उत्तराखंड
8 घंटे पहले
1
विचारों
उत्तराखंड में भूकंप अलर्ट सिस्टम की होगी बड़ी जांच
यदि आप शुक्रवार को सुबह 11 बजे उत्तराखंड में कहीं सायरन की तेज आवाज सुनें या अपने मोबाइल फोन पर अचानक अलर्ट संदेश देखें, तो बिल्कुल भी घबराएं नहीं। यह किसी वास्तविक आपदा की चेतावनी नहीं है, बल्कि उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा आयोजित एक सुनियोजित परीक्षण है। राज्य में भूकंप के खतरों के प्रति आम जनता को जागरूक करने और चेतावनी प्रणाली की क्षमता परखने के लिए आज यानी शुक्रवार सुबह 11 बजे यह ड्रिल की जा रही है।
क्यों जरूरी है यह सायरन टेस्टिंग
उत्तराखंड भौगोलिक रूप से भूकंपीय जोन में आता है, जहां आपदा का जोखिम हमेशा बना रहता है। ऐसी स्थिति में जान-माल की सुरक्षा के लिए भूकंप से पूर्व चेतावनी देने वाले सिस्टम की सटीकता बहुत महत्वपूर्ण है। आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार, इस टेस्ट का मुख्य उद्देश्य लोगों को चेतावनी प्रणाली की आवाजों से परिचित कराना है। जब भी भविष्य में असल भूकंप की स्थिति बनेगी, लोग इस सायरन की आवाज को सुनकर तुरंत सतर्क हो सकेंगे और सुरक्षित स्थानों की ओर जा सकेंगे। यह रिहर्सल लोगों को आपदा के समय सही प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करने का एक माध्यम है।
राज्य में तैनात है सुरक्षा प्रणाली का नेटवर्क
उत्तराखंड सरकार ने भूकंप की पूर्व सूचना देने के लिए पूरे राज्य में एक विस्तृत जाल बिछाया है। वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में 169 सेंसर और 112 सायरन स्थापित किए गए हैं। शुक्रवार के इस परीक्षण के दौरान इन्हीं सेंसरों और सायरन की कार्यक्षमता का मूल्यांकन किया जाएगा। यदि किसी विशेष क्षेत्र में सिस्टम या सायरन में कोई तकनीकी खामी पाई जाती है, तो उसे तुरंत दुरुस्त किया जाएगा। प्रशासन इस चेतावनी प्रणाली को भविष्य में और भी अधिक शक्तिशाली बनाने की योजना पर काम कर रहा है। आने वाले समय में सेंसर और सायरन की संख्या को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि लगभग 5 से 10 किलोमीटर के अंतराल पर चेतावनी उपकरण उपलब्ध रहें।
मोबाइल पर भी मिलेगा भूकंप अलर्ट
इस टेस्टिंग का सबसे अहम हिस्सा उन लोगों के लिए है जिनके पास स्मार्टफोन मौजूद है। जिन उपयोगकर्ताओं ने अपने मोबाइल में भूदेव ऐप इंस्टॉल किया हुआ है, उन्हें इस मॉक ड्रिल के दौरान टेस्टिंग चेतावनी संदेश प्राप्त होगा। संदेश आने के साथ ही फोन में वाइब्रेशन और बीप-बीप की आवाज भी सुनाई दे सकती है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है और इसके लिए घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।
लोगों के लिए जरूरी सलाह
आपदा प्रबंधन विभाग ने राज्य की जनता से अपील की है कि वे इस सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह सक्रिय रखें। नागरिकों को सुझाव दिया गया है कि वे अपने मोबाइल में भूदेव ऐप का हमेशा अपडेटेड वर्जन ही रखें। इसके अलावा, ऐप सेटिंग्स में जाकर लोकेशन की अनुमति को 'ऑलवेज ऑन' यानी हमेशा चालू मोड पर रखना अनिवार्य है। ऐसा करने से वास्तविक आपदा के समय सटीक स्थान के आधार पर त्वरित चेतावनी मिलने में आसानी होगी। इस मॉक ड्रिल का एकमात्र लक्ष्य किसी भी अनहोनी की स्थिति में होने वाले नुकसान को कम करना और जनमानस को आपदा प्रबंधन के प्रति अधिक जागरूक बनाना है।
Comments
0 comment