काशी कैफे विवाद पर गरमाई राजनीति, भाजपा ने मुख्यमंत्री सतीशन से पूछा तीखा सवाल राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 4
केरल के फोर्ट कोच्चि स्थित काशी कैफे से जुड़े एक नए विवाद को लेकर भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर और मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है।

विवाद की शुरुआत और मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

केरल के फोर्ट कोच्चि में स्थित एक प्रसिद्ध कैफे को लेकर उपजे विवाद ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। इस मामले में राज्य के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और केरल भाजपा के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बहस देखने को मिली है। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने बीते 24 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए राज्य की एकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केरल एकजुट है और यहां सांप्रदायिक नफरत के लिए कोई स्थान नहीं है। सतीशन ने राज्य से बाहर के एक व्लॉगर द्वारा इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इसमें फोर्ट कोच्चि के बारे में भ्रामक जानकारियां फैलाई गईं और राज्य की छवि खराब करने के साथ ही समुदायों के बीच दरार पैदा करने का प्रयास किया गया।

कानूनी कार्रवाई और सरकारी रुख

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ने इस मामले में संज्ञान लिया है और प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। सतीशन ने अपने संदेश में कहा कि कानून अपना काम निष्पक्ष रूप से करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूडीएफ सरकार सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी को भी राज्य की शांति व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, केरल में नफरत का कोई स्थान नहीं है और राज्य एक नए युग की ओर बढ़ रहा है जहाँ सभी धर्मों के लोग मिलजुलकर रहते हैं।

राजीव चंद्रशेखर का पलटवार

मुख्यमंत्री सतीशन के आरोपों का जवाब देते हुए भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया के माध्यम से पलटवार किया। उन्होंने कहा कि केरल सभी मलयालियों का है और वे ही राज्य का भविष्य तय करेंगे। हालांकि, उन्होंने सतीशन की नीति और राज्य के राजनीतिक वातावरण पर गंभीर सवाल खड़े किए। चंद्रशेखर ने पूछा कि आखिर कुछ लोग मोहम्मद अली जिन्ना जैसे व्यक्ति की प्रशंसा क्यों करते हैं, जिन्होंने धर्म के आधार पर देश का विभाजन किया था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कुछ राजनेता हमास जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठन की हिंसा का बचाव क्यों करते हैं और उन्हें बढ़ावा क्यों देते हैं।

तुष्टीकरण की राजनीति पर सवाल

भाजपा नेता ने कांग्रेस और सीपीएम जैसी राजनीतिक पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों के साथ राजनीतिक गठबंधन क्यों है, जो उनकी नजर में संविधान-विरोधी और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ काम करते हैं। चंद्रशेखर ने आगे तर्क दिया कि मुख्यमंत्री सतीशन जिस प्रकार से इस राजनीतिक संस्कृति को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं, वह अनुचित है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कैफे का नाम एक पवित्र हिंदू शहर 'काशी' के नाम पर रखा गया है और उसे निशाना बनाना या उसका अपमान करना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

कैफे के नाम को लेकर तीखी टिप्पणी

राजीव चंद्रशेखर ने विवाद को एक नया मोड़ देते हुए एक काल्पनिक परिस्थिति का जिक्र किया। उन्होंने पूछा, यदि यही रेस्टोरेंट किसी पवित्र मुस्लिम शहर के नाम पर होता और वहां सुअर का मांस परोसा जाता, तो मुख्यमंत्री का रुख और ट्वीट क्या होता? उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे कृत्यों के प्रति कांग्रेस और सीपीएम से मिलने वाला प्रोत्साहन ही इन लोगों को बेपरवाह बनाता है। भाजपा अध्यक्ष के अनुसार, उन्हें यह भ्रम है कि वे किसी भी तरह के अपमानजनक व्यवहार के बाद फ्री-पास पा सकते हैं।

बोलने की आजादी और संवैधानिक अधिकार

अपनी बात को जारी रखते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि जब उन्होंने केरल में कट्टरपंथ के प्रयासों के खिलाफ अपनी आवाज उठाई थी, तब मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने उन्हें निशाना बनाया था। उन्होंने अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए कहा कि बोलने की आजादी का अधिकार हर भारतीय नागरिक को प्राप्त है, लेकिन साथ ही अनुच्छेद 19(2) के तहत अभिव्यक्ति पर वाजिब प्रतिबंध भी सभी पर समान रूप से लागू होते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री सतीशन को सलाह दी कि वे सभी मलयालियों के प्रति समान संवेदनशीलता रखें, चाहे वे हिंदू, ईसाई या मुस्लिम हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे चुनिंदा धर्मनिरपेक्षता और सांप्रदायिक सद्भाव की चुनिंदा बातों का हमेशा विरोध करते रहेंगे और राज्य की राजनीति में भारत-विरोधी या हिंदू-विरोधी भावनाओं को पनपने नहीं देंगे।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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