डीजल की कीमतों में भारी अंतर का असर, पेट्रोल पंपों पर बिक्री सीमित करने को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया व्यापार 2 घंटे पहले 5
डीजल के थोक और खुदरा दामों में 50 रुपये का अंतर आने के बाद निजी कंपनियों ने पंपों पर बिक्री की सीमा तय कर दी है, जिस पर सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई है।

डीजल बिक्री पर पाबंदी मंजूर नहीं, सरकार की सख्त चेतावनी

डीजल की खुदरा और थोक कीमतों में भारी अंतर के कारण उपजे हालात से निपटने के लिए अब सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। निजी क्षेत्र के पेट्रोल पंपों पर डीजल की अचानक बढ़ी मांग और बिक्री को सीमित करने की खबरों के बीच पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने गुरुवार को साफ कर दिया कि ईंधन की बिक्री को नियंत्रित करना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि पेट्रोल और डीजल की बिक्री को सीमित करने की किसी भी कंपनी को अनुमति नहीं दी जा सकती और इस मामले में सरकार की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

निजी कंपनियों के फैसले से बाजार में खलबली

पेट्रोलियम सचिव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब जियो-बीपी और नायरा एनर्जी जैसी निजी ईंधन कंपनियों ने अपने कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों के लिए डीजल की खरीद की मात्रा सीमित कर दी है। दरअसल, थोक और खुदरा डीजल के भावों में आए बड़े अंतर की वजह से बड़े उपभोक्ता जैसे कारखाने, होटल, अस्पताल और दूरसंचार कंपनियां अब थोक खरीद के बजाय खुदरा पेट्रोल पंपों से तेल खरीदना पसंद कर रही हैं, क्योंकि वहां उन्हें डीजल अपेक्षाकृत काफी सस्ता मिल रहा है।

कीमतों में 50 रुपये तक का बड़ा अंतर

वर्तमान में डीजल की खुदरा और थोक कीमतों के बीच करीब 50 रुपये प्रति लीटर तक का बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। इस भारी अंतर के चलते औद्योगिक उपभोक्ता एक ही बार में 400 से 600 लीटर तक डीजल की खरीदारी कर रहे हैं। इस बेतहाशा मांग का सीधा असर पेट्रोल पंपों के स्टॉक पर पड़ रहा है। चूँकि पंपों की भंडारण क्षमता निश्चित होती है और सप्लाई रिफिल होने में कई दिनों का समय लग सकता है, इसलिए कंपनियां दबाव में हैं। स्थिति को संभालने के लिए जियो-बीपी ने कुछ स्थानों पर प्रति ग्राहक रोजाना अधिकतम 50 लीटर की सीमा तय की है, वहीं नायरा एनर्जी के पंपों पर यह सीमा 70 से 200 लीटर के बीच निर्धारित की गई है।

मंत्रालय की कंपनियों पर नजर

इस पूरे मामले पर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि मंत्रालय लगातार निजी तेल कंपनियों के संपर्क में बना हुआ है, हालांकि उन्होंने इस पर अधिक विस्तृत जानकारी देने से परहेज किया। गौरतलब है कि मई महीने से ही पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम काफी चढ़ चुके हैं। वहीं दूसरी ओर, थोक उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की कीमतें सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार की दरों से जुड़ी हुई हैं, जिस वजह से उनमें लगातार तेजी देखी जा रही है।

ईंधन की आपूर्ति पर कंपनियों का पक्ष

अपने बचाव में जियो-बीपी ने एक बयान जारी कर कहा था कि उसके सभी पेट्रोल पंप सुचारू रूप से चल रहे हैं और वहां ईंधन का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। कंपनी का कहना है कि वे परिवहन और अन्य अनिवार्य जरूरतों के लिए ईंधन की समान उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। इसी तरह नायरा एनर्जी ने भी दावा किया है कि वे अपने 7000 से अधिक डीलर स्टेशनों पर आपूर्ति को लेकर पूरी तरह सजग हैं। हालांकि, इन दोनों ही कंपनियों ने पंपों पर लागू की गई खरीद सीमा के बारे में सीधे तौर पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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