मध्य प्रदेश
40 मिनट पहले
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स्कूली बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़
मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसे देखकर हर किसी का दिल दहल जाए। अमरपुर विकासखंड स्थित एकीकृत माध्यमिक शाला उमरिया के आठवीं कक्षा के छात्रों को स्कूल पहुंचने के लिए अपनी जान दांव पर लगानी पड़ रही है। सामने आए एक वीडियो में देखा जा सकता है कि छात्र एक ऑटो रिक्शा में सवार हैं, जो पूरी तरह से साइकिलों से भरा हुआ है। जगह कम होने के कारण बच्चे वाहन के पिछले और बाहरी हिस्सों पर लटककर यात्रा करने को मजबूर हैं। यह लापरवाही न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि बच्चों की जान के लिए बड़ा खतरा भी है।
17 किलोमीटर का खतरनाक सफर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, छात्रों को अमरपुर से स्कूल तक पहुंचने के लिए लगभग 17 किलोमीटर का लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। इतने लंबे सफर के दौरान बच्चे ऑटो के बाहर लटककर अपनी जान जोखिम में डाले रहते हैं। सड़क पर वाहन का संतुलन अगर जरा भी बिगड़ जाए या कोई अचानक दुर्घटना हो जाए, तो बड़ा हादसा होने की पूरी संभावना बनी रहती है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस खतरनाक व्यवस्था पर अब तक कोई ठोस लगाम नहीं लगाई गई है। स्थानीय लोग इस बात को लेकर बेहद आक्रोशित हैं कि आखिर मासूम बच्चों के जीवन को इस तरह खतरे में क्यों डाला जा रहा है। लोगों का कहना है कि प्रशासन और विद्यालय प्रबंधन की ओर से छात्रों की सुरक्षा को लेकर घोर लापरवाही बरती जा रही है, जो बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
जिम्मेदारों की चुप्पी और जांच की मांग
इस गंभीर मामले के सामने आने के बाद जब विद्यालय के प्राचार्य और खंड शिक्षा अधिकारी यानी BEO से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो दोनों ही अधिकारियों ने चुप्पी साधे रखना बेहतर समझा। अधिकारियों का इस तरह जवाब न देना और मामले से पल्ला झाड़ना उनकी कार्यप्रणाली पर भी कई तरह के सवाल खड़े करता है।
अब स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि जिला प्रशासन को इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लेना चाहिए और मामले की निष्पक्ष जांच करवानी चाहिए। यदि इस परिवहन व्यवस्था में किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है या छात्रों की सुरक्षा से समझौता किया गया है, तो दोषी अधिकारियों और वाहन संचालकों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। फिलहाल प्रशासनिक जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इस व्यवस्था में चूक कहां से हुई और इसके पीछे मुख्य तौर पर कौन जिम्मेदार है।
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