मध्य प्रदेश
3 घंटे पहले
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रसिक दुलारी की मौत और धीरेंद्र शास्त्री का रुख
वृंदावन के प्रेमानंद महाराज की शिष्या रही रसिक दुलारी की मौत को एक सप्ताह से भी ज्यादा का समय बीत चुका है। इस मामले की जांच अभी पुलिस कर रही है और मृतका के परिजनों ने आश्रम पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस बीच बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने इस घटना पर अपनी चुप्पी तोड़ी है और सनातन धर्म की सुरक्षा के साथ-साथ धाम में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। छतरपुर में अपने दिव्य दरबार के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि आज के समय में सनातन संस्कृति पर हर तरफ से हमले हो रहे हैं और ऐसे में सतर्क रहना बहुत आवश्यक है।
महिलाओं को विशेष सतर्कता बरतने की चेतावनी
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने बागेश्वर धाम आने वाली माताओं और बहनों के लिए एक कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि महिलाएं धाम में आते समय अकेले न आएं। यदि वे अकेले आती भी हैं, तो किसी भी अनजान व्यक्ति पर भरोसा न करें। शास्त्री ने आगे कहा कि धाम के किसी भी सेवादार पर भी आंख मूंदकर विश्वास न करें। उन्होंने महिलाओं को सलाह दी है कि किसी भी अपरिचित के साथ कहीं न जाएं और धाम में लंबे समय तक रुकने से परहेज करें। उनका कहना है कि वर्तमान समय काफी कठिन है और समाज में विपरीत परिस्थितियां बनी हुई हैं, जहां बेटियां घर के बाहर कहीं भी सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही हैं।
धाम की सुरक्षा और सीमाएं
धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट किया कि बागेश्वर धाम का परिसर लगभग 5 किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। उन्होंने कहा कि मंदिर के मुख्य प्रांगण और वहां बने हॉल की सुरक्षा और व्यवस्था की जिम्मेदारी पूरी तरह से उनके प्रबंधन की है, लेकिन इतने बड़े पूरे परिसर की सुरक्षा हर पल सुनिश्चित करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को स्वयं सजग और जागरूक रहने की जरूरत है। बागेश्वर सरकार के अनुसार, वे चाहते हैं कि लोग खुद समझदार बनें और दूसरों को भी सुरक्षित रहने के लिए प्रेरित करें।
बालाजी की छवि को लेकर चिंता
धीरेंद्र शास्त्री ने एक महत्वपूर्ण बात साझा करते हुए कहा कि वे किसी भी सूरत में बालाजी के नाम को बदनाम नहीं होने देना चाहते। उन्होंने कहा, मैं नहीं चाहता कि किसी छोटी सी चूक की वजह से बालाजी का नाम बदनाम हो। धाम में हर प्रकार के लोग आते हैं, जिनमें अच्छे और बुरे दोनों शामिल हैं। हर कोई यहां पुण्य के इरादे से नहीं आता, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से माताओं को सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर जगह सुरक्षा गार्ड तैनात करना मुमकिन नहीं है, क्योंकि सीमित संसाधनों में सब कुछ नियंत्रित करना बहुत मुश्किल काम है।
सनातन धर्म और उपद्रवियों पर तीखी टिप्पणी
अपने संबोधन में पंडित शास्त्री ने उन ताकतों की ओर इशारा किया जो सनातन धर्म के विरुद्ध सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि कई शत्रु ऐसे हैं जो लगातार सनातन धर्म और उन जैसे साधुओं के पीछे पड़े हैं और समय-समय पर उपद्रव फैलाते रहते हैं। वृंदावन की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आए दिन तीर्थ स्थलों और धार्मिक केंद्रों के साथ जो कुछ हो रहा है, वह बहुत ही दुखद और चिंताजनक है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी विपरीत परिस्थितियों में यदि हम स्वयं जागरूक नहीं हुए, तो कलंक लगने का डर हमेशा बना रहेगा। उन्होंने अंत में कहा कि समय वास्तव में बहुत खराब चल रहा है और समाज की इस स्थिति को देखते हुए सुरक्षा और सतर्कता ही एकमात्र उपाय है।
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