वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच RBI बढ़ा सकता है रेपो रेट, दिसंबर में 0.50 प्रतिशत की बढ़ोतरी के आसार व्यापार 3 घंटे पहले 5
भारतीय स्टेट बैंक की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती महंगाई और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के चलते भारतीय रिजर्व बैंक दिसंबर की समीक्षा बैठक में रेपो रेट में 0.50 प्रतिशत तक का इजाफा कर सकता है।

रेपो रेट में बढ़ोतरी से महंगे होंगे कर्ज

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद रेपो रेट 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.50 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया है। करीब 4 साल के लंबे अंतराल के बाद केंद्रीय बैंक द्वारा रेपो रेट में यह बढ़ोतरी की गई है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने देश में बढ़ती महंगाई के दबाव को देखते हुए यह कदम उठाया है। इस निर्णय का सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा, क्योंकि रेपो रेट में वृद्धि होने से बैंक से लिए जाने वाले सभी प्रकार के लोन महंगे हो जाएंगे।

फरवरी 2023 की स्थिति और आगामी अनुमान

इससे पहले आरबीआई ने फरवरी 2023 में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी, जिससे दर 6.50 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। हालांकि, अब आर्थिक विशेषज्ञों का यह मानना है कि केंद्रीय बैंक अगली मौद्रिक नीति समीक्षा में और अधिक कड़ा रुख अपना सकता है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि आरबीआई अगली बार रेपो रेट में 0.50 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी कर सकता है।

दिसंबर की समीक्षा में हो सकता है बड़ा फैसला

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आरबीआई दिसंबर महीने में होने वाली अपनी अगली मौद्रिक नीति बैठक में रेपो दर में 0.50 प्रतिशत की वृद्धि कर सकता है। एसबीआई के जानकारों का कहना है कि 0.25 प्रतिशत की वर्तमान बढ़ोतरी के साथ मौद्रिक नीति के रुख को 'सूझ-बूझ भरी सख्ती' की ओर ले जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि केंद्रीय बैंक सतर्क है।

वैश्विक आर्थिक हालात और भविष्य की चुनौतियां

एसबीआई की रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि महंगाई की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए दिसंबर में रेपो दर को 5.50 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.00 प्रतिशत करना एक उचित विकल्प हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक हालात काफी अस्थिर होने की आशंका है। हालांकि, यह निर्णय पूरी तरह से उस समय की वैश्विक परिस्थितियों और आर्थिक वातावरण पर निर्भर करेगा।

विदेशी पूंजी प्रवाह और एआई नीति की आवश्यकता

आरबीआई की बुधवार की बैठक से पूर्व कई अर्थशास्त्री यह अनुमान लगा रहे थे कि केंद्रीय बैंक अक्टूबर और दिसंबर में 0.25 प्रतिशत की दो बार बढ़ोतरी करेगा। इसके अलावा, एसबीआई की रिपोर्ट में रुपये को मजबूती प्रदान करने के लिए एक स्पष्ट एआई नीति तैयार करने की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया गया है। रिपोर्ट का मानना है कि इस तरह की नीति से देश में विदेशी पूंजी के प्रवाह को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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