राष्ट्रीय राजनीति
7 घंटे पहले
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बीजेपी और बीजेडी के रिश्तों में आई दरार
मंगलवार को विपक्षी दलों द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद से लेकर बाहर तक विरोध प्रदर्शन किया गया। इस विरोध मार्च में बीजेडी यानी बीजू जनता दल की भागीदारी ने सभी को हैरान कर दिया है। लंबे समय तक बीजेपी के साथ वैचारिक रूप से सहज रहने वाली इस पार्टी का विपक्षी खेमे में नजर आना बीजेपी के लिए बड़े बदलाव का संकेत है।
केंद्र के साथ पुराने संबंधों का अंत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेडी ने दशकों से चले आ रहे अपने उस रुख को त्याग दिया है, जिसके तहत वह केंद्र की मोदी सरकार के साथ विभिन्न मुद्दों पर खड़ी रहती थी। भले ही बीजेडी किसी औपचारिक गठबंधन का हिस्सा नहीं थी, लेकिन संसद में सरकार के कई फैसलों का समर्थन करना उसकी पहचान बन गई थी। हालांकि, 2024 के चुनावी नतीजों के बाद से पार्टी की कार्यशैली में स्पष्ट बदलाव दिखाई दे रहा है।
विपक्षी एकता में बीजेडी की भूमिका
राहुल गांधी के नेतृत्व में हुए इस मार्च में बीजेडी के नेताओं की मौजूदगी यह बताती है कि अब क्षेत्रीय दल भाजपा के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। इस कदम से यह कयास भी तेज हो गए हैं कि क्या अब बीजेडी पूरी तरह से विपक्ष के साथ मिलकर काम करने की रणनीति अपना चुकी है। आगामी समय में संसद सत्र के दौरान सरकार के खिलाफ बीजेडी का रुख भाजपा के लिए बड़ी चुनौती खड़ा कर सकता है।
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