राहुल गांधी को जनता से माफी मांगनी चाहिए: चुनाव आयोग पर विवाद के बीच हिमंत बिस्वा सरमा का तीखा हमला भारत 5 घंटे पहले 6
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी पर चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने को लेकर निशाना साधा है, वहीं चुनाव आयोग ने अपनी हालिया बैठक में SIR प्रक्रिया से जुड़ी सभी भ्रांतियों को खारिज कर दिया है।

चुनाव आयोग पर विवाद और हिमंत बिस्वा सरमा का बयान

भारत में चुनावी संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सियासत गरमा गई है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा है कि अब समय आ गया है कि राहुल गांधी और उनकी पार्टी देश की जनता से माफी मांगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग की कार्यशैली और SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा था। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी ने बिना किसी ठोस आधार के मुख्य चुनाव आयुक्त पर एकतरफा निर्णय लेने के गंभीर आरोप लगाए थे, जबकि पूरे चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि संस्थान के सभी फैसले सर्वसम्मति से ही लिए जाते हैं।

चुनाव में हार के बाद ड्रामा करने का आरोप

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने आगे कहा कि राहुल गांधी का व्यवहार संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी राहुल गांधी या कांग्रेस पार्टी किसी राज्य में चुनाव हारते हैं, चाहे वह असम हो, बंगाल हो या देश का कोई अन्य हिस्सा, वे तुरंत ड्रामा करना शुरू कर देते हैं। मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि राहुल गांधी ने लोगों के मन में भ्रम क्यों पैदा किया और किस आधार पर देश की एक प्रतिष्ठित संस्था पर इतने बड़े हमले किए? उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जनता राहुल गांधी के इन प्रयासों को देख रही है और आने वाले समय में उन्हें इसके लिए कड़ी सजा मिलेगी।

ज्ञानेश कुमार पर राहुल गांधी के निशाने के बाद बढ़ा तनाव

दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर सदन तक सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधे निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उनके साथ मिलकर मैच फिक्सिंग की है। राहुल के इन आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार किया है। बीजेपी के नेता नितिन नवीन ने कहा कि SIR के नाम पर कांग्रेस की भ्रामक साजिश का पर्दाफाश हो चुका है और पार्टी केवल झूठ के सहारे संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को नुकसान पहुंचा रही है।

चुनाव आयोग की बैठक में सभी अटकलों का अंत

पिछले कुछ दिनों से चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की जो खबरें चल रही थीं, उन पर शनिवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद पूर्ण विराम लग गया है। इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विनीत जोशी उपस्थित थे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य SIR प्रक्रिया को लेकर उठ रहे विवादों को सुलझाना और जनता के बीच फैले भ्रम को दूर करना था।

चुनाव आयोग ने लिए 9 बड़े निर्णय

तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से जारी एक आधिकारिक प्रेस नोट के जरिए यह स्पष्ट किया गया कि आयोग एकजुट है। विवाद के बाद पहली बार हुई इस पूर्ण बैठक में कुल 9 महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। इनमें से 5 निर्णय विशेष रूप से मौजूदा SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं को हो रही तकनीकी और प्रशासनिक परेशानियों को दूर करने से संबंधित हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। इसके अलावा, कैबिनेट सचिव को लिखे गए कथित पत्रों को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों को भी खारिज कर दिया गया है। वहीं, पवन खेड़ा मामले पर हिमंत बिस्वा सरमा ने दो टूक शब्दों में कहा कि कानून अपना काम निष्पक्ष रूप से करेगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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