भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी खुशखबरी, विदेशी मुद्रा भंडार में आया 136.38 अरब डॉलर का सैलाब व्यापार 11 घंटे पहले 7
भारतीय रिजर्व बैंक की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में विदेशी मुद्रा के प्रवाह ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। एनआरआई के निवेश और विभिन्न विदेशी वित्तीय साधनों के माध्यम से देश को 136.38 अरब डॉलर की बड़ी धनराशि प्राप्त हुई है।

भारत में विदेशी धन का बड़ा प्रवाह

भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक बहुत ही सकारात्मक और राहत देने वाली जानकारी सामने आई है। देश के विदेशी मुद्रा भंडार में रिकॉर्ड स्तर की बढ़त दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, एक विशेष योजना के माध्यम से भारत में कुल 136.38 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जमा हुई है। इस उपलब्धि में सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण भूमिका विदेशों में कार्यरत भारतीयों यानी एनआरआई (NRI) की रही है। आने वाले समय में इस भारी विदेशी फंड के माध्यम से भारत की वित्तीय स्थिति और अधिक मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

FCNR(B) डिपॉजिट का मिला बड़ा लाभ

केंद्रीय बैंक के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो 31 अगस्त तक की अवधि में FCNR(B) यानी विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) डिपॉजिट के जरिए कुल 127.226 अरब डॉलर की राशि जुटाई गई है। इसके अतिरिक्त, विदेशों से ली गई विदेशी मुद्रा में कर्ज (OFCB) के माध्यम से 5.26 अरब डॉलर और बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ECB) के जरिए 3.891 अरब डॉलर की पूंजी प्राप्त हुई है। इन सभी माध्यमों को यदि एक साथ जोड़ दिया जाए, तो भारत द्वारा जुटाई गई कुल विदेशी मुद्रा की राशि 136.377 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच गई है।

योजना के लक्ष्य पूरे होने पर जल्दी समाप्ति

आरबीआई ने विदेशी पूंजी जुटाने के लिए इस विशेष सुविधा की शुरुआत 8 जून को की थी। इस योजना को मूल रूप से 30 सितंबर तक संचालित करने का विचार था, लेकिन निर्धारित लक्ष्य समय से पहले ही हासिल कर लिए गए। नतीजतन, रिजर्व बैंक ने इस सुविधा को 31 अगस्त को ही बंद करने का निर्णय ले लिया। FCNR(B) डिपॉजिट की प्रक्रिया यह है कि इसमें एनआरआई अपनी विदेशी मुद्रा को भारत के बैंकों में एक निश्चित समयावधि के लिए जमा कराते हैं। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि निवेश की गई मूलधन राशि और उस पर मिलने वाला ब्याज दोनों ही उसी विदेशी मुद्रा में वापस किए जाते हैं, जिससे जमाकर्ताओं को रुपये की विनिमय दर में होने वाले उतार-चढ़ाव का कोई जोखिम नहीं उठाना पड़ता।

मुद्रा बाजार को मिलेगी स्थिरता

इस बड़े निवेश से आरबीआई और भारतीय बैंकिंग तंत्र के पास विदेशी मुद्रा का एक विशाल अतिरिक्त भंडार उपलब्ध हो गया है। यदि भविष्य में वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बनता है या रुपये पर दबाव बढ़ता है, तो यह राशि विदेशी मुद्रा बाजार में संतुलन बनाने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगी। यह घटनाक्रम दुनिया भर में बसे करीब 3.5 करोड़ प्रवासी भारतीयों की आर्थिक सामर्थ्य को भी दर्शाता है। कठिन वैश्विक स्थितियों के बीच एनआरआई की जमा पूंजी भारत के लिए विदेशी मुद्रा का एक भरोसेमंद और मजबूत स्रोत बनकर उभरी है।

ऐतिहासिक संदर्भ और वर्तमान स्थिति

आरबीआई ने वर्ष 2013 के 'Taper Tantrum' के दौर में भी FCNR(B) के माध्यम से ऐसी ही योजना शुरू की थी, जिसमें लगभग 26 अरब डॉलर जुटाए गए थे और उस दौरान रुपये को संकट से उबारने में यह कदम निर्णायक रहा था। हालिया आंकड़ों पर नजर डालें तो 21 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह में भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 12.422 अरब डॉलर की बड़ी बढ़ोतरी के साथ 729.328 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था।

आर्थिक विकास दर का बढ़ता प्रभाव

विदेशी मुद्रा का यह प्रवाह ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया आर्थिक और भू-राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। इन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने शानदार प्रदर्शन किया है। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में देश ने 7.8 फीसदी की GDP ग्रोथ दर्ज की है, जो कि आरबीआई के 7 फीसदी के अनुमान से भी काफी अधिक है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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