भारत के इस ‘हथियार’ से अमेरिका में मचा था कोहराम, पहली बार सामने आया अंतरिक्ष हमले का वह खौफनाक सच राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 2
साल 2019 में भारत के मिशन शक्ति परीक्षण ने वाशिंगटन की नींद उड़ा दी थी, जिसे लेकर अब पूर्व अमेरिकी खुफिया अधिकारी डेविड ग्रश ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

अमेरिका में क्यों मचा था भारत के नाम का हड़कंप?

भारत के ऐतिहासिक 'मिशन शक्ति' को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म है। हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान पूर्व अमेरिकी खुफिया अधिकारी ने उस वाकये का जिक्र किया है, जिसने अमेरिका के रक्षा प्रतिष्ठानों में खलबली मचा दी थी। यह कहानी उस समय की है जब भारत ने अंतरिक्ष में एक लाइव सैटेलाइट को पूरी तरह नष्ट कर अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन किया था। भारत की इस अचानक और सटीक कार्रवाई ने अमेरिकी अधिकारियों को इस कदर पैनिक मोड में डाल दिया था कि वे फौरन नई दिल्ली फोन घुमाने पर मजबूर हो गए थे। यह घटना न केवल तकनीकी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण थी, बल्कि इसने वैश्विक राजनीति के समीकरणों को भी रातों-रात बदल कर रख दिया था।

जब वाशिंगटन के गलियारों में बजने लगीं इमरजेंसी घंटियां

इस पूरे घटनाक्रम का विवरण पूर्व अमेरिकी खुफिया अधिकारी और व्हिसलब्लोअर डेविड ग्रश ने ‘द जो रोगन एक्सपीरियंस’ पॉडकास्ट में दिया है। ग्रश के अनुसार, मार्च 2019 में जब भारत ने ‘मिशन शक्ति’ को अंजाम दिया, तो अमेरिका की किसी भी प्रमुख खुफिया एजेंसी के पास इस परीक्षण का कोई पूर्व संकेत या इनपुट मौजूद नहीं था। वाशिंगटन को इस बात का तनिक भी अंदाजा नहीं था कि भारत अंतरिक्ष में इतना बड़ा सैन्य शक्ति प्रदर्शन करने वाला है।

ग्रश ने उस तनावपूर्ण माहौल को याद करते हुए बताया कि जब उन्हें भारतीय मिसाइल परीक्षण की खबर मिली, तो वे अपने दफ्तर में मौजूद थे। उसी समय उनके पास रखे तमाम गुप्त और सुरक्षित फोन एक साथ बजने लगे। अमेरिकी इंटेलिजेंस के अधिकारी पूरी तरह अफरा-तफरी की स्थिति में थे। वे आनन-फानन में नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों और विशेषज्ञों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे ताकि यह समझा जा सके कि आखिर माजरा क्या है। अधिकारियों के मन में यह सवाल कौंध रहा था कि क्या भारत किसी बड़े युद्ध की तैयारी में जुटा है या यह कोई रणनीतिक शक्ति परीक्षण है? ग्रश ने अपनी उस समय की उलझन को बयां करते हुए कहा कि उनके मन में सिर्फ एक ही विचार चल रहा था कि आखिर यह अचानक क्या हो गया, जिससे पूरी दुनिया की नजरें भारत की ओर टिक गईं।

मिशन शक्ति: भारत की वह ऐतिहासिक कामयाबी

27 मार्च 2019 को भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा था। भारत ने एंटी-सैटेलाइट मिसाइल (A-SAT) का सफल परीक्षण कर दुनिया को अपनी ताकत का एहसास कराया था। ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से दागी गई एक इंटरसेप्टर मिसाइल ने निचली पृथ्वी की कक्षा में 300 किलोमीटर की ऊंचाई पर तैर रही एक लाइव सैटेलाइट को पिन-पॉइंट सटीकता के साथ निशाना बनाकर टुकड़े-टुकड़े कर दिया था।

इस सफल परीक्षण के साथ ही भारत दुनिया का चौथा ऐसा राष्ट्र बन गया, जिसके पास अंतरिक्ष में दुश्मन की सैटेलाइट को मार गिराने की क्षमता मौजूद है। इस उपलब्धि से पहले केवल अमेरिका, रूस और चीन के पास ही ऐसी मारक क्षमता थी। भारत की इस ‘काइनेटिक इंटरसेप्ट’ तकनीक के बेहद सटीक और चुपचाप निष्पादन ने अमेरिकी रक्षा विश्लेषकों को गहरे सदमे में डाल दिया था।

मलबे का डर और पेंटागन की चिंता

सैटेलाइट के नष्ट होने के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी रक्षा अधिकारियों और पेंटागन के भीतर घबराहट का माहौल बन गया था। अमेरिका को सबसे बड़ी चिंता इस बात की थी कि सैटेलाइट के मलबे से अंतरिक्ष में कचरा फैल जाएगा, जो भविष्य में उनकी अपनी सैन्य और व्यावसायिक सैटेलाइट्स के लिए खतरा बन सकता है। अंतरिक्ष में मलबे पर नजर रखने वाली ‘यूनाइटेड स्टेट्स स्ट्रैटेजिक कमांड’ ने तत्काल प्रभाव से उन सैकड़ों टुकड़ों की निगरानी शुरू कर दी थी। अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता था कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) या उनके अपने स्पेस एसेट्स को कोई नुकसान न पहुंचे। हालांकि, भारत ने यह परीक्षण बहुत कम ऊंचाई पर किया था, जिसका फायदा यह हुआ कि सारा मलबा कुछ ही हफ्तों के भीतर वायुमंडल में गिरकर जल गया और नष्ट हो गया।

वैश्विक राजनीति में भारत का बढ़ता प्रभाव

‘मिशन शक्ति’ ने वैश्विक अंतरिक्ष राजनीति की दिशा ही मोड़ दी। इस परीक्षण के पहले तक पश्चिमी देशों का नजरिया भारत को लेकर केवल एक ऐसे देश का था, जो नागरिक सैटेलाइट्स और रॉकेट लॉन्च तक सीमित है। लेकिन इस मिशन ने स्पष्ट कर दिया कि भारत अपनी अंतरिक्ष संपत्तियों की रक्षा करने में पूरी तरह समर्थ है।

हालांकि शुरुआत में वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच मलबे और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को लेकर कुछ कड़वाहट दिखी थी, लेकिन समय के साथ इस मिशन ने भारत को एक ‘अपरिहार्य स्पेस सुपरपावर’ के रूप में स्थापित कर दिया। डेविड ग्रश का यह खुलासा साबित करता है कि 2019 में भारत के उस साहसिक कदम ने वाशिंगटन के गलियारों को किस कदर हिलाकर रखा था। भारत की इस ‘साइलेंट स्ट्राइक’ ने पूरी दुनिया को संदेश दे दिया कि जब देश की रणनीतिक सुरक्षा की बात आती है, तो भारत किसी भी महाशक्ति के दबाव में नहीं, बल्कि अपने हितों को प्राथमिकता देता है। आज दुनिया के बड़े राष्ट्र भारत की इस ऑर्बिटल डिफेंस क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता को गंभीरता से लेते हैं।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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