उत्तराखंड
5 घंटे पहले
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विचारों
गंभीर होता संकट
उत्तराखंड में गिद्ध, गौरैया और कौवे जैसे पक्षियों की आबादी कम होने के बाद अब राज्य पक्षी मोनाल का अस्तित्व भी खतरे में है। विशेषज्ञों का मानना है कि मोनाल के सामने कई प्रकार की चुनौतियां खड़ी हो गई हैं, जो उनकी संख्या को तेजी से प्रभावित कर रही हैं।
शोर और बदलती आवाज
पर्वतीय इलाकों में इंसानी दखल लगातार बढ़ रहा है। निर्माण कार्यों और पर्यटकों की बढ़ती संख्या के कारण इन क्षेत्रों में शोर का स्तर काफी बढ़ गया है। देहरादून के पर्यावरणविद अशीष गर्ग के अनुसार, इस शोर के कारण मोनाल पक्षी के व्यवहार में परिवर्तन आ रहा है। उन्होंने बताया कि अपने साथियों से संवाद करने के लिए मोनाल अब अपनी आवाज की पिच बदलने के लिए मजबूर हैं, जो उनके प्राकृतिक जीवन चक्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।
लुप्त होने की कगार पर आवास
मोनाल पक्षी के प्राकृतिक आवासों का दायरा भी लगातार छोटा होता जा रहा है। जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित भवन निर्माण इसके मुख्य कारण माने जा रहे हैं। पर्यावरणविद के अनुसार बीते पांच साल के दौरान दो अलग-अलग अध्ययन किए गए हैं। इन अध्ययनों के परिणाम इस दुर्लभ पक्षी के लिए बेहद डरावने और चिंताजनक संकेत देते हैं। यदि समय रहते इन खतरों को नियंत्रित नहीं किया गया, तो राज्य का यह गौरवशाली पक्षी भविष्य में लुप्त हो सकता है।
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