राष्ट्रीय राजनीति
4 घंटे पहले
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विचारों
मन की बात में पीएम मोदी का संबोधन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित हुए अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात के माध्यम से थाईलैंड के एक ऐसे गणेश भक्त की प्रेरक कथा दुनिया के सामने रखी, जिसने सभी को प्रभावित किया। पीएम मोदी ने बताया कि भगवान गणेश के प्रति अटूट श्रद्धा के लिए भौगोलिक सीमाएं कोई बाधा नहीं हैं। उन्होंने थाईलैंड के निवासी पंथौन थीरखानोन की गणेश भक्ति का विशेष रूप से जिक्र किया। पीएम ने कहा कि हाल ही में पूरे भारत में गणेश उत्सव का त्योहार बहुत ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया है, जो वातावरण को भक्तिमय बना देता है।
पिता का तोहफा और भक्ति का उदय
प्रधानमंत्री ने पंथौन थीरखानोन के जीवन के एक दिलचस्प मोड़ के बारे में बताते हुए कहा कि उनकी गणेश भक्ति की शुरुआत एक साधारण उपहार से हुई थी। जब पंथौन 19 वर्ष के थे, तब उनके पिता ने उन्हें भगवान गणेश की एक तस्वीर उपहार में दी थी। इसी तस्वीर ने उनके मन में बाप्पा के प्रति ऐसी आस्था जगाई कि उन्होंने अपना पूरा जीवन उनकी सेवा और शोध में समर्पित कर दिया। थाईलैंड में भगवान गणेश को फ्रा फिकानेत के नाम से संबोधित किया जाता है और वहां उनकी पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है।
चार दशक की साधना और अष्टविनायक यात्रा
पंथौन थीरखानोन ने गणेश परंपराओं को समझने के लिए चार दशक से भी अधिक का लंबा समय बिताया है। इस दौरान उन्होंने भारत और नेपाल सहित एशिया के कई देशों की यात्रा की। उनका महाराष्ट्र से गहरा लगाव रहा है। उन्होंने अष्टविनायक परंपरा के बारे में विस्तार से अध्ययन किया और वे कई बार महाराष्ट्र आ चुके हैं। पंथौन के अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि आज थाईलैंड के श्रद्धालुओं के बीच अष्टविनायक यात्रा बेहद लोकप्रिय हो गई है।
10 हजार मूर्तियों का अनूठा संग्रहालय
पंथौन थीरखानोन ने वर्ष 2002 में उत्तरी थाईलैंड के चियांग माई में गणेश हिमाल म्यूजियम की नींव रखी थी। यह संग्रहालय आज गणेश जी की आस्था का एक बड़ा केंद्र बन चुका है, जिसमें 10,000 से अधिक गणेश प्रतिमाएं संग्रहित हैं। पीएम मोदी ने बताया कि इस म्यूजियम में उन भक्तों के लिए अष्टविनायक की विशेष प्रतिमाएं भी रखी गई हैं, जो किसी कारणवश भारत आने में असमर्थ रहते हैं।
सांस्कृतिक विस्तार का प्रतीक
इस म्यूजियम में हर रविवार सुबह करीब 10 बजे गणेश जी की विधि-विधान के साथ पूजा और अर्चना की जाती है। इतना ही नहीं, गणपति से जुड़े विभिन्न अवसरों पर यहाँ विशेष अनुष्ठान भी आयोजित किए जाते हैं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह उदाहरण स्पष्ट करता है कि भारत की प्राचीन आस्था, कला और सांस्कृतिक परंपराएं किस तरह वैश्विक स्तर पर लोगों को जोड़ रही हैं। अंत में, पीएम मोदी ने सभी देशवासियों के लिए मंगलकामना करते हुए कहा कि गणपति बाप्पा का आशीर्वाद और कृपा सदैव उन पर बनी रहे। यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि संस्कृति का प्रसार सीमाओं से परे जाकर मानवता को जोड़ने का काम करता है।
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