मानसून की देरी से किसानों की बढ़ी परेशानी, धान की सीधी बुआई में इन बातों का रखें खास ख्याल झारखंड एक दिन पहले 8
पलामू में मानसून के आने में देरी और कम बारिश की संभावना के चलते धान की खेती पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। विशेषज्ञ इस स्थिति में कम पानी की खपत वाली धान की सीधी बुआई (DSR) तकनीक को अपनाने की सलाह दे रहे हैं।

मानसून की बेरुखी से धान की खेती पर असर

खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसान धान की खेती की तैयारी में जुट गए हैं। लेकिन पलामू जिले में इस वर्ष सामान्य से कम बारिश की आशंका और मानसून के अब तक न पहुंचने के कारण खेती पर अनिश्चितता बनी हुई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पानी की कमी वाले क्षेत्रों में धान की सीधी बुआई (Direct Seeded Rice - DSR) अपनाना एक बेहतर फैसला हो सकता है। यह तकनीक न केवल पानी की बचत करती है, बल्कि इसमें श्रम और लागत भी कम लगती है।

खरपतवार प्रबंधन की चुनौती

क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, चियांकी के मुख्य कृषि वैज्ञानिक Dr. D.N. Singh के अनुसार, सीधी बुआई में सबसे बड़ी चुनौती खरपतवारों की होती है। रोपा विधि के विपरीत, सीधी बुआई में खरपतवार तेजी से पनपते हैं, जो धान के पौधों से पोषक तत्वों और नमी के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। यदि समय पर इन्हें नियंत्रित नहीं किया गया, तो फसल का उत्पादन काफी कम हो सकता है।

खरपतवार नियंत्रण के लिए जरूरी कदम

Dr. D.N. Singh ने खरपतवारों को नियंत्रित करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:

  • बुआई के 3 से 5 दिनों के भीतर Pendimethalin नामक खरपतवारनाशी का समान रूप से छिड़काव करें।
  • पहली दवा के इस्तेमाल के 15 से 18 दिनों बाद Pyrazosulfuron-ethyl (जिसे बाजार में Nominee Gold के नाम से जाना जाता है) का प्रयोग करें।
  • बुआई के 28 से 30 दिनों के बाद एक बार निराई-गुड़ाई जरूर करें।

सही प्रबंधन से बेहतर पैदावार

वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि किसान सही समय पर दवाओं का छिड़काव और निराई-गुड़ाई करें, तो Direct Seeded Rice तकनीक से रोपा विधि के बराबर ही उत्पादन पाया जा सकता है। कम बारिश की स्थिति में यह तकनीक किसानों के लिए किफायती और टिकाऊ साबित हो सकती है, जिससे न केवल खेती की लागत घटेगी बल्कि पानी की बर्बादी को रोकने में भी मदद मिलेगी।

चेतन शुक्ला
Official Verified Account

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!