पाकिस्तान में सवा सौ साल पुराना हिंदू मंदिर तोड़े जाने पर भारत की तीखी प्रतिक्रिया, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भारत 11 घंटे पहले 8
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर को गिराए जाने पर भारत ने गहरी चिंता जताई है और पाकिस्तानी सरकार से दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

ऐतिहासिक मंदिर को तोड़े जाने पर भारत ने जताया कड़ा विरोध

भारत ने पड़ोसी देश पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक बेहद पुराने और ऐतिहासिक हिंदू मंदिर को जमींदोज किए जाने की खबरों पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। भारत सरकार ने इस घटना की तीखे शब्दों में निंदा की है और वहां की शहबाज सरकार से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस पवित्र स्थल को नुकसान पहुंचाने वाले दोषियों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाया जाना बेहद जरूरी है।

इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान के नारोवाल जिले के सिराज गांव में स्थित एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर को तोड़े जाने की खबरें बेहद विचलित करने वाली हैं। उन्होंने कहा कि हम अल्पसंख्यकों के इस पावन स्थल के साथ की गई इस शर्मनाक और निंदनीय तोड़-फोड़ की घोर भर्त्सना करते हैं। यह मंदिर एक सदी से भी अधिक पुराना था। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान सरकार को अपनी मुख्य जिम्मेदारी समझते हुए इस अपवित्र किए गए मंदिर को फिर से बहाल करने के लिए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए।

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर भारत ने उठाए गंभीर सवाल

भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए वहां की प्रशासनिक व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया है। भारत की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस सदी पुराने मंदिर की सुरक्षा करने में पाकिस्तानी अधिकारियों की ढिलाई और उदासीनता साफ तौर पर दिखाई देती है, जो अत्यंत चिंताजनक है।

बयान में आगे कहा गया कि ऐसी दर्दनाक घटनाएं इस कड़वी सच्चाई को बार-बार उजागर करती हैं कि पाकिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के लोग लगातार असुरक्षा के साये में जी रहे हैं। वहां उनके बुनियादी धार्मिक अधिकारों और पूजा-स्थलों का सरेआम और गंभीर उल्लंघन किया जा रहा है। भारत सरकार ने पाकिस्तान से पुरजोर मांग की है कि वह इस बर्बर घटना की बिना किसी देरी के निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करवाए ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जा सके।

मदरसे के विस्तार का आरोप या बारिश का बहाना? पाकिस्तान में छिड़ा विवाद

पाकिस्तानी समाचार पत्र 'द डॉन' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नारोवाल में इस प्राचीन मंदिर को गिराए जाने के बाद खुद पाकिस्तान के भीतर भी भारी विवाद खड़ा हो गया है। वहां के स्थानीय अल्पसंख्यक अधिकार संगठनों और सरकारी दावों में भारी विरोधाभास देखने को मिल रहा है।

इस पूरे मामले में अलग-अलग पक्ष इस प्रकार हैं:

  • मदरसे के विस्तार का आरोप: अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन 'पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी' (PMMP) का सीधा आरोप है कि पास में स्थित एक मदरसे की जमीन को बढ़ाने के लिए कुछ लोगों के समूह ने इस ऐतिहासिक ढांचे को सुनियोजित तरीके से और जानबूझकर गिराया है।
  • ईंटों और धातुओं की चोरी: PMMP ने अपनी शिकायत में यह भी दावा किया है कि अराजक तत्वों ने मंदिर के ढांचे को ढहाने के बाद वहां से कीमती ईंटें, मंदिर के गुंबद में लगी धातु की फिटिंग और अन्य सामान भी चुरा लिए। इस संगठन ने आरोपियों के खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर स्थानीय प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है।
  • प्रशासन का अजीब दावा: दूसरी तरफ, पाकिस्तान में गैर-मुस्लिमों की संपत्तियों की देखरेख करने वाले सरकारी निकाय इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका दावा है कि मंदिर को किसी ने तोड़ा नहीं है, बल्कि लगातार हो रही भारी बारिश की वजह से यह जर्जर ढांचा खुद-ब-खुद ढह गया।

गौरतलब है कि यह ऐतिहासिक मंदिर करीब 125 साल से भी ज्यादा पुराना बताया जा रहा है और इस पूरे विवाद की शुरुआत 21 अगस्त को मंदिर के ढहाए जाने के बाद हुई। अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों के साथ होने वाला यह खिलवाड़ पाकिस्तान में मानवाधिकारों की जमीनी हकीकत को बयां करता है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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