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एक घंटा पहले
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अमेरिका में चीन के राष्ट्रपति का ऐतिहासिक स्वागत
आज अमेरिका की धरती पर दो महाशक्तियों के बीच एक महत्वपूर्ण और उच्च-स्तरीय बैठक की शुरुआत हो रही है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपनी 11 साल की लंबी अवधि के बाद अमेरिका की यात्रा पर पहुंचे हैं। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के स्वागत के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी कूटनीतिक प्रोटोकॉल को पीछे छोड़ते हुए जॉइंट बेस एंड्रयूज एयरपोर्ट पर खुद उनकी अगवानी की। जब शी जिनपिंग अपनी पत्नी पेंग लियुआन के साथ विमान से बाहर आए, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप ने उनका बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया।
यह स्वागत समारोह काफी भव्य था, जिसमें सुरक्षा और सम्मान के विशेष इंतजाम किए गए थे। शी जिनपिंग के लिए वहां 100 फीट लंबा रेड कार्पेट बिछाया गया था। साथ ही, आसमान से दो B-1 बॉम्बर विमानों ने उड़ान भरकर दोनों नेताओं को सलामी दी। इसके अलावा, अमेरिका की ओर से एक विशेष गार्ड ऑफ ऑनर का आयोजन किया गया, जिसमें अमेरिकी सेना के 479 सैनिकों ने भाग लिया और दोनों देशों के राष्ट्रगान की धुनें बजाई गईं।
किन अहम मुद्दों पर होगी बातचीत
इस दौरे के दौरान डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता का कार्यक्रम तय है। जानकारों के मुताबिक, चर्चा मुख्य रूप से 5 प्रमुख बिंदुओं पर केंद्रित रहने वाली है, जो वैश्विक और क्षेत्रीय राजनीति के लिहाज से काफी संवेदनशील हैं। इन मुद्दों में व्यापार और टैरिफ, AI तकनीक, ताइवान को लेकर चल रहा तनाव, ईरान में जारी युद्ध की स्थिति और रूस से तेल खरीद से जुड़े मामले शामिल हैं।
इस दौरे को विशेष बनाने के लिए आज राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस के स्टेट फ्लोर पर एक विशेष समारोह का आयोजन करेंगे। इस दौरान आज रात व्हाइट हाउस में शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन के सम्मान में एक राजकीय भोज का भी आयोजन किया गया है।
तीन दिवसीय दौरा और कूटनीतिक महत्व
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आधिकारिक निमंत्रण पर 23 से 25 सितंबर (स्थानीय समयानुसार) तक 3 दिनों के लिए वाशिंगटन की यात्रा पर हैं। यह पिछले 6 महीनों के भीतर दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की दूसरी मुलाकात है, जिसे बीजिंग की ओर से ऐतिहासिक घटनाक्रम करार दिया गया है। इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसी साल मई महीने में चीन की राजधानी बीजिंग की यात्रा की थी और वहां शी जिनपिंग के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की थी। उस दौरान भी दोनों नेताओं ने दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच संबंधों को सुधारने के लिए विस्तृत चर्चा की थी।
चीन के साथ संवाद क्यों जरूरी है
इस दौरे के महत्व को स्पष्ट करते हुए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं और इनके पास विश्व की दो सबसे शक्तिशाली सेनाएं भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की दिशा इन्हीं दोनों देशों के आपसी संबंधों पर निर्भर करेगी। मार्को रुबियो के अनुसार, यह सोचना पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना होगा कि हम चीन से उच्च स्तर पर बातचीत न करें।
मार्को रुबियो ने आगे कहा कि भले ही दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद हों, लेकिन कोल्ड वॉर के समय में भी अमेरिका सोवियत संघ के साथ बैठकें करता था। उन्होंने कहा, चीन कोई साधारण देश नहीं है। यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और इसकी सेना इतिहास में सबसे तेजी से अपनी ताकत बढ़ा रही है। व्यापार, सप्लाई चेन और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे विषयों पर हमारे बीच गंभीर मतभेद हैं, लेकिन नेताओं का आपस में मिलना और बातचीत करना एक जिम्मेदार कूटनीति का हिस्सा है। इसी दृष्टिकोण से इस यात्रा को देखा जा रहा है।
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