रेलवे के कबाड़ से तैयार हो रही अद्भुत कलाकृतियां, पुराने लोहे से बनी भगवान गणेश की भव्य प्रतिमा छत्तीसगढ़ 3 घंटे पहले 4
भारतीय रेलवे के कर्मचारी बेकार पड़े लोहे और पुराने कलपुर्जों का रचनात्मक उपयोग कर रहे हैं। कबाड़ से जुगाड़ के जरिए वे अनुपयोगी स्क्रैप को शानदार कलाकृतियों में बदल रहे हैं।

बेकार लोहे को नई पहचान

रेलवे परिसरों में हर दिन भारी मात्रा में ऐसा सामान निकलता है, जिसकी उपयोगिता समय के साथ समाप्त हो जाती है। इनमें पुराने लोहे के पार्ट्स, मालगाड़ियों के उपकरण, स्लीपर और अन्य धातु के टुकड़े शामिल हैं। आमतौर पर इस तरह के कबाड़ को स्क्रैप में नीलाम कर दिया जाता है, लेकिन अब रेलवे ने इसके रचनात्मक इस्तेमाल की नई पहल शुरू की है। कर्मचारी अब अपनी तकनीकी कुशलता और हुनर का परिचय देते हुए इन बेकार टुकड़ों को कलाकृतियों में ढाल रहे हैं।

कबाड़ से जुगाड़ का अनूठा प्रयोग

इस अनूठी मुहिम के तहत कर्मचारी पुराने लोहे के सामान को पूरी तरह व्यर्थ नहीं जाने देते। रेलवे वर्कशॉप में इन भारी धातु के हिस्सों को पहले जरूरत के मुताबिक काटा जाता है और फिर वेल्डिंग व अन्य तकनीकी माध्यमों से इन्हें जोड़कर मनचाहे आकार दिए जाते हैं। इसी कड़ी में पुराने लोहे से भगवान गणेश की एक भव्य और विशाल प्रतिमा का निर्माण किया गया है, जो चर्चा का विषय बनी हुई है।

तकनीकी हुनर और रचनात्मकता का मेल

यह प्रक्रिया केवल एक साधारण जुगाड़ नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहन तकनीकी समझ का उपयोग होता है। रेलवे के कर्मचारी कबाड़ के अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर न केवल मूर्तियों का निर्माण कर रहे हैं, बल्कि वे कला और इंजीनियरिंग का बेहतरीन तालमेल भी पेश कर रहे हैं। पुराने स्लीपर और लोहे के अन्य पार्ट्स जो कभी जंग खाकर खराब हो रहे थे, अब कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों की शोभा बढ़ा रहे हैं। इस पहल से न केवल संसाधनों का सही उपयोग हो रहा है, बल्कि रेलवे कर्मचारियों की रचनात्मक क्षमता भी निखर कर सामने आ रही है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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