350 KMPH की रफ्तार से दौड़ेगी देसी बुलेट ट्रेन, दिल्ली से पटना का सफर महज 3 घंटे में होगा पूरा राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 2
भारत अब स्वदेशी तकनीक से 350 KMPH की रफ्तार वाली हाई-स्पीड ट्रेन विकसित करने की तैयारी में है, जिससे दिल्ली-पटना जैसे प्रमुख मार्गों पर यात्रा के समय में भारी कटौती होगी।

भारत का हाई-स्पीड रेल विजन

भारत सरकार देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए निरंतर बड़े निवेश कर रही है। इसमें सड़कों से लेकर रेल और हवाई यात्रा तक के क्षेत्रों को आधुनिक बनाने का काम तेजी से जारी है। इसी महत्वाकांक्षी मिशन का एक मुख्य हिस्सा बुलेट ट्रेन परियोजना है। फिलहाल, देश की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलाने के लिए काम बहुत तेजी से चल रहा है। इस परियोजना के बीच एक नई और सुखद खबर सामने आई है, जो भविष्य में भारतीय रेल की तस्वीर बदलने वाली है। भारत अब स्वयं अपनी बुलेट ट्रेन का उत्पादन करने की राह पर है। ये देसी बुलेट ट्रेनें 350 KMPH की गति से पटरी पर दौड़ने में सक्षम होंगी।

समय और गति का नया समीकरण

इस नई स्वदेशी तकनीक के आने से न केवल यात्रा का अनुभव बदलेगा, बल्कि समय की भी भारी बचत होगी। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, इन ट्रेनों के चलने से दिल्ली से पटना की दूरी 3 घंटे से भी कम समय में पूरी की जा सकेगी। वहीं, मुंबई से अहमदाबाद की यात्रा भी डेढ़ घंटे से कम की रह जाएगी। रेलवे की भविष्य की योजनाओं में दिल्ली-वाराणसी और दिल्ली-हावड़ा (वाया पटना) समेत कई प्रमुख मार्गों को हाई-स्पीड नेटवर्क से जोड़ना शामिल है। भारत 2030 तक 350 KMPH की डिजाइन स्पीड वाली अपनी हाई-स्पीड ट्रेन को विकसित करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है।

परियोजना की संशोधित लागत और रेलवे का प्रस्ताव

रेलवे मंत्रालय ने हाल ही में मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना की संशोधित लागत को लेकर कैबिनेट के सामने एक विस्तृत प्रस्ताव रखा है। मंत्रालय ने बताया है कि भारत में विकसित की जाने वाली B35 हाई-स्पीड ट्रेन को जापान की अगली पीढ़ी की E10 सीरीज के बराबर डिजाइन स्पीड के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की कुल लागत को अब सरकार ने 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की मंजूरी दी है। यह आंकड़ा 2015 के शुरुआती अनुमान यानी 1.1 लाख करोड़ रुपये की तुलना में लगभग दोगुना है। वर्तमान में इस परियोजना की प्रति किलोमीटर लागत करीब 399 करोड़ रुपये बैठती है।

जापान के साथ तकनीकी सहयोग और भविष्य की राह

रेलवे मंत्रालय ने कैबिनेट को अवगत कराया कि जापान ने दिसंबर 2024 में यह जानकारी साझा की थी कि मौजूदा E5 सीरीज ट्रेनों का उत्पादन अब बंद किया जा रहा है। जापान ने संकेत दिया है कि नई E10 ट्रेनों का उत्पादन 2030 से शुरू होगा और 2034 तक ये परिचालन के लिए तैयार हो सकेंगी। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत में B35 ट्रेन को स्वदेशी रूप से विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भविष्य में यदि जापान की E10 ट्रेनें उपलब्ध होती हैं, तो उन्हें भी मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर चलाने की संभावना तलाशी जाएगी।

B28 ट्रेनों का निर्माण और अनुबंध

फिलहाल भारत ने B28 हाई-स्पीड ट्रेन के निर्माण पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। इन ट्रेनों की डिजाइन स्पीड 280 किमी प्रति घंटा होगी, जबकि मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर इनकी अधिकतम परिचालन गति 250 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए BEML को 32 B28 ट्रेनों के निर्माण का ठेका दिया गया है। इन ट्रेनों की दो प्रोटोटाइप इकाइयां 2027 की पहली तिमाही तक परीक्षण के लिए तैयार होने की उम्मीद है। इसके अलावा, BEML को 15 अतिरिक्त B28 ट्रेनों के निर्माण के लिए 5,400 करोड़ रुपये का एक अलग अनुबंध भी सौंपा गया है।

लागत बढ़ने के पीछे के प्रमुख कारण

परियोजना की लागत में हुई वृद्धि के कई महत्वपूर्ण कारण हैं। रेलवे मंत्रालय अपने हाई-स्पीड नेटवर्क के साथ स्वदेशी भारत ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (BTCS) भी तैयार कर रहा है। यह प्रणाली ट्रेनों की गति, उनके बीच की सुरक्षित दूरी और परिचालन सुरक्षा को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण है। इसका विकास चीन के स्वदेशी CTCS सिग्नलिंग सिस्टम की तर्ज पर हो रहा है। लागत बढ़ने के अन्य मुख्य कारकों में शामिल हैं:

  • भूमि अधिग्रहण की लागत में तीन गुना से अधिक की वृद्धि, जो बढ़कर 19,700 करोड़ रुपये पहुंच गई है।
  • बुनियादी ढांचे के विकास की लागत में लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी, जो अब 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
  • ट्रेनों और सिग्नलिंग सिस्टम के तकनीकी खर्चों में करीब 100 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।

508 किलोमीटर लंबे इस मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को पूरा करने का लक्ष्य दिसंबर 2030 तक तय किया गया है। शुरुआती चरणों में इस मार्ग पर B28 ट्रेनें चलेंगी, जिसके बाद उच्च गति वाली B35 और E10 ट्रेनें भी यात्रियों की सेवा में जुड़ सकती हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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