छत्तीसगढ़
2 घंटे पहले
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कांग्रेस ने बस्तर पंडुम के खर्च पर खड़े किए सवाल
छत्तीसगढ़ में जगदलपुर में आयोजित हुए बस्तर पंडुम महोत्सव को लेकर अब राजनीतिक विवाद गहरा गया है। इस साल फरवरी माह में संपन्न हुए इस भव्य आयोजन में हुए खर्च को लेकर कांग्रेस ने भ्रष्टाचार और बड़ी अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने दावा किया है कि इस तीन दिवसीय महोत्सव के दौरान टेंट, मंच और साज-सज्जा के नाम पर 6.14 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि पानी की तरह बहा दी गई। बैज के अनुसार, जिस तरह से सरकारी धन का इस्तेमाल हुआ है, वह पूरी तरह से अनुचित और फिजूलखर्ची है।
खर्च का पूरा ब्योरा और कांग्रेस के दावे
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आयोजन के दौरान हुए खर्च के कई पहलुओं पर सवाल उठाए हैं। उनके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार:
- फूलों की सजावट पर करीब 28 लाख रुपये खर्च किए गए।
- ग्रीन रूम के निर्माण में 42 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
- कपड़े की साइड वॉल के लिए 44 लाख रुपये खर्च दर्शाए गए।
- कालीन बिछाने के काम पर 33 लाख रुपये व्यय हुए।
- कुर्सी और टेबल की व्यवस्था पर 12.5 लाख रुपये खर्च किए गए।
- राष्ट्रपति के एक दिवसीय दौरे के लिए स्वागत क्षेत्र तैयार करने में 17.5 लाख रुपये लगे।
- कलात्मक इंस्टॉलेशन के लिए एक दिन का खर्च 16.84 लाख रुपये बताया गया है।
दीपक बैज का कहना है कि 6.14 करोड़ रुपये की यह राशि इतनी अधिक है कि इसमें एक स्थायी विश्राम स्थल तैयार किया जा सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस आयोजन के दौरान विकास कार्यों के बजाय केवल प्रचार-प्रसार पर अधिक जोर दिया गया।
विकास कार्यों की अनदेखी का आरोप
कांग्रेस ने सरकार पर यह तंज भी कसा है कि बस्तर के आदिवासी समुदायों के सामने आज भी आजीविका के कई संकट मौजूद हैं। महुआ जैसे वनोपजों का संग्रहण उनकी आय का मुख्य जरिया है, लेकिन सरकार ने संस्कृति के नाम पर दिखावे में जो राशि खर्च की, उसे स्थानीय विकास में लगाया जा सकता था। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि बस्तर में बारिश की वजह से कई पुल, पुलिया और सड़कें क्षतिग्रस्त हैं, जिनकी मरम्मत के लिए यह धनराशि बहुत कारगर साबित हो सकती थी। बस्तर पंडुम को आदिवासी परंपरा के प्रदर्शन के बजाय राजनीतिक प्रचार का जरिया बनाने का आरोप भी सरकार पर लगा है।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने आरोपों को नकारा
कांग्रेस के इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और लोक निर्माण विभाग के मंत्री अरुण साव ने कहा कि ये आरोप पूरी तरह से राजनीतिक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बस्तर पंडुम का आयोजन बस्तर की गौरवशाली संस्कृति को वैश्विक पटल पर ले जाने के उद्देश्य से किया गया था। साव ने आश्वासन दिया कि यदि आयोजन में किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी या अनियमितता की शिकायत मिलती है, तो सरकार उसकी पूरी जांच करवाएगी। उन्होंने कहा कि सरकारी बिलों का भुगतान एक निर्धारित प्रक्रिया से होता है और हर स्तर पर जांच के बाद ही राशि जारी की जाती है।
ठेकेदार के भुगतान का मामला
इस बीच, जगदलपुर के लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता भावेश सिंह ने जानकारी दी कि बस्तर पंडुम से जुड़े काम करने वाले ठेकेदार को अब तक केवल 70 फीसदी भुगतान ही किया गया है। शेष 30 फीसदी भुगतान फिलहाल रोक कर रखा गया है। हालांकि, जब उनसे यह सवाल किया गया कि क्या भुगतान रोकने के पीछे अनियमितता का कोई कारण है, तो उन्होंने इस पर कोई स्पष्ट टिप्पणी करने से मना कर दिया।
क्या था बस्तर पंडुम का उद्देश्य
बस्तर की जनजातीय परंपराओं, लोक कला, संगीत और हस्तशिल्प को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच दिलाने के लिए 7 से 9 फरवरी तक जगदलपुर में इस महोत्सव का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में बस्तर संभाग के सभी सात जिलों के कलाकारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। महोत्सव का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया था, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समापन समारोह में शिरकत की थी। इस आयोजन में जनजातीय नृत्य, वाद्य यंत्रों की प्रतियोगिता और स्थानीय व्यंजनों के स्टॉल मुख्य आकर्षण का केंद्र थे।
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