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2 घंटे पहले
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संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद के खिलाफ भारत का कड़ा संदेश
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत ने आतंकवाद को वैश्विक शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा करार दिया है। न्यूयॉर्क में आयोजित छठी समिति के सत्र के दौरान, भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य और भारतीय जनता पार्टी के सांसद बिप्लब कुमार देब ने आतंकवाद को लेकर देश का पक्ष रखा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद का कोई स्वरूप स्वीकार्य नहीं है और इसे कभी भी किसी भी तर्क के आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता। भारत ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए दुनिया को एक होकर इस चुनौती का सामना करना होगा।
आतंकवाद के वर्गीकरण पर भारत का रुख
अपने संबोधन में बिप्लब देब ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि कैसे कुछ देश आतंकवाद को अपनी सुविधानुसार अलग-अलग श्रेणियों में बांटते हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि दुनिया में 'अच्छे' और 'बुरे' आतंकवाद के बीच कोई अंतर नहीं होता। जब निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया जाता है, तो उसके पीछे कोई भी कारण या औचित्य नहीं हो सकता। भारत की ओर से यह एक मजबूत संदेश था कि आतंकवाद के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी या भेदभाव वैश्विक शांति के प्रयासों को कमजोर करता है।
नई तकनीकों के दुरुपयोग पर चिंता
भारत ने इस बात पर चिंता जाहिर की कि आतंकवादी समूह अब आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल अपने नापाक मंसूबों को पूरा करने के लिए कर रहे हैं। बिप्लब देब ने रेखांकित किया कि इंटरनेट और डिजिटल संसाधनों का उपयोग युवाओं को कट्टरपंथी बनाने, आतंक का प्रचार करने, ऑपरेशन्स की योजना बनाने और अवैध रूप से धन जुटाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी और कानूनी सहयोग को तत्काल मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि इन तकनीकों के दुरुपयोग को रोका जा सके।
CCIT को लागू करने की जोरदार मांग
भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र में CCIT यानी व्यापक अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने की मांग दोहराई। भारत लंबे समय से वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत और सर्वसम्मत कानूनी ढांचा बनाने की वकालत करता रहा है। भारत का मानना है कि इस कन्वेंशन के लागू होने से आतंकवादियों और उनके संरक्षकों पर लगाम लगाना आसान हो जाएगा।
पहलगाम हमले का जिक्र और जवाबदेही
बिप्लब देब ने अपने वक्तव्य में सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद के कारण होने वाले नुकसान का उल्लेख किया। उन्होंने अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले का विशेष तौर पर जिक्र किया। गौरतलब है कि अप्रैल 2026 में हुए उस भीषण हमले में 26 नागरिकों की जान चली गई थी। सांसद ने कहा कि केवल हमलावरों को ही नहीं, बल्कि उन साजिशकर्ताओं, धन मुहैया कराने वालों और उन्हें शरण देने वाले प्रायोजकों को भी जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
आतंकवाद के खिलाफ भारत की 6 प्रमुख प्राथमिकताएं
सांसद बिप्लब देब ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने आतंकवाद से निपटने के लिए भारत की 6 प्रमुख प्राथमिकताओं को रखा है:
- आतंकवादी फंडिंग के स्रोतों को पूरी तरह से बंद करना।
- उभरती हुई नई तकनीकों के दुरुपयोग पर अंकुश लगाना।
- आतंकवाद के शिकार हुए पीड़ितों को कार्रवाई के केंद्र में रखना।
- राष्ट्रीय स्तर पर देशों की क्षमता निर्माण को मजबूत करना।
- आतंकवादी विचारधारा और उसके बुनियादी ढांचे को जड़ से खत्म करना।
- सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना।
भारत ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए सीमा पार आतंकवाद के विरुद्ध हर संभव कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ और अधिक सक्रिय और एकजुट होकर प्रतिक्रिया देने का आग्रह किया है।
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