राहुल गांधी का वोट चोरी का नैरेटिव हुआ फेल, ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर उठाए सवालों ने कांग्रेस को ही घेरा राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 4
राहुल गांधी और इंडी गठबंधन ने चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार पर वोट चोरी के गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन तथ्यों और पुराने रिकॉर्ड्स ने उनके दावों की हवा निकाल दी है।

राहुल गांधी की राजनीति और वोट चोरी का दावा

राहुल गांधी और विपक्षी दल आजकल नरेंद्र मोदी के खिलाफ माहौल बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। कांग्रेस का पूरा प्रयास इस समय राहुल गांधी की छवि को सुधारने और उन्हें एक आक्रामक नेता के रूप में पेश करने का है। इसी कोशिश में पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर बिना किसी ठोस आधार के लगातार हमले किए जा रहे हैं। राहुल गांधी का ताजा नैरेटिव 'वोट चोरी' का है। वे दावा कर रहे हैं कि चुनाव प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ की जा रही है, लेकिन हकीकत यह है कि उनके अपने तर्क ही अब कांग्रेस पर भारी पड़ रहे हैं और उनकी रणनीति विफल होती नजर आ रही है।

इंडी गठबंधन की एकता पर उठे सवाल

विपक्ष ने चुनाव आयोग के मसले को लेकर पीएम मोदी को घेरने का एक बड़ा जाल बुना था। राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें अखिलेश यादव, ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल जैसे बड़े नेता साथ दिखे। उन्हें लगा कि यह मोदी सरकार के खिलाफ माहौल गर्म करने का बेहतरीन मौका है। हालांकि, स्थिति यह है कि 'इंडी' गठबंधन के भीतर ही सब कुछ ठीक नहीं है। एक साथ बैठक बुलाने का फैसला तो हो गया, लेकिन अब कोई भी नेता एक-दूसरे के साथ सहज नहीं दिख रहा है। कोई अपनी व्यस्तता बता रहा है, तो कोई गठबंधन की मजबूती पर ही सवाल उठा रहा है।

ज्ञानेश कुमार पर विवाद और कांग्रेस का दोहरा रुख

विपक्ष का मुख्य आरोप ज्ञानेश कुमार पर है। कांग्रेस का कहना है कि उन्हें हटाया जाए क्योंकि वे मोदी को जिताने का काम कर रहे हैं। यहां सवाल यह उठता है कि क्या कांग्रेस यह मानती है कि ज्ञानेश कुमार से पहले के चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष थे? इतिहास गवाह है कि ज्ञानेश कुमार के आने से पहले भी नरेंद्र मोदी लगातार जीतते रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस ने खुद कई राज्यों में जीत हासिल की है, फिर भी वे चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर ही उंगली उठा रहे हैं।

वोटर लिस्ट का शुद्धिकरण: 2018 बनाम आज

कांग्रेस आज एसआईआर (SIR) प्रक्रिया का विरोध कर रही है और कह रही है कि 13 करोड़ 30 लाख नाम हटाए गए हैं। लेकिन 2018 में यही कांग्रेस राजस्थान और मध्य प्रदेश में वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण की मांग कर रही थी। उस समय सचिन पायलट ने दावा किया था कि राजस्थान में 42 लाख फर्जी वोटर हैं और उन्हें हटाया जाना चाहिए। वही काम आज जब चुनाव आयोग कर रहा है, तो कांग्रेस इसे वोट चोरी बता रही है। यह साबित करता है कि जब परिणाम उनके पक्ष में नहीं होते, तो वे चुनाव प्रणाली पर ही सवाल खड़े कर देते हैं।

बेला एस्टेट का मामला और चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण

राहुल गांधी ने हाल ही में दिल्ली के बेला एस्टेट का उदाहरण देते हुए कहा था कि वहां 728 लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। चुनाव आयोग ने इसका तथ्यात्मक जवाब दिया है। आयोग के अनुसार, वहां के घर 2021-23 के बीच हटा दिए गए थे, जिसके बाद नियम के तहत उन नामों को एएसडीडी (ASDD) सूची में डाल दिया गया था। अब वहां के लोगों के लिए विशेष कैंप लगाकर नाम फिर से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राहुल गांधी का दावा सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट बनकर रह गया है।

सुकुमार सेन का दौर और इतिहास की सच्चाई

वोटर लिस्ट की बात करते हुए हमें 1950 के दशक के सुकुमार सेन के कार्यकाल को भी देखना चाहिए। तब 28 लाख महिलाओं के नाम इसलिए हटा दिए गए थे क्योंकि वे अपना नाम बताने के बजाय पिता या पति का नाम बता रही थीं। यह एक प्रक्रिया थी ताकि नागरिक के तौर पर महिलाओं की पहचान सुनिश्चित हो सके। आज के दौर में भी वोटर लिस्ट को अपडेट करना आयोग की जिम्मेदारी है, लेकिन विपक्ष इसे अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए इस्तेमाल कर रहा है।

निष्कर्ष

कल होने वाली इंडी गठबंधन की बैठक में अखिलेश यादव, उद्धव ठाकरे और डीएमके जैसे दलों की अनुपस्थिति और आपस में चल रही बयानबाजी यह दर्शाती है कि कांग्रेस का नेतृत्व अब गठबंधन के भीतर भी कमजोर हो रहा है। राहुल गांधी का चेहरा चमकाने की यह कवायद हकीकत के धरातल पर दम तोड़ती दिख रही है। जनता अब जान चुकी है कि 'वोट चोरी' का शोर केवल एक नैरेटिव है, जिसमें कांग्रेस खुद घिरती नजर आ रही है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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