देश की पाठशाला: क्या भारत को अस्थिर करने का अंतरराष्ट्रीय जाल बिछ चुका है? फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट से बड़ा खुलासा राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 5
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में दिल्ली और पेरिस के विरोध प्रदर्शनों के बीच एक ग्लोबल नेटवर्क का कनेक्शन सामने आया है, जिसके बाद देश की सियासत गरमा गई है।

ग्लोबल नेटवर्क का हुआ पर्दाफाश

अमेरिकी न्यूज चैनल फॉक्स न्यूज की एक हालिया रिपोर्ट ने भारतीय राजनीति और सुरक्षा तंत्र में हलचल मचा दी है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में 'नए भारत' के निर्माण की प्रक्रिया को रोकने और सरकार को अस्थिर करने के लिए एक सोची-समझी साजिश रची जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली और पेरिस में हाल के दिनों में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के पीछे कोई संयोग नहीं, बल्कि एक ही ग्लोबल नेटवर्क का हाथ है। इस नेटवर्क को 'रेड-ग्रीन प्रोटेस्ट इकोसिस्टम' नाम दिया गया है, जिसमें दुनिया के 9 देशों के 101 संगठन शामिल हैं। इस खुलासे ने देश में एक नई बहस छेड़ दी है, जहां सत्तापक्ष ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

क्या है 'रेड-ग्रीन प्रोटेस्ट इकोसिस्टम'?

फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट का शीर्षक ही 'Global Chaos Inc Grows to 101 Groups With Plans For New Rounds of Demonstration' रखा गया है। यह नेटवर्क दुनिया भर में छात्रों और युवाओं को सड़कों पर उतारने और विभिन्न देशों की व्यवस्था को अस्थिर करने का काम कर रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन 101 संगठनों में से 33 संगठनों का नेतृत्व सीधे तौर पर युवाओं और छात्रों के हाथों में है। इस इकोसिस्टम में 'रेड' का आशय वामपंथी, कम्युनिस्ट और समाजवादी समूहों से है, जबकि 'ग्रीन' का संबंध कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों से जोड़ा गया है। यह समन्वय बताता है कि प्रदर्शन केवल स्थानीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय एजेंडे का हिस्सा हैं।

पांच मुख्य संगठन और दिल्ली-पेरिस कनेक्शन

फॉक्स न्यूज ने पांच ऐसे प्रमुख संगठनों की पहचान की है जो इन अंतरराष्ट्रीय विरोध प्रदर्शनों के सूत्रधार माने जा रहे हैं। ये संगठन भारत में हो रहे प्रदर्शनों को फ्रांस के आंदोलनों से जोड़ रहे हैं:

  • इंडिया अलायंस पेरिस (IAP): यह फ्रांस स्थित संगठन है जो भारत और फ्रांस में हो रहे प्रदर्शनों से जुड़ी जानकारी और संदेशों को साझा करने में मुख्य भूमिका निभाता है।
  • प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल (PI): यह एक वैश्विक राजनीतिक मंच है, जिसने 16 अक्टूबर की ब्रीफिंग में फ्रांस, भारत, स्पेन और अल्बानिया में चल रहे आंदोलनों का जिक्र करते हुए उनके बीच सहयोग बढ़ाने की बात कही थी।
  • पीपल्स फोरम (Peoples Forum): न्यूयॉर्क स्थित यह सामाजिक और राजनीतिक संगठन इंडिया अलायंस पेरिस के साथ मिलकर सक्रिय है।
  • कोड पिंक (Code Pink): इस संगठन को अमेरिकी कारोबारी नेविल राय सिंघम द्वारा आर्थिक मदद दी जाती है।
  • ब्रेकथ्रू न्यूज (Breakthrough News): इसे भी नेविल राय सिंघम से फंडिंग प्राप्त होती है, जो प्रदर्शनों के प्रचार में सक्रिय है।

बीजेपी का राहुल गांधी और कांग्रेस पर हमला

इस सनसनीखेज रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं। बीजेपी का आरोप है कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी की इन अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ सांठगांठ है। बीजेपी ने साक्ष्य के तौर पर दो तस्वीरें जारी की हैं, जिनमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी को प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल के प्रतिनिधियों के साथ मिलते हुए दिखाया गया है। यह मुलाकात 10 जनपथ पर अप्रैल 2025 में हुई थी। बीजेपी का सवाल है कि इस शिष्टाचार भेंट के पीछे क्या खिचड़ी पक रही थी और इन विरोध प्रदर्शनों का खर्च कौन उठा रहा है। पार्टी ने पूछा है कि भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले समूहों के साथ कांग्रेस के नेता क्या चर्चा कर रहे थे।

प्रदर्शनों का अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर और आगे की योजना

फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ये 101 संगठन अब आगे के प्रदर्शनों के लिए एक विस्तृत कैलेंडर तैयार कर रहे हैं। फ्रांस में 24 अक्टूबर को 'Act-2' नाम से एक बड़ा प्रदर्शन प्रस्तावित है, जिसमें 212 अलग-अलग जगहों पर लोगों को इकट्ठा करने की योजना है। इसके बाद 31 अक्टूबर को 'Act-3' प्रोटेस्ट की योजना है, जिसमें सीधे तौर पर फ्रांस के राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग की जाएगी। इतना ही नहीं, 20 नवंबर को एक 'इंटरनेशनल यूथ स्ट्राइक' का आह्वान किया गया है, जिसके जरिए पूरे यूरोप में हड़ताल और चक्का जाम करने की साजिश रची जा रही है।

प्रशांत भूषण और 'मार्च फॉर डेमोक्रेसी' का संयोग

रिपोर्ट के खुलासों के बीच भारत में भी गतिविधियां तेज हैं। 23 अक्टूबर को प्रशांत भूषण ने दिल्ली के पालमपुर में एक प्रदर्शन मार्च बुलाया है, जिसे उन्होंने 'मार्च फॉर डेमोक्रेसी' का नाम दिया है। प्रशांत भूषण पूर्व में रिजीम चेंज यानी व्यवस्था परिवर्तन और क्रांति जैसी बातों का समर्थन करते रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ा सवाल है कि क्या इस मार्च का संबंध उसी अंतरराष्ट्रीय एजेंडे से है जिसका खुलासा फॉक्स न्यूज ने किया है।

जेल से बाहर आने के बाद कॉकरोच पार्टी का बदला रुख

दूसरी तरफ दिल्ली में 'कॉकरोच पार्टी' से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका तिहाड़ जेल से बाहर आ चुके हैं। सात दिनों तक जेल में रहने के बाद अब उनके तेवर ठंडे नजर आ रहे हैं। जो लोग पहले किसी भी समझौते को तैयार नहीं थे और इस्तीफे की जिद पर अड़े थे, वे अब तिरंगा थामकर भारत माता की जय के नारे लगा रहे हैं। जेल से रिहाई के समय जब उनसे भविष्य की योजना के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने चुप्पी साध ली। हालांकि, उनकी मुसीबतें अभी खत्म नहीं हुई हैं। क्राइम ब्रांच ने उन्हें नोटिस जारी किया है और उन्हें सरकारी आदेश की अवहेलना तथा अनाधिकृत रूप से जंतर-मंतर में प्रवेश करने के मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया है। सूत्रों का कहना है कि वे अभी पुलिस जांच के दायरे में हैं।

डिजिटल दुनिया में गिरता ग्राफ

इन प्रदर्शनों और पार्टी नेताओं की साख अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से गिर रही है। आंकड़ों के अनुसार, इन संगठनों और नेताओं के फॉलोअर्स और इंगेजमेंट में भारी गिरावट दर्ज की गई है। 'कॉकरोच पार्टी' की सोशल मीडिया पर स्थिति इस प्रकार है:

  • इंस्टाग्राम पर सीजेपी (CJP) का हाल: 10 से 25 जुलाई के बीच 4.25 करोड़ लाइक्स थे, जो 1 से 15 अक्टूबर के बीच घटकर 2.88 करोड़ रह गए। यह 79.8% की भारी गिरावट है। इसी अवधि में कमेंट्स में भी 79.1% की कमी देखी गई।
  • नेताओं का प्रदर्शन: अभिजीत दीपके की इंगेजमेंट में 27.3% और आशुतोष रांका की इंगेजमेंट में 51.1% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

नेहा बोरा और दिल्ली हाईकोर्ट का रुख

बांग्लादेश मॉडल का समर्थन करने वाली नेहा बोरा भी कानूनी शिकंजे में फंस गई हैं। 16 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ली गई नेहा बोरा ने पीस बॉन्ड भरने से इनकार कर दिया था, जिसके खिलाफ उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि नेहा बोरा ने अब तक 12 बार नियमों का उल्लंघन किया है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कोर्ट में तर्क दिया कि रिजीम चेंज मतदान के जरिए होता है, न कि समाज विरोधी तत्वों के दम पर। नेहा बोरा ने हालांकि कोर्ट में खुद को 'कॉकरोच पार्टी' के प्रदर्शन से अलग करने की कोशिश की, लेकिन हाईकोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है और कल तक के लिए सुनवाई टाल दी है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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