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3 घंटे पहले
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होर्मुज को 'ट्रंप स्ट्रेट' बनाने की कवायद
ईरान के साथ चल रहे मौजूदा तनावपूर्ण माहौल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल ट्रुथ सोशल पर यह सवाल उठाया कि जब यह क्षेत्र अब अमेरिका के नियंत्रण में आ चुका है, तो इसका आधिकारिक नाम बदलकर 'ट्रंप स्ट्रेट' क्यों नहीं कर दिया जाना चाहिए। इससे पहले भी ट्रंप ने सोशल मीडिया पर होर्मुज का एक नक्शा साझा किया था, जिसे उन्होंने 'न्यू यू.एस. टेरिटरी' यानी अमेरिका का नया क्षेत्र करार दिया था।
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि अमेरिका के प्रभाव में आने के बाद अब यह जलडमरूमध्य पहले की तुलना में अधिक 'हॉट' यानी सक्रिय हो जाएगा। इससे पहले ट्रंप ने यह दावा किया था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका का लगभग पूरा नियंत्रण हो चुका है। उन्होंने ईरान की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि वहां की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और उन्होंने ईरानी नागरिकों से सवाल किया है कि वे इस स्थिति के खिलाफ कब आवाज उठाएंगे और संघर्ष करेंगे।
पुराने बदलावों का इतिहास
नाम बदलने का यह कोई पहला मामला नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप इससे पहले भी भौगोलिक क्षेत्रों के नाम बदलने को लेकर चर्चा में रह चुके हैं। कनाडा के साथ व्यापारिक विवाद के दौरान उन्होंने ओंटारियो झील का नाम बदलकर 'लेक अमेरिका' करने का निर्देश दिया था। इसी तरह, पिछले साल उन्होंने मैक्सिको की खाड़ी का नाम बदलकर 'अमेरिका की खाड़ी' करने का आदेश दिया था। उस समय इस बदलाव के बाद एपल और गूगल जैसी दिग्गज तकनीकी कंपनियों ने अपने डिजिटल नक्शों पर इन नामों को अपडेट भी कर दिया था। हालांकि, मैक्सिको और कनाडा ने ट्रंप प्रशासन के इन एकतरफा फैसलों को पूरी तरह से नकार दिया था और इन बदलावों को मान्यता देने से साफ इनकार कर दिया था।
क्यों दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है होर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को वैश्विक स्तर पर सबसे अहम समुद्री गलियारों में गिना जाता है। यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने का काम करता है। वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए यह मार्ग जीवन रेखा समान है, क्योंकि दुनिया भर में होने वाली तेल और गैस की आपूर्ति का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में होने वाला कोई भी सैन्य तनाव या राजनीतिक उठापटक अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था को सीधे तौर पर प्रभावित करने की क्षमता रखती है।
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