दिवाली को 'खुशियों की ईद' बताने पर मल्लिकार्जुन खरगे घिरे, बीजेपी ने कहा कांग्रेस है हिंदू विरोधी राष्ट्रीय राजनीति 2 घंटे पहले 6
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा दिवाली को 'खुशियों की ईद' कहे जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में विवाद छिड़ गया है। बीजेपी ने इसे तुष्टिकरण की राजनीति करार देते हुए कांग्रेस पर सनातन विरोधी होने का आरोप लगाया है।

दिवाली संदेश पर सियासत

देश भर में दीपावली के पावन पर्व के उपलक्ष्य में जब पूरा देश रोशनी और खुशियों में डूबा था, तब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी। उन्होंने देशवासियों को दीपावली की बधाई देते हुए इस महापर्व को खुशियों की ईद की संज्ञा दी। खरगे का यह बयान सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी ने इसे हाथों-हाथ लिया और कांग्रेस पर तीखे हमले शुरू कर दिए।

क्या था मल्लिकार्जुन खरगे का बयान

कांग्रेस अध्यक्ष ने दीपावली के अवसर पर अपने संदेश में कहा कि यह त्योहार भारत का एक प्रमुख उत्सव है, जो न केवल खुशियां लाता है बल्कि लोगों को एक सूत्र में पिरोने का काम भी करता है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि दिवाली कई दिनों तक चलने वाला खुशियों का उत्सव है और यह वास्तव में खुशियों की ईद के समान है। उन्होंने आगे कहा कि यह वह समय है जब लोग अपने परिवार और प्रियजनों के साथ मिलते हैं। इसके अलावा, खरगे ने देश में शांति और भाईचारे का संदेश देते हुए सभी से अपील की कि वे आपसी गलतफहमियों को भुलाकर राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की दिशा में कार्य करें।

बीजेपी का पलटवार

खरगे के इस बयान के बाद बीजेपी पूरी तरह से हमलावर हो गई। बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की और इसे कांग्रेस की वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा बताया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर अपनी बात रखते हुए कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने दिवाली को खुशियों की ईद बताकर अपनी मानसिकता को जगजाहिर कर दिया है। भंडारी ने कांग्रेस को एंटी-सनातनी करार देते हुए कहा कि पार्टी के नेता दिवाली जैसे पवित्र पर्व पर भी तुष्टिकरण करने से बाज नहीं आ रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि एक तरफ वे बाबरी मस्जिद के मुद्दे पर दुखी नजर आती हैं और दूसरी तरफ पार्टी अध्यक्ष दिवाली संदेश में भी तुष्टिकरण को प्राथमिकता दे रहे हैं।

शांति और सौहार्द पर जोर

अपने पूरे संदेश में मल्लिकार्जुन खरगे ने केवल त्योहार की शुभकामनाओं तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि सामाजिक ताने-बाने पर भी जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जो लोग समाज में आपस में लड़ रहे हैं, उन्हें अब अपनी गलतफहमियां दूर कर लेनी चाहिए। खरगे के अनुसार, देश की सीमाओं की रक्षा करना और उसे एकजुट बनाए रखना हर नागरिक का कर्तव्य है, जिसके लिए सभी को पूरे समर्पण के साथ काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने देश की एकता और शांति बनाए रखने के महत्व को रेखांकित किया।

राजनीतिक बहस को दी हवा

दिवाली संदेश के दौरान खरगे ने केवल त्योहार तक सीमित न रहकर राजनीतिक मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दी गई बहस की चुनौती का उल्लेख किया। खरगे ने कहा कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को सार्वजनिक मंच पर बहस के लिए आमंत्रित किया है, लेकिन प्रधानमंत्री इस आमंत्रण को स्वीकार करने से बच रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह उनकी अपनी इच्छा है। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी की वैचारिक लड़ाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा के विरुद्ध है, न कि किसी अन्य व्यक्ति विशेष के खिलाफ। कांग्रेस अध्यक्ष के इस बयान ने दिवाली के मौके पर छिड़ी बहस को और अधिक गरमा दिया है, जिससे आने वाले समय में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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