Ghazipur: 300 साल पुरानी ये 3 बुर्जियां थीं नवाबों का सुरक्षा कवच, सुरंगों का रहस्य आज भी कायम उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 62
गाजीपुर की ऐतिहासिक बुर्जियां नवाब शेख अब्दुल्ला की सुरक्षा रणनीति का एक अहम हिस्सा थीं, जो आज भी अपने भीतर सुरंगों और नवाबी दौर के कई राज समेटे हुए हैं।

नवाबी दौर का सुरक्षा चक्र

इतिहास के पन्नों में गाजीपुर का अपना एक खास स्थान है। अगर गहराई से देखा जाए तो जमलापुर की ये 300 साल पुरानी बुर्जियां किसी मजबूत किले से कम नहीं हैं। ये संरचनाएं 1736 में नवाब शेख अब्दुल्ला द्वारा तैयार की गई उस सैन्य रणनीति का हिस्सा थीं, जिसने उस समय गाजीपुर को एक सुरक्षित शहर के रूप में स्थापित किया था। हालांकि, समय की मार के चलते आज ये धरोहरें खंडहर में बदल चुकी हैं, फिर भी इनके अवशेष नवाबों के गौरवशाली अतीत की गवाही देते हैं।

प्रशासनिक इतिहास और नवाब शेख अब्दुल्ला

ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, 1736-1744 के दौरान नवाब शेख अब्दुल्ला गाजीपुर के एक अत्यंत प्रभावशाली प्रशासक थे। वे जागीरदार शेख मुहम्मद कासिम खान के पुत्र थे। अवध यानी लखनऊ के नवाबों ने गंगा किनारे स्थित इस संवेदनशील क्षेत्र की कमान उन्हें सौंपी थी, ताकि व्यापार और सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त रखा जा सके। अपने 8 साल के शासनकाल में उन्होंने नवाबगंज से लेकर कासिमाबाद तक किलों और चौकियों का एक विशाल नेटवर्क खड़ा कर दिया था।

सुरंगों का जाल और रानियों की सुरक्षा

स्थानीय मान्यताओं और उपलब्ध साक्ष्यों के मुताबिक, जमलापुर की यह जगह महज एक निगरानी चौकी नहीं थी। इन बुर्जियों के नीचे भूमिगत सुरंगों का एक जटिल जाल बिछा हुआ था, जो गाजीपुर शहर और जमलापुर के बागान इलाकों तक जुड़ा था। माना जाता है कि इन गुप्त रास्तों का इस्तेमाल आपातकालीन स्थिति में रानियों की सुरक्षा और सुरक्षित निकासी के लिए किया जाता था।

पर्यटन की दृष्टि से उपेक्षित धरोहर

स्थानीय निवासी खेदू जी बताते हैं कि कुल 3 ऐसी बुर्जियां हैं, जिनमें से एक जमलापुर में, कुछ कासिमाबाद में और एक बसवाड़ी के पास स्थित है। ये सभी लगभग 300 साल पुरानी मानी जाती हैं। वर्तमान में यह स्थान अपनी उपेक्षा के कारण केवल फिल्म और वीडियो शूटिंग की लोकेशन बनकर रह गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि प्रशासन द्वारा इन ऐतिहासिक बुर्जियों का सही संरक्षण किया जाए, तो यह क्षेत्र पर्यटन के लिहाज से एक महत्वपूर्ण केंद्र साबित हो सकता है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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