सीआरपीएफ की महिला बटालियन के 40 साल: युद्ध के मैदान में बदली सुरक्षा की तस्वीर राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 7
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की महिला बटालियन ने कॉम्बैट भूमिका में अपने चार दशक पूरे कर लिए हैं। साल 1986 में शुरू हुआ यह सफर आज देश की सुरक्षा और शांति मिशनों में एक बड़ी मिसाल बन चुका है।

देश की सुरक्षा में महिलाओं का गौरवशाली सफर

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी सीआरपीएफ की महिला बटालियन ने सुरक्षा के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा है। वर्ष 1986 में स्थापित 88वीं महिला बटालियन ने देश की सुरक्षा व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी के लिए एक नई और मजबूत राह खोली थी। अब इस सेवा के 40 साल पूरे होने पर बल ने अपनी इन महिला योद्धाओं के साहस, अनुशासन और निस्वार्थ समर्पण को विशेष सम्मान दिया है।

हर मोर्चे पर साबित किया अपना दम

पिछले चार दशकों के दौरान इन महिला कर्मियों ने केवल प्रशासनिक कार्यों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में भी अपना लोहा मनवाया है। इन महिला योद्धाओं की कर्तव्यनिष्ठा के कुछ प्रमुख क्षेत्र इस प्रकार हैं:

  • आतंकवाद विरोधी अभियान
  • दंगा नियंत्रण और कानून व्यवस्था
  • वीआईपी सुरक्षा
  • नक्सल विरोधी ऑपरेशंस
  • संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन

इन तमाम मोर्चों पर तैनाती के दौरान उन्होंने दिखाया है कि मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों में भी वे देश की रक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं।

साहस और त्याग की मिसाल

सीआरपीएफ की यह यात्रा केवल 40 साल का एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह हिम्मत और देश प्रेम की वह गाथा है जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। कॉम्बैट भूमिका में महिलाओं ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है और यह साबित कर दिया है कि सुरक्षा के हर स्तर पर उनकी भूमिका अनिवार्य है। उनकी यह उपलब्धि न केवल बल के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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