सहारनपुर: डीएम कार्यालय परिसर की अवैध मस्जिद पर चला प्रशासन का हंटर, 6.41 करोड़ का जुर्माना उत्तर प्रदेश 3 महीने पहले 117
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में सरकारी भूमि पर बनी मस्जिद के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इसे अवैध अतिक्रमण मानते हुए मस्जिद को गिराने और 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया है।

सहारनपुर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में स्थित जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में बनी एक मस्जिद के मामले में प्रशासन ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने करीब डेढ़ साल तक चली लंबी न्यायिक कार्यवाही के बाद इस मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण करार दिया है। अदालत ने इस ढांचे को पूरी तरह से हटाए जाने का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही, मस्जिद प्रबंधन पर 6.41 करोड़ रुपये का भारी भरकम जुर्माना भी लगाया गया है। प्रशासन ने इस आदेश को अमल में लाने के लिए संबंधित पक्ष को 30 दिन की समयसीमा दी है।

क्या है पूरा मामला

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने प्रशासन को एक औपचारिक शिकायत सौंपी थी। अपनी शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि डीएम कार्यालय के परिसर में स्थित मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि परिसर का उपयोग केवल इबादत तक ही सीमित नहीं था, बल्कि वहां कथित रूप से व्यावसायिक गतिविधियां भी चलाई जा रही थीं, जो पूरी तरह से गलत है।

किराये से कमाई का आरोप

शिकायतकर्ता का कहना है कि कार्यालय परिसर के भीतर एक डाकघर संचालित होता है और उसी से जुड़े कुछ अन्य कमरों को गलत तरीके से किराये पर दिया गया था, जिससे अवैध रूप से आर्थिक कमाई की जा रही थी। इन आरोपों के गंभीर होने के बाद प्रशासन ने मामले की गहन जांच शुरू की और सुनवाई के लिए इसे नगर मजिस्ट्रेट की अदालत में भेजा गया।

सरकारी जमीन का मामला

सरकारी अधिवक्ता विनय चौहान ने बताया कि अदालत में चली सुनवाई के दौरान मस्जिद के पक्ष में कोई भी ठोस दस्तावेज पेश नहीं किया जा सका जो यह साबित कर सके कि जमीन उनकी है। हालांकि मस्जिद की तरफ से बिजली के बिल और नगर पालिका के असेसमेंट रिकॉर्ड अदालत में रखे गए, लेकिन कोर्ट ने इन्हें स्वामित्व का वैध प्रमाण नहीं माना। मजिस्ट्रेट की जांच में लगभग 315 वर्गमीटर के क्षेत्र में बना यह ढांचा सरकारी जमीन पर स्थित पाया गया। अदालत ने इसे पूरी तरह से अवैध निर्माण मानते हुए ध्वस्तीकरण के आदेश दिए हैं और नोटिस चस्पा कर दिया गया है।

1951 से बना है ढांचा

विकास त्यागी के अनुसार, यह मस्जिद साल 1951 से यहां मौजूद है और लंबे समय से इसका दुरुपयोग किया जा रहा था। उन्होंने यह भी चिंता जताई थी कि इस परिसर में बाहरी लोगों के आने-जाने से प्रशासनिक कामकाज और चुनावी गोपनीयता जैसे संवेदनशील मुद्दे प्रभावित हो सकते थे। फिलहाल जिला प्रशासन अदालत के निर्देशों का पालन करने की तैयारी में जुटा है। यदि तय समय के भीतर आदेश का पालन सुनिश्चित नहीं होता है, तो प्रशासन भविष्य में नियमानुसार अगली कड़ी कानूनी कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र होगा।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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