दिल्ली के बाजारों पर प्रदर्शनों का साया: खान मार्केट से कनॉट प्लेस तक रोजाना 50 करोड़ का कारोबार ठप व्यापार एक घंटा पहले 6
दिल्ली में हो रहे लगातार विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा के कड़े इंतजामों के कारण खान मार्केट और कनॉट प्लेस के व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। दुकानदारों ने इस संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।

व्यापारियों की कमर तोड़ रहे प्रदर्शन

राजधानी दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और जगह जगह लगाई गई बैरिकेडिंग ने शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों की रौनक छीन ली है। खान मार्केट और कनॉट प्लेस जैसे बड़े बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है, जिसका सीधा असर दुकानदारों की आय पर पड़ा है। खान मार्केट एसोसिएशन का दावा है कि इन हालातों के चलते बाजार को प्रतिदिन करीब 50 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है। अपनी बदहाली और गिरते कारोबार को लेकर व्यापारियों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मदद की अपील की है और साथ ही सुप्रीम कोर्ट से भी आग्रह किया है कि उनकी समस्याओं को सुना जाए।

खान मार्केट एसोसिएशन के अनुसार, लगातार हो रहे प्रदर्शनों की वजह से ग्राहकों के मन में बाजार आने को लेकर डर बैठ गया है। इससे दुकानों की बिक्री बुरी तरह प्रभावित हुई है और व्यापारियों की आजीविका पर गहरा संकट मंडराने लगा है। एसोसिएशन ने अपनी चिंता साझा करते हुए बताया कि यहां एक दुकान का दैनिक किराया लगभग 3 लाख रुपये तक है। ऐसी स्थिति में जब ग्राहक बाजार ही नहीं पहुंच रहे, तो दुकानदारों के लिए दुकानों का किराया और अन्य बुनियादी खर्च निकाल पाना नामुमकिन हो गया है। व्यापारियों का कहना है कि वे इस आर्थिक नुकसान से पूरी तरह टूट चुके हैं और चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट विरोध प्रदर्शनों के कारण होने वाले इस व्यावसायिक नुकसान का संज्ञान ले।

कनॉट प्लेस में कारोबार की स्थिति

न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अतुल भार्गव ने बताया कि पिछले 5 से 7 दिनों से जारी विरोध प्रदर्शनों और कड़े प्रतिबंधों ने कनॉट प्लेस के व्यापार को बुरी तरह हिला कर रख दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान कारोबार सामान्य दिनों के मुकाबले केवल 10 फीसदी ही रह गया था। अभी व्यापारी उस झटके से संभलने की कोशिश कर ही रहे थे कि इसके तुरंत बाद इंडिया ब्लॉक का प्रदर्शन शुरू हो गया। दुकानदार अब आगे होने वाले प्रस्तावित धरनों को लेकर भी अत्यधिक चिंतित हैं। भार्गव के अनुसार, पिछले दो महीनों में कनॉट प्लेस और आसपास के बाजारों को बड़ा नुकसान हुआ है। अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर का समय व्यवसाय के लिहाज से साल का सबसे महत्वपूर्ण दौर होता है। व्यापारियों ने त्योहारी सीजन के लिए बड़ी मात्रा में सामान का स्टॉक किया था, लेकिन ग्राहकों की कमी के कारण वह स्टॉक दुकानों में ही रखा रह गया है।

कनॉट प्लेस का व्यावसायिक ढांचा

कनॉट प्लेस में कुल मिलाकर लगभग 2000 दुकानें स्थित हैं। इनमें से 1300 से 1400 दुकानें इनर सर्कल, मिडिल सर्कल और आउटर सर्कल में फैली हुई हैं, जहां बड़ी संख्या में ऑफिस और कैफे भी मौजूद हैं। इसके अलावा 16 और 17 तारीख को सेंट्रल पार्क के बंद रहने की घोषणा से व्यापारियों की चिंता और बढ़ गई है। इसके साथ ही पालिका बाजार की करीब 300 अंडरग्राउंड दुकानें और शंकर मार्केट की लगभग 200 दुकानें भी इस मंदी की चपेट में हैं। दुकानदारों को डर है कि 16-17 तारीख को कारोबार में कम से कम 25 प्रतिशत और गिरावट आएगी, क्योंकि लोगों के मन में आवाजाही को लेकर भय बना हुआ है।

प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थान की मांग

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए व्यापारियों ने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, दिल्ली पुलिस आयुक्त और उपराज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है। उनकी मुख्य मांग है कि कनॉट प्लेस जैसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक इलाकों में प्रदर्शन और बैरिकेडिंग न की जाए, ताकि आम लोगों का आना-जाना सुगम रहे और आपातकालीन सेवाएं बाधित न हों। व्यापारियों ने आग्रह किया है कि विरोध प्रदर्शनों के लिए पूर्व निर्धारित स्थानों का ही उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि प्रदर्शन करने के संवैधानिक अधिकार और व्यापार करने के अधिकार के बीच एक संतुलन बना रहे और दिल्ली की अर्थव्यवस्था को बचाया जा सके।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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