर्श पर लहूलुहान पड़े कैप्टन को बाहर से यात्रियों की चीखें सुनाई दे रही थीं। उन्हें पता था कि 174 लोगों की जिंदगी दांव पर लगी है। पूरी हिम्मत जुटाकर, जख्मी हालत में उन्होंने दोबारा दरवाजा खोला। दरवाजा खुलते ही तीन इजरायली यात्री अंदर आए, जिनमें एक पेशे से प्लंबर भी था। कॉकपिट के भीतर का दबाव इतना अधिक था कि शुरुआत में प्लंबर भी लड़खड़ा गया, लेकिन दूसरी कोशिश में उसने खुद को संभाला, नॉब खींचा और विमान को सुरक्षित ऊंचाई पर स्थिर किया।
तेल अवीव की जगह सऊदी अरब में हुई सुरक्षित लैंडिंग
उधर, अन्य दो इजरायली यात्रियों ने हमलावर को-पायलट को दबोच लिया और कॉकपिट के अंदर संघर्ष चलने लगा। इसी दौरान दो अन्य पायलट भी वहां पहुंच गए, जो तेल अवीव से आगे की यात्रा के लिए वहां मौजूद थे। उन लोगों ने आतंकवादी के हाथ से क्रैश एक्स छीन लिया और उसे बांध दिया। भारतीय कैप्टन को तुरंत प्राथमिक उपचार दिया गया ताकि उनका खून बहना बंद हो सके। स्थिति पर नियंत्रण पाने के बाद नए कैप्टन ने यात्रियों को संबोधित करते हुए घोषणा की कि अब विमान तेल अवीव नहीं, बल्कि सऊदी अरब में उतरेगा। इस घोषणा के साथ ही विमान में मौजूद सभी यात्रियों ने राहत की सांस ली और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा विमान गूंज उठा।
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