गुजरात में बनेगा देश का पहला बंदरगाह आधारित ई-मेथनॉल संयंत्र, 2,300 करोड़ रुपये का होगा निवेश व्यापार 6 घंटे पहले 6
समुद्री परिवहन को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में भारत एक बड़ा कदम उठा रहा है, जिसके तहत गुजरात के कांडला में ई-मेथनॉल उत्पादन के लिए नए प्लांट की आधारशिला रखी गई है।

कांडला में हरित ऊर्जा की दिशा में बड़ी पहल

भारत सरकार ने समुद्री परिवहन क्षेत्र को कार्बन उत्सर्जन से पूरी तरह मुक्त करने के संकल्प के साथ गुजरात के कांडला में देश के पहले बंदरगाह आधारित ई-मेथनॉल संयंत्र की नींव रखी है। यह एक अत्यंत महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिस पर कुल 2,300 करोड़ रुपये का भारी निवेश किया जाना है। इस ग्रीन फ्यूल प्लांट को दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण (DPA) और असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड (APCL) के एक संयुक्त उपक्रम के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस संयंत्र की कुल उत्पादन क्षमता 150 टन प्रतिदिन निर्धारित की गई है। यह प्लांट विशेष रूप से एशिया और यूरोप के प्रमुख व्यापारिक मार्गों से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों को स्वच्छ और हरित ईंधन उपलब्ध कराने का काम करेगा।

परियोजना का दो चरणों में विस्तार

इस अत्याधुनिक संयंत्र को चरणों में विकसित किया जाएगा ताकि इसकी क्षमता को धीरे-धीरे बढ़ाया जा सके। परियोजना के पहले चरण की रूपरेखा के अनुसार, 1,200 करोड़ रुपये की लागत से प्रतिदिन 50 टन ई-मेथनॉल उत्पादन की क्षमता तैयार की जाएगी, जिसके जनवरी 2027 तक पूर्ण होने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद, दूसरे चरण में अतिरिक्त 100 टन प्रतिदिन की उत्पादन क्षमता जोड़ी जाएगी, जिसके लिए 1,100 करोड़ रुपये का निवेश होगा। इस दूसरे चरण को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। इस प्रकार, कुल निवेश की राशि 2,300 करोड़ रुपये तक पहुंचेगी।

सोनोवाल ने बताया वैश्विक समुद्री शक्ति बनने की राह

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शनिवार को इस महत्वपूर्ण परियोजना की आधारशिला रखी। इस अवसर पर गांधीनगर से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत लगातार विश्व की एक बड़ी समुद्री शक्ति के रूप में खुद को स्थापित कर रहा है और अब हम वैश्विक जहाजों को हरित ऊर्जा प्रदान करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।

कैसे तैयार होगा ई-मेथनॉल

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह संयंत्र पूरी तरह से नवीकरणीय ऊर्जा, पानी और जैविक स्रोतों से प्राप्त कार्बन डाइऑक्साइड (बायोजेनिक CO2) का उपयोग करके ई-मेथनॉल का निर्माण करेगा। इस कार्यक्रम में असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी विशेष रूप से उपस्थित थे। हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि तेल और पेट्रोलियम के क्षेत्र में असम की ऐतिहासिक भूमिका रही है और अब हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भी राज्य अपना बड़ा योगदान दे रहा है। असम सरकार के अनुसार, यह परियोजना न केवल औद्योगिक विकास को गति देगी बल्कि उभरती हुई ग्रीन इकोनॉमी में असम के सार्वजनिक उपक्रमों की बढ़ती दक्षता को भी प्रदर्शित करेगी।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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