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UPSC परीक्षा की संरचना को समझें
अगर आप देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा यानी यूपीएससी सीएसई की तैयारी शुरू करने जा रहे हैं, तो सबसे पहले इसके पूरे ढांचे को समझना अनिवार्य है। कई बार नए उम्मीदवारों के मन में यह उलझन रहती है कि आखिर इस पूरी परीक्षा प्रक्रिया में कुल कितने पेपर देने पड़ते हैं। यह जानना भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि क्या सभी पेपर्स के अंक फाइनल मेरिट लिस्ट में जुड़ते हैं या फिर कुछ केवल अर्हता प्राप्त करने यानी क्वालिफाइंग प्रकृति के होते हैं। संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित यह परीक्षा मुख्य रूप से तीन चरणों में पूरी होती है, जिनमें प्रीलिम्स, मेंस और पर्सनैलिटी टेस्ट यानी इंटरव्यू शामिल हैं। यदि हम केवल लिखित परीक्षा की बात करें, तो प्रीलिम्स और मेंस को मिलाकर कुल 11 पेपर देने होते हैं। इनमें प्रीलिम्स के 2 ऑब्जेक्टिव पेपर और मेंस के 9 डिस्क्रिप्टिव यानी वर्णनात्मक पेपर शामिल हैं।
स्टेज 1: प्रीलिम्स परीक्षा के 2 अनिवार्य पेपर
यूपीएससी की यात्रा प्रीलिम्स से शुरू होती है। यह परीक्षा एक ही दिन में आयोजित की जाती है और इसमें दोनों पेपर वस्तुनिष्ठ यानी एमसीक्यू आधारित होते हैं।
- पेपर-1 (सामान्य अध्ययन या GS): इस पेपर में कुल 100 सवाल पूछे जाते हैं, जो 200 अंकों के होते हैं। इसके अंतर्गत इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान, अर्थव्यवस्था और समसामयिक विषयों से जुड़े प्रश्न शामिल होते हैं। मेंस परीक्षा के लिए कटऑफ का निर्धारण इसी पेपर के अंकों के आधार पर किया जाता है।
- पेपर-2 (CSAT): इसमें गणित, तर्कशक्ति और कॉम्प्रिहेंशन आधारित 80 सवाल होते हैं, जो 200 अंकों के हैं। यह पेपर केवल क्वालिफाइंग होता है, यानी इसमें सफल होने के लिए आपको कम से कम 33 प्रतिशत यानी लगभग 66 अंक लाने अनिवार्य हैं।
स्टेज 2: मेंस परीक्षा के 9 डिस्क्रिप्टिव पेपर
प्रीलिम्स में सफल होने वाले उम्मीदवार मेंस परीक्षा में शामिल होते हैं। यहाँ परीक्षा का स्वरूप बदल जाता है और आपको विस्तृत उत्तर लिखने होते हैं। यूपीएससी मेंस में कुल 9 पेपर होते हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है:
क्वालिफाइंग पेपर
ये पेपर केवल पास करने के लिए हैं और इनके अंक मेरिट में नहीं जुड़ते हैं:
- पेपर A: किसी भी एक भारतीय भाषा (जैसे हिंदी)। यह 300 अंक का होता है।
- पेपर B: अंग्रेजी भाषा का पेपर। यह भी 300 अंक का होता है।
इन दोनों पेपर्स में पास होने के लिए उम्मीदवारों को कम से कम 25 प्रतिशत अंक लाना आवश्यक है।
मेरिट वाले 7 पेपर
ये पेपर ही तय करते हैं कि उम्मीदवार की रैंक क्या होगी। हर पेपर 250 अंकों का होता है:
- निबंध (Essay): इसमें दिए गए विषयों पर विस्तार से लेख लिखना होता है।
- GS पेपर 1: भारतीय संस्कृति, इतिहास, भूगोल और समाज से संबंधित प्रश्न।
- GS पेपर 2: संविधान, शासन व्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का अध्ययन।
- GS पेपर 3: अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं तकनीक, पर्यावरण और सुरक्षा संबंधित मुद्दे।
- GS पेपर 4: नीतिशास्त्र (Ethics), सत्यनिष्ठा और अभिरुचि।
- ऑप्शनल विषय (वैकल्पिक): इसके तहत उम्मीदवार को एक विषय चुनना होता है, जिसके दो पेपर (ऑप्शनल पेपर 1 और 2) देने होते हैं।
स्टेज 3: पर्सनैलिटी टेस्ट यानी इंटरव्यू
मेंस के 7 मेरिट पेपर्स में उत्तीर्ण होने के बाद उम्मीदवारों को अंतिम चरण यानी इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। यह राउंड 275 अंकों का होता है। यहाँ केवल किताबी ज्ञान की ही नहीं, बल्कि उम्मीदवार के व्यक्तित्व, सोचने की क्षमता, निर्णय लेने के कौशल और उनके डीएएफ फॉर्म में दी गई व्यक्तिगत जानकारियों के आधार पर सवाल पूछे जाते हैं।
फाइनल सिलेक्शन का गणित
भले ही आप कुल 11 लिखित पेपर देते हैं, लेकिन फाइनल रैंक और सेवा का आवंटन केवल मेंस के 7 पेपर्स और इंटरव्यू के अंकों के आधार पर होता है। मेंस के 1750 अंक और इंटरव्यू के 275 अंकों को मिलाकर कुल 2025 अंकों में से मेरिट तैयार की जाती है। इसी स्कोर के आधार पर सिविल सेवा के लिए उम्मीदवारों का चयन और उनकी सेवा की प्राथमिकता तय की जाती है।
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