छत्तीसगढ़ SI मुख्य परीक्षा स्थगित, अभ्यर्थियों में गहरा आक्रोश: जानें क्या है पूरा मामला छत्तीसगढ़ 5 घंटे पहले 3
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने सूबेदार, उप निरीक्षक और प्लाटून कमांडर मुख्य परीक्षा-2024 को अचानक स्थगित कर दिया है, जिससे बिलासपुर में वर्षों से तैयारी कर रहे छात्रों में भारी निराशा और हताशा है।

परीक्षा टलने से युवाओं का भविष्य अधर में

छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी की राह देख रहे युवाओं के लिए एक और बड़ी मुसीबत सामने आ गई है। राज्य में सूबेदार, उप निरीक्षक संवर्ग और प्लाटून कमांडर भर्ती के लिए होने वाली मुख्य परीक्षा-2024 को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने टाल दिया है। यह परीक्षा आगामी 2, 3 और 4 नवंबर 2026 को आयोजित होनी थी, लेकिन अब इसे अपरिहार्य कारणों का हवाला देकर स्थगित कर दिया गया है। सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा के बाद इस महत्वपूर्ण भर्ती प्रक्रिया के अचानक रुक जाने से अभ्यर्थियों में प्रशासन के खिलाफ जबरदस्त नाराजगी देखी जा रही है। बिलासपुर में परीक्षा की तैयारी कर रहे सैकड़ों युवाओं के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि वे कई वर्षों से इस दिन का इंतजार कर रहे थे।

नई तारीखों का अता-पता नहीं

आयोग की ओर से जारी आधिकारिक सूचना में परीक्षा स्थगित होने की जानकारी तो दी गई है, लेकिन इसके पीछे के ठोस कारणों का कहीं भी जिक्र नहीं है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि आयोग ने अब तक कोई नई संभावित तारीख भी जारी नहीं की है। इससे अभ्यर्थियों के बीच अनिश्चितता का माहौल है। प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी दिनचर्या और शारीरिक प्रशिक्षण का कार्यक्रम इन्हीं तारीखों को ध्यान में रखकर तय किया था। अब जब परीक्षा की तारीख ही गायब हो गई है, तो उनकी पढ़ाई की लय भी पूरी तरह से बिगड़ गई है। परीक्षा की नई तारीख कब घोषित होगी और भर्ती प्रक्रिया कब तक पूर्ण होगी, इसे लेकर कोई भी आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है, जिससे छात्रों का मानसिक तनाव बढ़ता जा रहा है।

माधव चंद्रवंशी: छह साल की तपस्या पर पानी

इस परीक्षा की तैयारी कर रहे माधव चंद्रवंशी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि वे पिछले पांच से छह सालों से निरंतर प्रतियोगी परीक्षाओं की दौड़ में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि महीनों से वे अपनी पूरी ऊर्जा SI मुख्य परीक्षा को समर्पित कर चुके थे। कई अभ्यर्थी ऐसे हैं जो पिछले सात महीनों से अपने घरों तक नहीं गए हैं और बाहर रहकर एक कमरे में सीमित संसाधनों के साथ पढ़ाई कर रहे हैं। माधव के अनुसार, बिना किसी ठोस वजह के परीक्षा का टलना युवाओं के मनोबल को तोड़ने वाला है। उन्होंने राज्य सरकार और आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं के कीमती समय की बर्बादी पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

अंकित गुप्ता: फिजिकल और लिखित परीक्षा के बीच फंसी उम्मीदें

अभ्यर्थी अंकित गुप्ता के अनुसार, वे केवल लिखित परीक्षा पर ही निर्भर नहीं थे, बल्कि शारीरिक प्रशिक्षण के लिए भी घंटों पसीना बहा रहे थे। उन्होंने कहा कि नवंबर में परीक्षा हो जाने के बाद वे अपनी आगे की रणनीति तय करने की योजना बना रहे थे, लेकिन इस स्थगन ने उनकी पूरी योजना को प्रभावित कर दिया है। अंकित ने मांग की है कि आयोग को परीक्षा स्थगित करने के वास्तविक कारण साझा करने चाहिए ताकि अभ्यर्थियों को हो रही गलतफहमी दूर हो सके। उनका मानना है कि सरकार को भर्ती कैलेंडर को बहुत ही गंभीरता से लागू करना चाहिए ताकि किसी भी छात्र को बार-बार मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

कमलकांत पटेल और दोहरी मार

कमलकांत पटेल का मामला और भी गंभीर है क्योंकि वे एक साथ दो बड़ी भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा पहले ही स्थगित हो चुकी थी और अब SI मुख्य परीक्षा के भी टल जाने से उनकी मेहनत और भविष्य की योजनाओं पर सीधा असर पड़ा है। कमलकांत कहते हैं कि त्योहारों के इस मौसम में भी वे पढ़ाई से नहीं हटे और घर जाना तक छोड़ दिया, ताकि सफलता हासिल कर सकें। अब दोनों ही परीक्षाएं स्थगित होने से उनके सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि वे अब किस लक्ष्य को केंद्र में रखकर अपनी आगे की तैयारी जारी रखें।

हिमांशू चंद्रा: उम्र का दबाव और परिवार की उम्मीदें

वर्ष 2019 से लगातार मेहनत कर रहे हिमांशु चंद्रा का कहना है कि अब वे 29 वर्ष के हो चुके हैं और परिवार की उम्मीदें उन पर भारी पड़ रही हैं। उन्होंने बताया कि टेस्ट सीरीज और विभिन्न संस्थानों की मदद से उन्होंने अपनी रणनीति बनाई थी। उनके घरवाले चाहते थे कि वे जल्द से जल्द नौकरी प्राप्त करें, जिसके लिए परिवार ने आर्थिक सहयोग भी दिया था। परीक्षा टलने के बाद अब उन्हें अपने परिवार को जवाब देना मुश्किल हो रहा है। हिमांशु ने आयोग से अपील की है कि वे जल्द से जल्द परीक्षा का आयोजन सुनिश्चित करें ताकि अभ्यर्थियों को इस मानसिक प्रताड़ना से मुक्ति मिल सके।

अनिल कुर्रे: प्रशासनिक ढिलाई पर सवाल

अनिल कुर्रे ने भर्ती प्रक्रिया के प्रबंधन पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि यदि सरकार को परीक्षाएं नहीं लेनी हैं, तो वे वैकेंसी क्यों निकालते हैं? करीब ढाई साल से तैयारी कर रहे अनिल का कहना है कि बार-बार परीक्षाएं टलने से सरकारी तंत्र पर युवाओं का भरोसा खत्म हो रहा है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अभ्यर्थियों की समस्याओं का समाधान नहीं निकाला, तो युवा उग्र आंदोलन के लिए मजबूर हो जाएंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परीक्षा आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाएं बहुत पहले सुनिश्चित हो जानी चाहिए थीं।

अश्वनी कुर्रे और तरुण पटेल: करियर छोड़ने का दंश

अश्वनी कुर्रे ने सरकारी नौकरी के सपने के लिए अपनी 16 हजार रुपये प्रतिमाह की निजी नौकरी छोड़ दी थी। उनका कहना है कि अब वे न घर के रहे न घाट के। पढ़ाई करने का मन नहीं हो रहा और आर्थिक तंगी अलग से सता रही है। वहीं, तरुण पटेल ने बताया कि उन्होंने अपनी मां से केवल एक साल का समय मांगा था, लेकिन अब अनिश्चितता ने उन्हें असमंजस में डाल दिया है। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि पढ़ाई जारी रखें या फिर से कोई रोजगार तलाशें। बिना किसी नई तारीख के, इन युवाओं का भविष्य पूरी तरह से अंधकारमय नजर आ रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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