केदारनाथ में गंदगी का अंबार: महज 5 महीनों में निकला 50.30 टन कचरा, पिछले साल के मुकाबले ढाई गुना ज्यादा उत्तराखंड 2 घंटे पहले 5
उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच कचरे का प्रबंधन बड़ी चुनौती बन गया है। इस साल के शुरुआती पांच महीनों में ही पिछले तीन वर्षों के कुल कचरे से अधिक गंदगी जमा हो गई है।

केदारनाथ धाम पर पर्यावरण का संकट

देवभूमि उत्तराखंड स्थित बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। वर्ष 2026 में श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड संख्या ने एक नई चिंता को जन्म दिया है। तीर्थयात्रियों की भारी तादाद के साथ ही वहां कचरे का पहाड़ खड़ा हो गया है। केदारनाथ धाम में फैली गंदगी की स्थिति इतनी गंभीर है कि पिछले साल की तुलना में इस बार कचरे की मात्रा ढाई गुना से भी अधिक दर्ज की गई है। यह स्थिति न केवल प्रशासन के लिए बल्कि हिमालयी पर्यावरण के लिए भी एक बड़ी चुनौती है।

आरटीआई से हुआ चौंकाने वाला खुलासा

केदारनाथ नगर पंचायत द्वारा सूचना का अधिकार यानी आरटीआई के तहत दिए गए जवाब से गंदगी के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। नोएडा के रहने वाले आरटीआई कार्यकर्ता अमित गुप्ता द्वारा पूछी गई जानकारी के बाद यह साफ हो गया है कि इस वर्ष अप्रैल से अगस्त के बीच, यानी केवल पांच महीनों के भीतर 50.30 मीट्रिक टन कचरा एकत्र हुआ है। यह आंकड़ा बताता है कि हम अपने पवित्र तीर्थ स्थलों को स्वच्छ रखने के प्रति कितने लापरवाह होते जा रहे हैं।

पिछले सालों के मुकाबले स्थिति की भयावहता

नगर पंचायत ने जो डेटा साझा किया है, वह बीते तीन वर्षों के आंकड़ों को बौना साबित करता है। केदारनाथ में जमा हुए कचरे का विवरण इस प्रकार है:

  • वर्ष 2023 में कुल 32.58 मीट्रिक टन कचरा जमा हुआ था।
  • वर्ष 2024 में यह मात्रा 26.10 मीट्रिक टन रही थी।
  • वर्ष 2025 में कुल 21.40 मीट्रिक टन कचरा एकत्र हुआ था।

इन आंकड़ों की तुलना में वर्ष 2026 के केवल पांच महीनों में निकला 50.30 मीट्रिक टन कचरा यह साबित करता है कि धाम में गंदगी की समस्या कितनी तेजी से बढ़ रही है।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

उच्च हिमालयी क्षेत्रों में प्लास्टिक और अन्य प्रकार के कचरे का निपटान करना मैदानी इलाकों की तुलना में अत्यंत कठिन कार्य है। अत्यधिक ठंड और विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण वहां सफाई व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए एक कठिन परीक्षा जैसा है। हालांकि, श्रद्धालुओं की ओर से की जा रही लापरवाही के कारण कचरा प्रबंधन के सभी प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो भविष्य में यह हिमालय की पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत घातक सिद्ध हो सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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