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एक घंटा पहले
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विचारों
कोडरमा में गूंजेगा थाईलैंड का अहसास
झारखंड के कोडरमा जिले में दुर्गा पूजा को लेकर उत्साह अपने चरम पर है। इस बार पूजा समितियों ने श्रद्धालुओं को कुछ अलग और अद्भुत अनुभव देने के लिए कमर कस ली है। शहर के महाराणा प्रताप चौक स्थित दुर्गा पूजा समिति ने इस बार एक अनूठा कदम उठाते हुए थाईलैंड के प्रसिद्ध पैगोडा मंदिर की तर्ज पर अपने पूजा पंडाल का निर्माण करवाया है। यह प्रयास न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा बल्कि दर्शकों को विदेशी वास्तुकला की झलक भी प्रदान करेगा। स्थानीय लोगों के लिए यह पंडाल इस साल की पूजा में मुख्य आकर्षण का केंद्र माना जा रहा है।
कारीगरी और संरचना का संगम
महाराणा प्रताप चौक पर तैयार किए जा रहे इस भव्य पंडाल की ऊंचाई 65 फीट है, जबकि इसकी चौड़ाई करीब 60 फीट के आसपास रखी गई है। इस विशाल ढांचे को तैयार करने में धनबाद और जामताड़ा के कुशल कारीगरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन कारीगरों ने अपनी कला के माध्यम से थाईलैंड के मंदिरों की जटिल वास्तुकला को कोडरमा की धरती पर उतारने का प्रयास किया है। पारंपरिक भारतीय पूजा पद्धति और थाई शैली की वास्तुकला का यह अनूठा संगम देखने लायक होगा। पंडाल के भीतर मां दुर्गा की प्रतिमा की स्थापना की जाएगी, जहां भक्त श्रद्धा के साथ अपने आराध्य का आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे।
रोशनी और साज-सज्जा पर विशेष खर्च
पंडाल को रात के समय और भी अधिक आकर्षक बनाने के लिए लाइटिंग की विशेष व्यवस्था की गई है। समिति के अनुसार, केवल रोशनी और सजावट के मद में लगभग 1 लाख 80 हजार रुपये का व्यय किया जा रहा है। रंग-बिरंगी दूधिया रोशनी में नहाया यह पैगोडा स्टाइल पंडाल रात के समय किसी अद्भुत कलाकृति जैसा प्रतीत होगा। यदि पूरे आयोजन के बजट की बात करें, तो पंडाल निर्माण, मूर्ति स्थापना, बिजली की सजावट और अन्य व्यवस्थाओं को मिलाकर समिति ने करीब 10 लाख रुपये का अनुमानित बजट तय किया है। समिति का मुख्य उद्देश्य है कि आने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक गरिमा के साथ-साथ एक शानदार और यादगार अनुभव प्राप्त हो।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
बड़ी संख्या में जुटने वाली भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी प्रकार की अनहोनी को रोकने के लिए समिति ने सुरक्षा को शीर्ष प्राथमिकता पर रखा है। पूरे पूजा परिसर की निगरानी के लिए आधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। इसके अलावा, अग्नि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अग्निशमन यंत्रों और जरूरी सुरक्षा साधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए स्वयंसेवकों की एक टीम भी तैनात की जाएगी, जो श्रद्धालुओं को दर्शन कराने में सहयोग करेगी। समिति किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद दिखाई दे रही है ताकि उत्सव में कोई बाधा न आए।
यातायात और पार्किंग की व्यापक व्यवस्था
चूंकि महाराणा प्रताप चौक बाईपास के समीप स्थित है, इसलिए पूजा के दौरान वाहनों का दबाव बढ़ना तय है। इसे देखते हुए समिति ने यातायात और पार्किंग की समस्याओं का पहले ही समाधान कर लिया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बाईपास के दोनों तरफ वाहनों को खड़ा करने के लिए उचित पार्किंग स्थल का चयन किया गया है। इससे न केवल पंडाल तक आने वाले लोगों को अपना वाहन खड़ा करने में सहूलियत होगी, बल्कि सड़क पर यातायात का जाम भी नहीं लगेगा। समिति ने स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बिठाकर यह कोशिश की है कि इस बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान स्थानीय नागरिकों और आने वाले आगंतुकों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। पूजा के दौरान पूरी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए समिति लगातार तैयारियों की समीक्षा कर रही है।
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